पूर्वोत्तर क्षेत्र सतत कृषि के दम पर देश का अगला विकास इंजन बन सकता है: सीतारमण
मनीषा
- 19 Jun 2026, 01:52 PM
- Updated: 01:52 PM
(फाइल फोटो के साथ)
भोइर्यम्बोंग (मेघालय), 19 जून (भाषा) केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र अपनी सतत कृषि एवं जैविक उत्पादों की ताकत का उपयोग करके भारत का अगला विकास इंजन बनने की क्षमता रखता है।
उन्होंने कहा कि मेघालय वैश्विक बाजारों में अपने भरोसे के कारण इस क्षेत्र का नेतृत्व करने की विशेष स्थिति में है।
ईस्टर्न री-भोई ऑर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड द्वारा पूर्वोत्तर भारत में स्थापित सबसे बड़े जैविक मसाला प्रसंस्करण संयंत्र का यहां उद्घाटन करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा, '' कृषि का भविष्य अब केवल अधिक उत्पादन करने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर, स्वच्छ, भरोसेमंद और प्रीमियम गुणवत्ता वाले उत्पाद देने वालों के हाथों में है।''
उन्होंने कहा, '' जब मेघालय के किसान आगे बढ़ेंगे, तो पूरा पूर्वोत्तर आगे बढ़ेगा। जब पूर्वोत्तर आगे बढ़ेगा, तो भारत की विकास यात्रा को एक नया इंजन मिलेगा।''
वित्त मंत्री ने कहा, '' दुनिया ऐसे युग में प्रवेश कर रही है जहां भरोसा एक महत्वपूर्ण मूल्य बन गया है। मेघालय इस भविष्य के लिए विशेष रूप से उपयुक्त स्थिति में है क्योंकि उसके पास वह भरोसा है जो प्रकृति, समुदाय एवं पीढ़ियों से चले आ रहे परिवेशी ज्ञान में निहित है।''
सीतारमण ने कहा कि राज्य की मसाले से जुड़ी आर्थिक गतिविधियां बढ़ना इस बात का प्रमाण है कि '' आर्थिक वृद्धि और पर्यावरणीय संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं'' और विकास प्रकृति की कीमत पर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, '' हमें प्रकृति के साथ जीना और उसके साथ रहना होगा।''
भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, '' देश का 2047 तक 'विकसित भारत' बनने का लक्ष्य तभी संभव है जब हर समुदाय, हर क्षेत्र और हर राज्य को राष्ट्रीय विकास की कहानी में उत्पादक रूप से शामिल किया जाए और इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र केंद्रीय भूमिका में है।''
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा के बयान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वह चाहती हैं कि पूर्वोत्तर केवल देश के साथ कदम मिलाकर न चले, बल्कि उसका नेतृत्व करे।
उन्होंने कहा, '' मैंने मुख्यमंत्री को कहते सुना कि हम चाहते हैं कि सभी राज्य विकसित हों और पूर्वोत्तर पीछे न रहे। मैं चाहती हूं कि पूरा देश कहे कि पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत का नेतृत्व करेगा।''
वित्त मंत्री ने मेघालय सरकार, महिला समूहों और उद्यमियों को राज्य में जैविक कृषि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए बधाई दी।
उन्होंने यह भी कहा कि युवा उद्यमी मेघालय के जैविक मसालों पर आधारित वैश्विक ब्रांड बना रहे हैं और सहकारी समितियां, जो पहले कुछ परिवारों से शुरू हुई थीं, अब इतनी मजबूत हो गई हैं कि वे सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से बातचीत कर सकती हैं।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
1906 1352 भोइर्यम्बोंग (मेघालय)