मुझे नहीं लगता कि मीनाक्षी नटराजन ने कोई जानकारी छुपाई: मप्र विधानसभा के पूर्व प्रधान सचिव
ब्रजेन्द्र रवि कांत
- 11 Jun 2026, 04:29 PM
- Updated: 04:29 PM
भोपाल, 11 जून (भाषा) मध्यप्रदेश विधानसभा के पूर्व प्रधान सचिव भगवान देव ईशरानी ने बृहस्पतिवार को कहा कि राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने ऐसी कोई जानकारी नहीं छुपाई, जिसके आधार पर उनकी उम्मीदवारी निरस्त की जा सके।
उन्होंने कहा कि यह ऐसा मामला है, जिसमें अदालत सामान्यतः हस्तक्षेप नहीं करती, लिहाजा निर्वाचन आयोग को ही आगे आना चाहिए।
ईशरानी ने 'पीटीआई-वीडियो' से बातचीत में कहा, "चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद सामान्यतः अदालत हस्तक्षेप नहीं करती है। कई मामलों में ऐसा हो चुका है। आज भी उच्चतम न्यायालय में यही हुआ।"
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय शुक्रवार को अब इस मामले में सुनवाई करेगा लेकिन नियमानुसार विरोध में कोई उम्मीदवार नहीं होता है तो नामांकन दाखिल करने वाले शेष उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत हो जाती है।
उन्होंने कहा, "तो आज तीनों उम्मीदवार (भाजपा) जीत जाएंगे।"
ईशरानी ने कहा कि उम्मीदवारों को विजेता घोषित किए जाने से पहले निर्वाचन आयोग कोई फैसला लेता है तभी कुछ हो सकता है।
उन्होंने कहा कि बुधवार को कांग्रेस के नेताओं ने निर्वाचन आयोग का दरवाजा खटखटाया था लेकिन अभी तक उनकी ओर से कोई फैसला नहीं लिया गया है।
उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि निर्वाचन आयोग को हस्तक्षेप करना चाहिए।"
मीनाक्षी नटराजन पर तथ्य छुपाने के आरोपों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मुझे नहीं लगता कि कोई जानकारी छुपाई गई है।"
उन्होंने कहा कि जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 33 ए कहती है कि आप वो जानकारी दीजिए, जिसमें दो साल की सजा का प्रावधान है और आरोप पत्र दायर हो गया हो तथा सजा हो गई हो लेकिन इस मामले में तो ऐसा है ही नहीं।
विधानसभा के पूर्व प्रधान सचिव ने कहा कि अभी कोई आपराधिक मामला बना ही नहीं है और ना ही प्राथमिकी दर्ज हुई है और यहां तक कि आरोपपत्र भी दायर नहीं हुआ है। इसलिए जानकारी देने की कोई जरूरत नहीं है।
ईशरानी ने कहा कि ऐसा ही मिलता जुलता प्रकरण झारखंड में आया लेकिन उनसे दूसरा शपथपत्र लिया गया और समय भी दिया गया जबकि नटराजन के मामले में ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा, "आज देश में जो हो रहा है, वह तो आप देख ही रहे हो।"
ईशरानी ने कहा कि उन्होंने 40 साल की सरकारी सेवा के दौरान बहुत चुनाव कराए लेकिन एक भी नामांकन निरस्त नहीं किया।
उन्होंने कहा, "हमारा नोट बुक भी कहता है कि मौका दो। छोटी-छोटी गलतियों को नजरअंदाज करो लेकिन इनको (नटराजन) मौका नहीं दिया गया।"
मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया।
राज्यसभा चुनाव के निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा ने जारी आदेश में कहा कि उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद यह पाया गया कि नटराजन ने नामांकन के साथ जमा किए गए फार्म 26 में 'उक्त न्यायालय परिवाद का उल्लेख नहीं करके अपना शपथ पत्र अपूर्ण प्रस्तुत किया है'।
मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है।
उन्होंने कहा कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया।
भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया।
इस बीच, मध्यप्रदेश में राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के तीनों उम्मीदवारों तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को निर्वाचन अधिकारी ने बृहस्पतिवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया।
भाषा
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