अदालत ने महिला कांग्रेस प्रमुख अलका लांबा को अच्छे आचरण की शर्त पर रिहा किया
सुरेश
- 06 Jun 2026, 10:20 PM
- Updated: 10:20 PM
नयी दिल्ली, छह जून (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को कांग्रेस नेता अलका लांबा को एक साल के लिए अच्छे आचरण की शर्त (प्रोबेशन) पर रिहा कर दिया। उन्हें 2024 में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने के मामले में दोषी ठहराया गया था।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने कहा कि महिला दोषी ने पहली बार अपराध किया था और उन्होंने उसके "चरित्र और पूर्ववृत्त" तथा अपराध किए जाने की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उसे बीएनएसएस की धारा 401 के तहत लाभ प्रदान किया।
अदालत अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष लांबा के खिलाफ सजा पर दलीलें सुन रही थी, जिन्हें पिछले महीने लोक सेवकों को कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालने, अधिकारियों पर हमला करने, जारी आदेश की अवहेलना करने और सार्वजनिक मार्ग में बाधा उत्पन्न करने के अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था।
अदालत ने कहा, "इस मामले में दोषी एक महिला है, जिसने पहली बार इस तरह का अपराध किया है, इसलिए बीएनएसएस की धारा 401(1) (अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहाई का आदेश) पूरी तरह से लागू होती है।"
उसने कहा, "राज्य ने दोषी के किसी भी पूर्व दोषसिद्धि को रिकॉर्ड पर नहीं रखा है, और इस बात पर कोई मतभेद नहीं है कि दोषी को बीएनएसएस की धारा 401 के लाभ क्यों न दिया जाना चाहिए।"
इसमें कहा गया है कि परोपकारी प्रावधान के लाभों से इनकार करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।
अदालत ने कहा, " 'सजा के सुधारात्मक सिद्धांत' का उद्देश्य अपराधी को समाज में एक कानून का पालन करने वाले सदस्य के रूप में पुनर्स्थापित करना है, जो समाज के मानदंडों के अनुरूप व्यवहार करेगा।"
उसने कहा, "तदनुसार, यह न्यायालय दोषी अलका लांबा को अच्छे आचरण की परिवीक्षा पर रिहा कर रहा है, बशर्ते वह एक लाख रुपये के बॉण्ड और इतनी ही राशि के एक जमानती के साथ शांति बनाए रखने और बॉण्ड पर हस्ताक्षर करने की तारीख से एक वर्ष तक अच्छा व्यवहार करने का वचन दे।"
अदालत ने कहा कि जमानत पर हस्ताक्षर करने के बाद एक वर्ष की अवधि के दौरान, लांबा को "शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखना" होगा और इसी तरह के अपराधों में शामिल नहीं होना होगा, अन्यथा उसे उन अपराधों के लिए उचित सजा सुनाने के लिए पेश किया जाएगा जिनके लिए उसे दोषी ठहराया गया है।
भाषा प्रशांत सुरेश
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