केंद्र ने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के दावे का किया खंडन
दिलीप
- 16 Jun 2026, 06:59 PM
- Updated: 06:59 PM
नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को सोशल मीडिया पोस्ट में किये जा रहे उन दावों को 'फर्जी' करार दिया, जिनमें कहा गया था कि हाल में हुई सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा का प्रश्न-पत्र लीक हो गया था।
पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) की फैक्टचेक शाखा ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे कई पोस्ट में यह आरोप लगाया जा रहा है कि यूपीएससी सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा, 2026 का प्रश्न पत्र लीक हो गया था।''
उसने कांग्रेस की छात्र शाखा भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) के सोशल मीडिया पोस्ट की तस्वीर संलग्न करते हुए लिखा, ''यह दावा फर्जी है।''
संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय विदेश सेवा एवं भारतीय पुलिस सेवा एवं अन्य सेवाओं के अधिकारियों के चयन के लिए हर साल तीन चरणों--प्रारंभिक, मुख्य और साक्षात्कार-- में सिविल सेवा परीक्षा आयोजित करता है ।
प्रारंभिक परीक्षा 24 मई को आयोजित की गयी थी और उसका परिणाम सोमवार को घोषित किया गया।
पीआईबी की फैक्टचेक शाखा ने कहा, ''यूपीएससी परीक्षा के प्रश्न-पत्र पूरे भारत से चुने गए संबंधित विषयों के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए जाते हैं।''
उसने कहा, ''कृपया भ्रामक और अपुष्ट दावों को साझा करने से बचें।''
उसने यह भी कहा कि 'केवल आधिकारिक स्रोतों से मिली जानकारी पर ही भरोसा करें।''।
पीआईबी की फैक्टचेक शाखा ने प्रश्नपत्र के कथित लीक के मामले में एक संस्थान द्वारा दी गई सफाई का लिंक भी साझा किया।
इंस्टीट्यूट की वेबसाइट पर डाले गए स्पष्टीकरण नोट में कहा गया, ''यह दावा किया जा रहा है कि अनंतम आईएएस के पास यूपीएसीपी सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2026 के सवाल पहले से ही मौजूद थे -- अथवा प्रश्नपत्र हमें लीक किया गया था -- क्योंकि हमारे कुछ उत्तर कुंजी एक्सप्लेनेशन लेख में प्रकाशन की तारीख परीक्षा से पहले की दिखाई दे रही थी।''
इसमें कहा गया, ''हम इससे सीधे तौर पर इसका जवाब देना चाहते हैं, क्योंकि यह मामला गंभीर भी है और गलत भी।''
संस्थान ने कहा, ''जैसे ही प्रश्नपत्र सार्वजनिक हुआ, हमारे शिक्षकों ने वही किया जो हम हर साल करते हैं: सामान्य अध्ययन प्रथम प्रश्नपत्र को हल किया, एक विस्तृत उत्तर कुंजी तैयार की और प्रत्येक उत्तर को समझाते हुए विस्तृत लेख लिखे—जिसमें उसके पीछे की अवधारणा, विकल्पों को हटाने का तर्क और उसका स्रोत शामिल था।''
संस्थान ने कहा, ''यह बहुत सारी सामग्री है। एक साथ दर्जनों विस्तृत व्याख्याएं प्रकाशित करने से, उन सभी पर एक ही तारीख और समय दर्ज होता, हमारे सब्सक्राइबर्स को एक ही झटके में ढेर सारे पुश नोटिफिकेशन और न्यूज़लेटर ईमेल चले जाते—और इससे इस सीरीज़ को किसी समझदारी भरे क्रम में पढ़ना भी मुश्किल हो जाता।"''
उसने कहा, '''इसलिए हमने एक बड़ी कंटेंट सीरीज़ के लिए एक आम तरीका अपनाया: हमने उनमें से कुछ (सभी नहीं) लेखों के प्रकाशन में तारीखें पीछे की कर दीं, ताकि जानकारी एक सही क्रम में रहे और एक ही दिन में सभी को स्पैम न चले जाएं।''
एनएसयूआई ने सोमवार को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मांग की थी कि सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े मामले की 'निष्पक्ष जांच हो और पूरा सच देश के सामने लाया जाए।'
उसने कहा था, ''अगर 100 में से 82 सवाल सिर्फ़ एक कोचिंग संस्थान के कंटेंट से आते हैं, तो यह कोई मामूली इत्तेफ़ाक नहीं, बल्कि गंभीर जांच का मामला है। युवा जानना चाहते हैं कि क्या उनकी बरसों की मेहनत के साथ कोई अन्याय हो रहा है।''
भाषा राजकुमार दिलीप
दिलीप
1606 1859 दिल्ली