तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने कोलकाता के महापौर पद से इस्तीफा दिया
माधव
- 05 Jun 2026, 08:27 PM
- Updated: 08:27 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, पांच जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता फिरहाद हकीम ने शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के महापौर पद से इस्तीफा दे दिया।
महापौर के इस्तीफे के साथ, पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा कोई अन्य व्यवस्था किये जाने तक नगर निकाय का प्रशासन नौकरशाही के हाथों में जाने की संभावना है।
तृणमूल कांग्रेस के सबसे जानेमाने अल्पसंख्यक चेहरों में से एक और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के करीबी सहयोगियों में से एक हकीम ने केएमसी की अध्यक्ष माला रॉय के कार्यालय में अपना इस्तीफा सौंप दिया।
पद छोड़ने से पहले संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए हकीम ने कहा कि वह अब अपने दायित्वों का निर्वहन उस तरीके से नहीं कर पा रहे थे जैसा वह उचित समझते थे।
उन्होंने कहा, ''मेरे कार्यकाल के दौरान कोलकाता को चक्रवात 'अम्फान' और कोविड-19 महामारी समेत कई मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। केएमसी अधिकारियों और शहर के नागरिकों के सहयोग से हमने इन चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया।''
उन्होंने कहा, ''मैंने दृढ़ विश्वास के साथ काम किया। अब यह संभव नहीं है। मैं इस पद पर बने रहकर इसकी गरिमा का अनादर नहीं कर सकता। मैं यहां बिना सेना के एक जनरल की तरह नहीं रहना चाहता।''
चार बार के विधायक ने कहा कि उन्होंने यह फैसला लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी से अनुमति ली थी। उन्होंने कहा, ''मैंने अपनी नेता से कहा कि मैं गर्व से अपना सिर ऊंचा रखकर पद छोड़ना चाहता हूं। उन्होंने (ममता बनर्जी) इस संबंध में अपनी सहमति जताई।''
हकीम ने यह भी स्वीकार किया कि कई परियोजनाएं अधूरी रह गईं। उन्होंने कहा, ''अभी बहुत काम अधूरा है। मेरे बाद जो भी लोग इस निगम का संचालन करेंगे, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। हो सकता है वे मुझसे भी बेहतर काम करें।''
यह घटनाक्रम बिधाननगर की महापौर कृष्णा चक्रवर्ती और चंदननगर के महापौर राम चक्रवर्ती के इस्तीफे के ठीक एक दिन बाद सामने आया है।
सोवन चटर्जी के इस्तीफे के बाद नवंबर 2018 में हकीम महापौर बने और बाद में नगर प्रशासन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक के रूप में उभरे। वह स्वतंत्रता के बाद कोलकाता के पहले मुस्लिम महापौर बने थे।
हकीम ने कहा, ''जब मैं पहली बार महापौर बना, तो मुझे शहर के लिए बेहतर काम करने का पूरा भरोसा था, लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस और देशबंधु चित्तरंजन दास जैसे उन दिग्गजों का योग्य उत्तराधिकारी बन पाऊंगा, जो कभी इस पद पर आसीन थे।''
उनके इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता सजल घोष ने कहा कि हकीम महानगर के महापौर के रूप में ''विफल'' रहे।
उन्होंने कहा, ''उन्होंने शहर के लिए क्या किया है? उनका इस्तीफा केवल इस बात को दर्शाता है कि पूरी व्यवस्था कितनी त्रुटिपूर्ण थी। उन्होंने इसलिए इस्तीफा दिया क्योंकि राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है।''
केएमसी 2010 से तृणमूल कांग्रेस के नियंत्रण में है, जो ममता बनर्जी द्वारा पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों के वामपंथी शासन को समाप्त करने से एक वर्ष पहले का समय है।
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव
0506 2027 कोलकाता