जोजिला सुरंग के दोनों छोर के नाम ब्रिगेडियर उस्मान व सम्राट मुक्तापीड़ के नाम पर रखें : राउत
मनीषा
- 10 Jun 2026, 12:02 PM
- Updated: 12:02 PM
( तस्वीरों सहित )
मुंबई, 10 जून (भाषा) शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने मांग की है कि कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाली जोजिला सुरंग के दो पोर्टल का नाम 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान और 8वीं सदी के कश्मीर के शासक सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ के नाम पर रखा जाए।
जोजिला सुरंग कश्मीर घाटी को लद्दाख से जोड़ने वाली एशिया की सबसे लंबी सुरंग है।
करीब 6,800 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह सुरंग देश की सबसे महत्वाकांक्षी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक है जिसमें मंगलवार को एक विस्फोट के बाद अंतिम 'ब्रेकथ्रू' (आर-पार रास्ता) प्राप्त कर लिया गया। यह रिकॉर्ड ऊंचाई पर स्थित दुनिया की सबसे लंबी 'सिंगल-ट्यूब', दो मार्ग वाली सुरंग है जो अब पूरा होने के करीब है।
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रिमोट का बटन दबाकर लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के मिनीमर्ग स्थित सुरंग के ईस्ट पोर्टल के पास 'ब्रेकथ्रू' स्थल पर विस्फोट किया।
सुरंग के निर्माण कार्य में 'ब्रेकथ्रू' उस स्थिति को कहते हैं जब सुरंग की खुदाई दोनों दिशाओं से पूरी हो जाती है और सुरंग दोनों ओर आर-पार के लिए खुल जाती है।
अधिकारियों के अनुसार इस सुरंग के फरवरी 2028 में जनता के लिए खोले जाने की संभावना है।
राउत ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में कहा कि ज़ोजिला सुरंग आज़ाद भारत की सबसे शानदार अवसंरचना परियोजनाओं में से एक है।
उन्होंने कहा कि इसके पूरा होने पर, यह न सिर्फ़ कश्मीर और लद्दाख के बीच हर मौसम में आसान संपर्क प्रदान करेगी, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मज़बूत करेगी, आर्थिक मौके बढ़ाएगी, पर्यटन को बढ़ावा देगी और हमारे देश के कुछ सबसे रणनीतिक रूप से अहम इलाकों के बीच एकीकरण को और मज़बूत करेगी।
राउत ने कहा, ''मेरा प्रस्ताव है कि जोजिला सुरंग के एक छोर को ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान का नाम दिया जाए और दूसरे छोर को सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड के नाम पर पुकारा जाए। इस तरह दो खास लोगों को याद रखा जाए जो भारत की राष्ट्रीय विरासत के अलग-अलग लेकिन एक-दूसरे के पूरक पहलुओं के प्रतीक हैं।''
उन्होंने बुधवार को 'एक्स' पर साझा किए अपने पत्र में लिखा कि जोजिला सुरंग के सोनमर्ग/कश्मीर वाले छोर का नाम ब्रिगेडियर उस्मान के नाम पर रखा जा सकता है, वहीं द्रास/लद्दाख वाले छोर का नाम सम्राट मुक्तिपीड़ के नाम पर रखा जाता है।
उन्होंने कहा, ''इस तरह का कदम देश की रक्षा करने वालों की बहादुरी और सदियों से कश्मीर की पहचान बनाने वाली समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, दोनों के प्रति सम्मान होगा। यह राष्ट्रीय एकता, विविधता में एकता और भारत की बहुआयामी विरासत के सम्मान का एक शक्तिशाली संदेश भी देगा।''
राउत ने लिखा कि ब्रिगेडियर उस्मान, जिन्हें नौशेरा का शेर कहा जाता है, ने 1947-48 के भारत-पाक युद्ध में असाधारण बहादुरी दिखाई थी। उन्होंने जम्मू कश्मीर में नौशेरा और झंगर को सफलतापूर्वक बचाया था, बंटवारे के दौरान पाकिस्तान के बजाय भारत को चुना और तीन जुलाई 1948 को मातृभूमि के लिए अपनी जान दे दी।
उन्होंने कहा कि उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया और वह युद्ध में शहीद होने वाले सबसे उच्च रैंक के सैन्य अधिकारियों में से एक हैं।
राज्यसभा सदस्य ने कहा, ''वह देशभक्ति और धर्मनिरपेक्षता के उज्ज्वल प्रतीक हैं।''
राउत के मुताबिक सम्राट मुक्तापीड़ कश्मीर के करकोटा वंश के 8वीं सदी के शासक थे। राउत ने कहा कि उन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार मध्य एशिया, अफगानिस्तान और तिब्बत तक किया, मशहूर मार्तंड सूर्य मंदिर समेत भव्य मंदिर बनवाए और कश्मीर को प्राचीन भारतीय इतिहास में एक शक्तिशाली सांस्कृतिक एवं सैन्य केंद्र के तौर पर स्थापित किया।
भाषा वैभव मनीषा
मनीषा
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