मेसी से जुड़े कार्यक्रम में अव्यवस्था का मामला : बिस्वास को दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा मिली
सुभाष
- 10 Jun 2026, 10:34 PM
- Updated: 10:34 PM
कोलकाता, 10 जून (भाषा) कलकत्ता उच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के पूर्व खेल मंत्री अरूप बिस्वास को पिछले साल दिसंबर में साल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित लियोनेल मेसी से जुड़े कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था के मामले में किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई से बुधवार को अंतरिम राहत प्रदान कर दी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि तीन अन्य महानगरों -हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली-में जहां मेसी से जुड़े ऐसे ही कार्यक्रम निर्बाध रूप से आयोजित किए गए थे, वहीं कोलकाता में ऐसा नहीं किया जा सका, जिससे शहर की 'फुटबॉल-प्रेमी' छवि पर धब्बा लगा।
न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य ने बिस्वास को निर्देश दिया कि वह अदालत की अनुमति के बिना शहर से बाहर नहीं जाएंगे। बिस्वास ने इससे पहले पूछताछ के लिए पेश होने संबंधी बिधाननगर पुलिस के दो नोटिस पर अमल नहीं किया था।
अदालत ने पूर्व मंत्री को निर्देश दिया कि वह सात दिन के भीतर अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करें।
उच्च न्यायालय ने बिस्वास को जांच एजेंसी की ओर से नोटिस जारी किए जाने की सूरत में उसके समक्ष पेश होने का भी निर्देश दिया। उसने स्पष्ट किया कि नोटिस लगभग 48 घंटे पहले जारी किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा कि बिस्वास के खिलाफ 17 अगस्त या अगले आदेश तक, इनमें से जो भी पहले हो, कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने बिधाननगर पुलिस आयुक्त को यह पता लगाने के लिए स्वतंत्र जांच करने का निर्देश दिया कि 13 दिसंबर 2025 को कार्यक्रम ठीक से क्यों आयोजित नहीं किया जा सका।
उन्होंने पुलिस आयुक्त से चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट सौंपने को कहा।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा कि इस घटना से सभी को शर्मिंदगी महसूस हुई, क्योंकि मेसी को सुरक्षा कारणों से तय समय से काफी पहले साल्ट लेक स्टेडियम छोड़कर जाना पड़ा था।
अदालत ने कहा कि उस दिन मैदान पर जरूरत से कहीं ज्यादा लोग पहुंच गए थे। उसने कहा कि घटना के समय बिस्वास राज्य के खेल मंत्री थे।
अदालत ने कहा, "मेसी के हजारों प्रशंसकों ने अपने पसंदीदा फुटबॉल खिलाड़ी की एक झलक पाने के लिए टिकट खरीदे थे, लेकिन उनके तय समय से पहले चले जाने से इन लोगों का सपना चकनाचूर हो गया।"
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, "हैदराबाद, मुंबई और दिल्ली में ऐसे ही कार्यक्रम बिना किसी परेशानी के आयोजित किए गए थे। कोलकाता में कार्यक्रम के आयोजन में नाकामी ने कोलकाता की छवि पर दाग लगा दिया।"
उन्होंने कहा कि अदालत इस तरह की गड़बड़ी के प्रति आंखें नहीं मूंद सकती और मामले की अगली सुनवाई के लिए चार अगस्त की तारीख तय कर दी।
शिकायतकर्ता शताद्रु दत्ता ने बिस्वास पर धन उगाही, आपराधिक धमकी देने, अपने सरकारी एवं राजनीतिक रसूख का दुरुपयोग करने और मेसी से जुड़े कार्यक्रम के कॉम्प्लिमेंट्री टिकट को आर्थिक लाभ के लिए गैर-कानूनी तरीके से दूसरी जगह भेजने और बेचने का आरोप लगाया है।
दत्ता के वकील ने अदालत को बताया कि सॉल्ट लेक स्टेडियम में कुल 70,000 दर्शकों के बैठने की व्यवस्था है और बिस्वास ने कार्यक्रम के आयोजक से 22,000 कॉम्प्लिमेंट्री टिकट लिए थे।
राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता सुरोजित नाथ मित्रा ने अदालत को बताया कि बिस्वास को जांच अधिकारी के सामने पेश होने के लिए दो नोटिस भेजे गए थे, लेकिन उन्होंने उनका पालन नहीं किया।
दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा के लिए बिस्वास की याचिका का विरोध करते हुए मित्रा ने कहा कि पूर्व खेल मंत्री संरक्षण के हकदार नहीं थे, क्योंकि उन्होंने नोटिस का पालन नहीं किया था।
बिस्वास के वकील किशोर दत्ता ने दावा किया कि पुलिस ने बिना किसी शुरुआती जांच के ही आपराधिक कार्यवाही शुरू कर दी।
अदालत ने कहा कि बिस्वास पर लगे धन उगाही और धोखाधड़ी के आरोप संज्ञेय और गैर-जमानती हैं तथा इनके लिए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत सात साल तक की जेल की सजा हो सकती है।
न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने कहा, "इसलिए अदालत का मानना है कि जांच के दौरान अगर याचिकाकर्ता जांच एजेंसी का सहयोग करता है, तो वह संरक्षण का हकदार है।"
शिकायतकर्ता शतद्रु दत्ता ने कहा कि वह एकल पीठ के आदेश को उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष चुनौती देंगे। उन्होंने एक बांग्ला समाचार चैनल से बातचीत में कहा कि जरूरत पड़ने पर वह उच्चतम न्यायालय तक का रुख करेंगे।
भाषा पारुल सुभाष प्रशांत
सुभाष
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