हस्ताक्षर में हेरफेर का मामला: अभिषेक के जवाबों से बंगाल सीआईडी संतुष्ट नहीं, 14 जून को फिर बुलाया
दिलीप
- 12 Jun 2026, 04:24 PM
- Updated: 04:24 PM
कोलकाता, 12 जून (भाषा) पश्चिम बंगाल सीआईडी ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी को कथित जाली हस्ताक्षर मामले में पूछताछ के दूसरे दौर के लिए 14 जून को पेश होने का नया समन जारी किया। यह जानकारी एक अधिकारी ने दी।
माना जाता है कि यह कदम इसलिए उठाया गया, क्योंकि जांच अधिकारियों को एक दिन पहले विभाग मुख्यालय में हुई पूछताछ के दौरान तृणमूल महासचिव के जवाब संतोषजनक नहीं लगे।
अधिकारी ने दावा किया कि विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे गए विवादित प्रस्ताव से जुड़े कई सवालों के जवाब में बनर्जी ने कहा ''मुझे नहीं पता'' और कुछ मौकों पर वह कथित तौर पर आपा खो बैठे।
उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ''पूछताछ के दौरान प्रस्ताव, इस पर किए गए हस्ताक्षर और सहायक दस्तावेज़ों से जुड़े कई सवालों का ठोस जवाब नहीं मिल सका। जांच टीम ने कुछ रिकॉर्ड मांगे थे, जो अभी तक पेश नहीं किए गए हैं। इसलिए, उन्हें रविवार को ज़रूरी दस्तावेज़ों के साथ फिर से पेश होने के लिए कहा गया है।''
अधिकारी ने कहा कि जांचकर्ताओं ने इस बारे में स्पष्टीकरण मांगा कि प्रस्ताव पर पार्टी की बैठक में कथित तौर पर अनुपस्थित रहे विधायकों के हस्ताक्षर कैसे आए, दस्तावेज़ पर किसने हस्ताक्षर किए थे और उसकी मूल प्रति कहाँ है।
उन्होंने कहा, ''जांच मुख्यत: दस्तावेजों की प्रामाणिकता स्थापित करने और उन परिस्थितियों का पता लगाने पर केंद्रित है, जिनके तहत इन्हें तैयार और जमा किया गया था। किसी भी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले अभी और सत्यापन की आवश्यकता है।''
बृहस्पतिवार रात सीआईडी मुख्यालय से निकलने के बाद, तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर पहुंचे, जहाँ उन्होंने पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ एक बैठक में भाग लिया।
बाद में, वह संवाददाताओं से बात किए बिना ही आवास से निकल गए।
तृणमूल कांग्रेस के विधायकों ने छह मई को विधायकों ने बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पर बैठक की और नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए शोभनदेव चट्टोपाध्याय के नाम का प्रस्ताव रखा। खबरों के अनुसार, बैठक में मौजूद विधायकों ने हाथ उठाकर अपना समर्थन जताया।
हालांकि, औपचारिक प्रस्ताव तुरंत विधानसभा को नहीं दिया गया। 13 और 14 मई को तृणमूल विधायकों के शपथ लेने के बाद, विधानसभा सचिवालय ने पार्टी से इस पद के लिए इसके उम्मीदवार के नाम का प्रस्ताव मांगा।
इसके बाद 19 मई को फिर से बैठक हुई, जिसके बाद चट्टोपाध्याय के समर्थन में 70 विधायकों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज़ सौंपा गया।
तृणमूल विधायकों द्वारा जमा किए गए अलग-अलग दस्तावेज़ों पर मौजूद हस्ताक्षरों में कथित तौर पर अंतर पाए जाने के बाद सवाल उठाए गए।
आखिरकार इस मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई और सीआईडी जांच शुरू हुई। जांच टीम इस मामले में पहले ही कई विधायकों से पूछताछ कर चुकी है।
भाषा नेत्रपाल दिलीप
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