शिवसेना (उबाठा) के छह सांसद पार्टी बैठक में नहीं हुए शामिल, शिंदे गुट में शामिल होना लगभग तय
मनीषा
- 18 Jun 2026, 12:38 PM
- Updated: 12:38 PM
(तस्वीरों के साथ जारी)
नयी दिल्ली, 18 जून (भाषा) शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नौ लोकसभा सदस्यों में से छह सदस्य बृहस्पतिवार को यहां हुई संसदीय दल की बैठक में शामिल नहीं हुए जिससे पार्टी में विभाजन के संकेत स्पष्ट हो गए और इन सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में औपचारिक रूप से शामिल होने की संभावना प्रबल हो गई।
शिवसेना (उबाठा) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे बैठक में शामिल हुए। पार्टी के एकमात्र राज्यसभा सदस्य संजय राउत भी बैठक में मौजूद थे। शेष छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के संसदीय दल में विभाजन की लगभग पुष्टि कर दी है।
बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसद नागेश आष्टीकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे हैं।
सूत्रों ने बताया कि सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं और उसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है क्योंकि माना जा रहा है कि अध्यक्ष कार्यालय को सत्यापन के लिए कुछ सांसदों की व्यक्तिगत उपस्थिति की जरूरत है और यह प्रक्रिया ''आगामी दिनों में'' पूरी होने की संभावना है।
सूत्रों ने बताया कि फिलहाल हस्ताक्षरों का सत्यापन किया जा रहा है।
शिवसेना (उबाठा) ने बुधवार को तीन लाइन का व्हिप जारी कर अपने सांसदों को बृहस्पतिवार पूर्वाह्न 11 बजे बैठक में शामिल होने का निर्देश दिया था। इस कदम का उद्देश्य बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की संभावित कार्यवाही का रास्ता तैयार करना था।
लोकसभा में शिवसेना (उबाठा) के नौ सांसद हैं और दल-बदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा।
सावंत ने बैठक से पहले संवाददाताओं से कहा था, ''व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पार्टी प्रमुख (उद्धव ठाकरे) से विचार-विमर्श के बाद कार्रवाई की जाएगी।''
हालांकि, शिंदे गुट के सूत्रों ने व्हिप की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची (दल-बदल रोधी कानून) के तहत व्हिप केवल सदन की कार्यवाही के लिए जारी किया जा सकता है, पार्टी की आंतरिक बैठकों के लिए नहीं।
शिंदे गुट के एक पदाधिकारी ने कहा, ''अदालतें कई बार कह चुकी हैं कि कोई राजनीतिक दल संगठनात्मक अनुशासन के तहत (बैठकों में शामिल होने समेत) आंतरिक निर्देश जारी कर सकता है लेकिन ऐसे व्हिप का पालन नहीं करने पर दसवीं अनुसूची के तहत तब तक कार्रवाई नहीं हो सकती, जब तक कि मामला सदन में मतदान से जुड़ा न हो।''
सूत्रों के अनुसार, शिंदे मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचे और बुधवार को मुंबई लौट गए। अविभाजित शिवसेना में 2022 में हुए विभाजन के मुख्य सूत्रधार शिंदे ही थे। उस विभाजन के कारण महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी।
सावंत, देसाई और राउत ने बुधवार को बिरला से मुलाकात कर उनसे किसी भी गैरकानूनी दल-बदल को रोकने का आग्रह किया था।
देसाई ने कहा था, ''कानून के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने पर भी कोई समूह सीधे किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता। किसी समूह के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत होने पर केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है।''
भाषा
सिम्मी मनीषा
मनीषा
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