एनसीपीआई बागी टीएमसी सांसदों को अपनाने को तैयार : काकोली घोष दस्तीदार
प्रशांत
- 16 Jun 2026, 09:05 PM
- Updated: 09:05 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर राजनीतिक संकट मंगलवार को और गहरा गया, जब बागी गुट ने दावा किया कि उनके पक्ष में लोकसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 20 से बढ़कर 22 तक पहुंच सकती है।
वहीं, प्रतिद्वंद्वी खेमों ने पार्टी की वैधता, नेतृत्व और भविष्य को लेकर एक-दूसरे पर तीखे आरोप लगाए।
तृणमूल की बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने मंगलवार को दावा किया कि नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) उनकी पार्टी के सभी असंतुष्ट लोकसभा सदस्यों को स्वीकार करने के लिए तैयार है।
दस्तीकार ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा, ''हमें पहले ही स्वीकृति मिल चुकी है। वे (एनसीपीआई) हमें अपने साथ लेने के लिए तैयार हैं। हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ मिलकर काम करेंगे।''
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के बागी विधायकों से उनका कोई संबंध नहीं है।
उन्होंने कहा, "हमारा उनसे कोई संबंध नहीं है। वे एक अलग समूह हैं; उनके मुद्दे और एजेंडा अलग हैं।"
यह बयान उस समय आए जब रविवार को टीएमसी के 20 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की थी और एनसीपीआई में विलय की घोषणा की थी।
अपने गुट की संख्या के बारे में पूछे जाने पर दस्तीदार ने कहा, ''फिलहाल हम 20 सांसद हैं। संख्या 22 तक पहुंच सकती है।''
हालांकि, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी खेमे ने इस टूटे हुए समूह को ''गद्दार टीम'' करार देते हुए कहा कि असली टीएमसी ममता बनर्जी के नेतृत्व में ही है।
टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने कहा, ''दो टीमें हैं-टीएमसी टीम और गद्दार टीम। टीएमसी टीम का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं। गद्दार टीम का नेतृत्व नरेन्द्र मोदी कर रहे हैं।''
रॉय ने एनसीपीआई के चुनाव चिह्न का उल्लेख करते हुए कहा कि टीएमसी टीम का प्रतीक 'जोड़ाफूल' है, जबकि दूसरे गुट का प्रतीक 'कलम की निब' है।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने भी बागी गुट पर निशाना साधते हुए उन्हें ''गद्दार'' बताया और कहा कि असली टीएमसी का नेतृत्व 'दीदी' कर रही हैं और सभी जानते हैं कि दीदी ममता बनर्जी हैं।
आजाद ने आरोप लगाया कि यह (बागी) गुट व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से प्रेरित है और मंत्री पदों को लेकर आपस में संघर्ष कर रहा है।
एनसीपीआई में विलय को लेकर सवाल उठाते हुए आजाद ने कहा कि यह एक अपंजीकृत और अल्प-मान्यता प्राप्त पार्टी है जिसका संसदीय स्तर पर कोई प्रभाव नहीं है।
इस बीच, टीएमसी के बागी सांसदों ने एनसीपीआई के साथ विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए और लोकसभा महासचिव से मुलाकात भी की।
तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच, दस्तीदार के अनुसार एनसीपीआई ने ज्योतिप्रकाश चटर्जी को अपना नया अध्यक्ष नियुक्त किया है।
एनसीपीआई की संस्थापक शेवली कुंडू ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा था कि उन्होंने पार्टी प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि दस्तीदार स्वयं पार्टी की कमान संभाल सकती हैं।
'पीटीआई-भाषा' के एक सवाल के जवाब में मंगलवार को दस्तीदार ने कहा कि चटर्जी ही एनसीपीआई के नए अध्यक्ष हैं।
बागी खेमे में शामिल हो चुके टीएमसी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सदस्य सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि संसदीय समूहों की मान्यता और कार्यालय आवंटन से जुड़े फैसले जुलाई में लोकसभा के मानसून सत्र के लिए पुनः बैठक शुरू होने से पहले लेने होंगे।
बंद्योपाध्याय ने कहा, ''तृणमूल कांग्रेस के अपने चुनाव चिह्न, परिसंपत्तियां और अन्य संगठनात्मक मामले हैं। इन सभी मुद्दों पर निर्णय लेने होंगे। अनुभव बताता है कि इनमें से कई मामलों का अंततः निपटारा अदालत में होगा।''
इस बीच, टीएमसी की बागी सांसद रचना बनर्जी ने इस बात से इनकार किया कि असंतुष्ट सांसद ममता बनर्जी के खिलाफ काम कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने राजग के साथ जाने के अपने निर्णय का बचाव भी किया।
उन्होंने कहा, ''उनके (ममता बनर्जी) खिलाफ कभी कोई विद्रोह नहीं हो सकता। दीदी के साथ हमारा बहुत पुराना रिश्ता है, जो हमेशा वैसा ही रहेगा।''
पार्टी की पिछली चुनावी सफलताओं में ममता बनर्जी की भूमिका को स्वीकार करते हुए रचना ने कहा, ''लोगों ने दीदी को देखकर वोट दिया था। दीदी ही तृणमूल कांग्रेस की पहचान और प्रतीक हैं।''
हालांकि, उन्होंने तर्क दिया कि केंद्र और राज्य में एक ही राजनीतिक पक्ष की सरकार होने से विकास कार्यों में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा, ''मुझे लगता है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार एक ही पक्ष की हों, तो काम कराना कहीं अधिक आसान हो जाएगा।''
रचना ने कहा, ''लोग चाहते हैं कि हम उनके लिए कुछ करें। ऐसा करने के लिए केंद्र का सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। दीदी के प्रति पूरा सम्मान रखते हुए मैं यह महसूस करती हूं कि जब हम उनके साथ थे, तब कई बार हमारे काम में बाधाएं पैदा की गईं। हम वह काम नहीं कर पाए जो वास्तव में करना चाहते थे।''
असंतुष्ट सांसदों द्वारा रविवार को एनसीपीआई में विलय की योजना की घोषणा करने और लोकसभा में अलग बैठने की व्यवस्था की मांग करने के बाद टीएमसी में संकट और गहरा गया।
बागी सांसदों ने यह संकेत भी दिया है कि वे खुद को ''वास्तविक टीएमसी'' के रूप में मान्यता दिलाने का दावा पेश करेंगे, जबकि ममता बनर्जी खेमे का कहना है कि ''दल-बदल करने वालों'' ने पार्टी की पहचान, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक ढांचे पर अपना कोई भी दावा खो दिया है।
एनसीपीआई ने जनवरी 2023 में एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण कराया था। निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार, उसका पता पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के संकराइल स्थित एक भवन में दर्ज है।
वर्ष 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने चार उम्मीदवार उतारे थे और उसका चुनावी नारा था- ''राजनीतिक दल-बदलुओं को खारिज करें।''
इन चार उम्मीदवारों में से दो ने पार्टी के चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ा, एक ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, जबकि चौथे का नामांकन खारिज कर दिया गया था। चुनाव लड़ने वाले तीनों उम्मीदवार हार गए थे और उन्हें 'नोटा' (उपरोक्त में से कोई नहीं) के बराबर या उससे भी कम वोट मिले थे।
भाषा रवि कांत प्रशांत
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