कार्यकर्ताओं ने वीबी-जी राम जी को वापस लेने की मांग की, एक जून से शुरू करेंगे विरोध प्रदर्शन
नेत्रपाल
- 17 Jun 2026, 07:38 PM
- Updated: 07:38 PM
नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) प्रस्तावित विकसित भारत रोजगार गारंटी एवं आजीविका मिशन - ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) को वापस लेने की मांग करते हुए कार्यकर्ताओं और मजदूर संगठनों ने बुधवार को एक जुलाई से विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की।
नरेगा संघर्ष मोर्चा, कृषि मजदूर संगठनों और श्रम अधिकार समूहों के सदस्यों ने यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि सरकार के अपने आंकड़ों के विश्लेषण से यह पता चलता है कि प्रस्तावित योजना के तहत 125 दिन के रोजगार का जो वादा किया गया है, वह न तो आर्थिक रूप से समर्थित है और न ही प्रशासनिक रूप से संभव है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की ओर से जारी मसौदा नियम इस योजना के तहत "घटती रोजगार गारंटी" को उजागर करते हैं।
कार्यकर्ता निखिल डे ने कहा कि यह कानून ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम की मूल भावना को खत्म करता है और पहले से मौजूद रोजगार में कमी का संकेत मिलता है।
उन्होंने कहा कि पूरा बोझ राज्यों पर आ जाएगा और दबाव यह बनेगा कि रोजगार न दिया जाए, क्योंकि उसका खर्च राज्यों को खुद उठाना होगा।
'ऑल इंडिया एग्रीकल्चरल वर्कर्स यूनियन' के महासचिव बी वेंकट ने कहा कि वे नयी योजना के खिलाफ हर गांव में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
उन्होंने कहा, "एक जुलाई से पूरे देश में गांव, ब्लॉक, पंचायत और वार्ड स्तर पर प्रदर्शन होंगे। हम दिल्ली में भी कुछ विरोध प्रदर्शन करेंगे।"
वेंकट ने यह भी कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा के साथ मिलकर 'जेल भरो' आंदोलन भी चलाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वे अपनी समस्याएं उठाने के लिए विपक्षी दलों से भी संपर्क करेंगे।
समूहों द्वारा दिए गए आंकड़ों के अनुसार, अलग-अलग राज्यों में प्रति जॉब कार्ड बहुत कम रोजगार मिलेगा।
आंकड़ों के अनुसार, आंध्र प्रदेश में लगभग 42 दिन, छत्तीसगढ़ में 39 दिन, बिहार में 31 दिन, कर्नाटक और मध्यप्रदेश में 26-26 दिन, उत्तर प्रदेश में 28 दिन और महाराष्ट्र में लगभग 14 दिन रोजगार मिलेगा।
समूहों ने कहा कि रोजगार देने के वादे और असल में मिलने वाले रोजगार के बीच बड़ा अंतर है।
उन्होंने कहा कि अगर हर 'जॉब कार्ड' पर 125 दिन रोजगार देना हो, तो राज्यों को बहुत ज्यादा अतिरिक्त पैसे की जरूरत होगी, जैसे मध्यप्रदेश को 31,013 करोड़ रुपये, राजस्थान को 27,212 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश को 27,987 करोड़ रुपये, महाराष्ट्र को 22,549 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 17,481 करोड़ रुपये और बिहार को 15,939 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आवश्यकता होगी।
भाषा जोहेब नेत्रपाल
नेत्रपाल
1706 1938 दिल्ली