भारत ने दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की बीएमडी क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया
पवनेश
- 13 Jun 2026, 08:50 PM
- Updated: 08:50 PM
नयी दिल्ली, 13 जून (भाषा) भारत ने अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को बीच में ही रोककर नष्ट करने में सक्षम अपनी बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा (बीएमडी) प्रणाली की क्षमता का इस सप्ताह सफल परीक्षण किया। इसके साथ ही भारत यह क्षमता रखने वाले चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है।
बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली लंबी दूरी की परमाणु मिसाइलों और 'हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण प्रणाली' (अवाक्स) समेत शत्रु विमानों को बीच रास्ते में ही रोककर नष्ट करने में सक्षम है। अमेरिका, रूस और चीन सहित दुनिया के केवल कुछ ही देशों के पास बीएमडी प्रणाली की क्षमता है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, शत्रु मिसाइलों के खिलाफ बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता का प्रदर्शन करने के लिए 10 और 11 जून को लगातार तीन परीक्षण किए गए। ये परीक्षण पृथ्वी के वायुमंडल के भीतर और वायुमंडल की सीमा से बाहर बैलिस्टिक मिसाइलों को मार गिराने की क्षमता परखने के लिए किए गए।
मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने शत्रु के विभिन्न प्रकार के खतरों से निपटने के लिए देश की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने वाली कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का सफल प्रदर्शन किया है।
मंत्रालय ने कहा कि इन उड़ान-परीक्षणों के जरिये बहुस्तरीय बीएमडी क्षमता का सफल प्रदर्शन किया गया। मंत्रालय ने कहा, '''इंटरसेप्टर' (लक्ष्य को बीच रास्ते में रोककर नष्ट करने वाली मिसाइलों) ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा। इन प्रणालियों को उभरते मिसाइल खतरों से निपटने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों के साथ डिजाइन और विकसित किया गया है।''
इसने कहा, ''इन परीक्षणों के साथ देश उन विशिष्ट देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइलों को रोककर नष्ट करने की बीएमडी क्षमता है।''
मंत्रालय ने कहा कि मध्यम दूरी की नौसैन्य पोत-रोधी मिसाइल (एनएएसएम-एमआर) का पहला परीक्षण भी सफलतापूर्वक किया गया।
बीएमडी कार्यक्रम के तहत भारत शत्रु मिसाइलों को वायुमंडल के भीतर और बाहर, दोनों स्तरों पर रोककर नष्ट करने की क्षमता विकसित कर रहा है।
वायुमंडल के भीतर काम करने वाली मिसाइलों को 'एंडो-एटमॉस्फेरिक' मिसाइल कहा जाता है। ये 100 किलोमीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र में संचालित होती हैं। वहीं, 'एक्सो-एटमॉस्फेरिक' मिसाइलें पृथ्वी के वायुमंडल के सबसे ऊपरी क्षेत्र में मिशन पूरा करने में सक्षम होती हैं।
इन परीक्षणों को डीआरडीओ और रक्षा बलों के वरिष्ठ अधिकारियों ने देखा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का सफल प्रदर्शन करने के लिए डीआरडीओ को बधाई दी।
उन्होंने कहा, ''बहुस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया गया। इंटरसेप्टर मिसाइल ने अपने-अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक भेदा। उभरते मिसाइल खतरों से निपटने के लिए इन प्रणालियों को अत्याधुनिक तकनीकों के साथ डिजाइन और विकसित किया गया है।''
सिंह ने कहा कि इन परीक्षणों के साथ भारत उन देशों के ''विशिष्ट समूह'' में शामिल हो गया है, जिनके पास आईसीबीएम (अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल) सहित विभिन्न मिसाइल को रोकने की बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा क्षमता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, ''इन महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों का सफल प्रदर्शन करने के लिए डीआरडीओ को बधाई।''
भाषा आशीष पवनेश
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