शिवसेना (उबाठा) में बगावत के संकेत, पार्टी नेताओं और बागियों ने की बिरला से अलग-अलग भेंट
अविनाश
- 17 Jun 2026, 07:32 PM
- Updated: 07:32 PM
नयी दिल्ली, 17 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस में बगावत के बाद अब शिवसेना (उबाठा) में भी छह सांसदों के बागी होने के संकेत बुधवार को स्पष्ट रूप से सामने आ गए, जब पार्टी के प्रमुख नेताओं और बागियों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से अलग-अलग मुलाकात कर अपना पक्ष रखा।
पार्टी के लोकसभा सदस्य अरविंद सावंत एवं अनिल देसाई और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने लोकसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि इस मामले में कोई भी फैसला नियमों, कानून, संविधान और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए।
दूसरी तरफ, शिवसेना (उबाठा) के बागी नेताओं के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष बिरला से मुलाकात की और दावा किया कि उन्हें लोकसभा में पार्टी के नौ सांसदों में से छह का समर्थन प्राप्त है।
बागियों के साथ बैठक में क्या चर्चा हुई, इस बारे में दोनों पक्षों की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई जानकारी नहीं दी गई
वहीं, उद्धव ठाकरे के करीबी और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने कहा कि पार्टी को किसी भी सांसद की ओर से सत्तारूढ़ शिवसेना में शामिल होने की सूचना नहीं मिली है, हालांकि उनका दावा है कि हर सांसद को 50 करोड़ रुपये का प्रलोभन दिया गया है।
शिवसेना (उबाठा) ने अपने सभी सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर बृहस्पतिवार को संसदीय दल की बैठक में उपस्थित रहने के लिए कहा है।
बिरला से मुलाकात के बाद राउत ने संवाददाताओं से कहा, ''कल से मैं देख रहा हूं कि हमारी पार्टी के कुछ लोगों को लेकर ऐसी खबरें चलाई जा रही हैं कि कुछ सांसद अलग समूह बनाने की कोशिश कर रहे हैं और लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने वाले हैं। हमने लोकसभा अध्यक्ष से कहा है कि हमें नहीं पता कि ये खबरें सही हैं या गलत, क्योंकि इस संबंध में हमें कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। लेकिन इस तरह की खबरें लगातार सामने आ रही हैं।''
उन्होंने बताया, ''हमने उन्हें एक पत्र भी सौंपा है, जिसमें अनुरोध किया गया है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को शिवसेना (उबाठा) का प्रतिनिधि बताकर अलग समूह बनाने का दावा करते हुए उनके पास आता है, तो पहले हमारे पक्ष को भी सुना जाए।''
राउत ने कहा, ''जो भी फैसला किया जाए, वह पूरी तरह नियमों, कानून, संविधान और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप होना चाहिए। हमारी केवल यही अपेक्षा है।''
राउत महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पाला बदलने के लिए ''50 करोड़ रुपये की पेशकश'' किए जाने का आरोप लगा चुके हैं।
राउत ने कहा कि बिरला ने उन्हें आश्वासन दिया कि कोई भी फैसला लेने से पहले वह कानून के हर पहलू पर विचार करेंगे।
उन्होंने कहा, ''लोकसभा अध्यक्ष एक सम्मानित व्यक्ति हैं और उन्होंने हमसे कहा कि अगर कोई उनसे मिलने आता है तो वह सभी पहलुओं को ध्यान में रखेंगे।''
देसाई ने संवाददाताओं को बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक प्रतिवेदन सौंपकर उनसे शिवसेना (उबाठा) से किसी भी गैरकानूनी दलबदल को रोकने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा, ''कानून के तहत दो-तिहाई सांसदों का समर्थन होने पर भी कोई समूह सीधे किसी अन्य दल में विलय नहीं कर सकता। किसी समूह के पास जरूरी दो-तिहाई बहुमत होने पर केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है।''
देसाई ने कहा, ''यह फैसला लोकसभा अध्यक्ष का होता है इसलिए अगर दो-तिहाई सांसदों के समर्थन का दावा करने वाला कोई समूह किसी अन्य दल में विलय के लिए उनके पास पहुंचता है तो नियमों के तहत उस समूह को मान्यता नहीं दी जा सकती क्योंकि प्रावधानों के अनुसार केवल मूल राजनीतिक दल का विलय हो सकता है। छह सांसद होने से भी कोई फर्क नहीं पड़ता।''
शिवसेना (उबाठा) के लोकसभा में नौ सांसद हैं और दल बदल रोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा।
सावंत और देसाई के अलावा शिवसेना (उबाठा) नेता एवं सांसद राजाभाऊ वाजे ने घोषणा की है कि वह पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे के प्रति निष्ठावान हैं। बाकी छह सांसदों के बारे में माना जा रहा है कि वे एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
बिरला से मुलाकात से पहले राउत ने आरोप लगाया कि शिवसेना (उबाठा) के सांसदों को धन का प्रलोभन दिया जा रहा है।
राउत ने कहा, ''मुझे बताया गया कि कीमत 50 करोड़ रुपये है और रात तक प्रत्येक सांसद को 15 करोड़ रुपये पहुंचाए जाने थे। पैसे लिए बिना वे विमान में सवार होने को तैयार नहीं थे।''
भाषा हक हक अविनाश
अविनाश
1706 1932 दिल्ली