दिल्ली में पहले महिला थाने का उद्घाटन, एसएचओ को बेटी की सलाह- 'थाना अच्छी तरह संभालना'
रंजन
- 19 Jun 2026, 06:47 PM
- Updated: 06:47 PM
(सौम्या शुक्ला)
नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शुक्रवार को अधिकतर महिला कर्मियों वाले पहले थाने का उद्घाटन हुआ, जिसका उद्देश्य महिलाओं को आरामदायक माहौल, भरोसा और जल्दी न्याय दिलाना है।
इस थाने की प्रभारी (एसएचओ) लक्ष्मी सिंह के लिए यह पल बेहद खास था। जब वह उत्तर दिल्ली के सब्जी मंडी पुलिस थाने के परिसर में बने इस नए थाने की जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर रही थीं, तब उनकी 13 वर्षीय बेटी की कही बात उन्हें याद आ रही थी।
सिंह के अनुसार उनकी बेटी ने उनसे कहा था, "आप हफ्ते में एक दिन ही घर आना, लेकिन अपना थाना अच्छी तरह से संभालना।"
सिंह के अनुसार उनके लिए यह बात एक मां और पुलिस अधिकारी दोनों के रूप में त्याग और जिम्मेदारी की याद दिलाने वाली थी।
उन्होंने 'पीटीआई-भाषा' से कहा, "यह सुनकर मुझे राहत मिली, लेकिन मेरी जिम्मेदारी भी बढ़ गई। यह थाना हर उस महिला के लिए है जो यहां मदद लेने आएगी।"
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा की मौजूदगी में इस थाने का उद्घाटन किया। यह दिल्ली का पहला ऐसा थाना है, जिसे महिलाओं की सुरक्षा मजबूत बनाने और संवेदनशील पुलिस व्यवस्था विकसित करने के लिए बनाया गया है।
यह थाना उत्तर जिले में घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, पीछा करने (स्टॉकिंग) और हमले जैसे मामलों को देखेगा। अधिकारियों ने बताया कि यहां जागरूकता अभियान, परामर्श सत्र और सामुदायिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
सिंह ने कहा कि सामान्य थानों की तुलना में इस थाने का माहौल अधिक सहज बनाने की कोशिश की गई है।
उन्होंने बताया कि यहां बच्चों के लिए एक अलग कमरा बनाया गया है, ताकि शिकायत दर्ज कराने आने वाली महिलाएं अपने बच्चों को साथ ला सकें।
सिंह ने महिला पुलिसकर्मियों के लिए एक जिम भी बनाया गया है ताकि उनके लिए कार्यस्थल को बेहतर बनाया जा सके।
चार बहनों के साथ पली-बढ़ीं लक्ष्मी सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी महिला पुलिस के पास आने में हिचकिचाए नहीं।
उन्होंने कहा, "मैं जानती हूं कि संवेदनशील मामलों की शिकायत करते समय कई महिलाएं असहज महसूस करती हैं। हमारी प्राथमिकता है कि वे सुरक्षित महसूस करें और खुलकर अपनी बात कह सकें।"
इस थाने में 60 प्रतिशत कर्मचारी महिलाएं हैं, जिनमें जांच अधिकारी और सहायक कर्मचारी भी शामिल हैं।
वैवाहिक विवाद के मामले में मदद लेने आई 33 वर्षीय एक महिला ने कहा कि यहां का माहौल अलग महसूस होता है।
उन्होंने कहा, "मैं यहां सहज महसूस कर रही हूं। महिलाएं उन बातों को समझती हैं जिन्हें कई बार पुरुष नहीं समझ पाते। मैं बिना किसी डर या झिझक के अपनी बात रख सकती हूं।"
उत्तर दिल्ली में दिल्ली विश्वविद्यालय का नॉर्थ कैंपस स्थित है और यहां हजारों छात्राएं अपने परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करती हैं। ऐसे में कई लोग इस थाने को एक जरूरी सहायता केंद्र के रूप में देख रहे हैं।
इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी महिला विश्वविद्यालय की अतिरिक्त रजिस्ट्रार डॉ. मोहाली वानकर ने इस पहल को महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अच्छा बताया।
उन्होंने कहा, "डर और चिंता के कारण महिलाएं अक्सर अपराध की शिकायत करने से हिचकिचाती हैं। ऐसा स्थान उनकी झिझक कम करने के साथ साथ उन्हें न्याय पाने के लिए आगे आने के लिए प्रेरित कर सकता है।"
सत्यवती कॉलेज की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पूनम सिंह ने कहा कि यह पहल पुलिस व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव साबित हो सकती है।
उन्होंने कहा, "किसी पुरुष द्वारा प्रताड़ित की गई महिला अपनी पीड़ा किसी पुरुष अधिकारी को बताने में सहज महसूस नहीं कर सकती। यहां उसकी बात ऐसी महिलाएं सुनेंगी जो उसकी भावनाओं को बेहतर ढंग से समझ सकेंगी।"
उन्होंने कहा कि कई लोगों के लिए यह नया थाना सिर्फ एक थाना नहीं, बल्कि न्याय और संवेदनशीलता के प्रति बदलती सोच का प्रतीक है।
लक्ष्मी सिंह अब अपनी नयी जिम्मेदारी संभाल रही हैं और मातृत्व तथा कर्तव्य के बीच संतुलन बना रही हैं।
उम्मीद है कि भविष्य में इस मॉडल को पूरे शहर में लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक महिलाओं के लिए आगे आकर अपनी बात रखना और न्याय पाना आसान हो सके।
भाषा जोहेब रंजन
रंजन
रंजन
1906 1847 दिल्ली