शाह ने एनईसी के पूर्ण अधिवेशन की अध्यक्षता की, नेताओं ने 'उत्तर-पूर्वी विजन प्लान 2047' पर चर्चा की
सुभाष
- 04 Jun 2026, 09:19 PM
- Updated: 09:19 PM
(तस्वीरों के साथ)
शिलांग, चार जून (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को उत्तर पूर्वी परिषद की 73वीं पूर्ण बैठक की अध्यक्षता की, जहां आठ पूर्वोत्तर राज्यों के नेताओं ने मजबूत एवं अधिक समृद्ध क्षेत्र की दिशा में काम करने का संकल्प लिया और 'उत्तर पूर्वी विजन प्लान 2047' पर विचार-विमर्श किया।
उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) की पूर्ण बैठक में पूर्वोत्तर क्षेत्र के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
एनईसी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''पूर्ण बैठक से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम सिंधिया, राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई।''
इसने कहा कि सभी नेताओं ने क्षेत्र की प्रगति, कनेक्टिविटी और समृद्धि के प्रति अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
बैठक के बारे में शाह ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''मैंने उत्तर पूर्वी परिषद की 73वीं पूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। मोदी सरकार ने पूर्वोत्तर में हिंसा के युग का अंत किया और इस क्षेत्र को विवादों के गढ़ से अवसरों के गढ़ में बदल दिया।''
उन्होंने कहा कि वर्तमान में, एनईसी क्षेत्र के विकास के लिए रणनीतिक योजना बनाने वाली संस्था के रूप में कार्य कर रही है, साथ ही लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने और संस्कृति को बढ़ावा देने का काम भी कर रही है।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री सिंधिया ने कहा कि सभी नेता एक ''मजबूत और अधिक समृद्ध पूर्वोत्तर'' के निर्माण के अपने संकल्प में एकजुट हैं।
उन्होंने कहा, ''हमारी अष्टलक्ष्मी प्रगति एवं विकास के एक नए युग की दहलीज पर खड़ी है। माननीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह जी की अध्यक्षता में उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) की 73वीं पूर्ण बैठक में, हमने 2047 तक एक विकसित पूर्वोत्तर के सपने को साकार करने के अपने सामूहिक संकल्प की पुष्टि की।''
सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर भारत विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभरा है।
उन्होंने कहा, ''अब हम मिलकर दूरदृष्टि से रणनीतिक क्रियान्वयन की ओर बढ़ रहे हैं, एक साझा रोडमैप को आगे बढ़ा रहे हैं जो दक्षिण-पूर्वी एशिया के लिए भारत के प्रवेश द्वार और विकसित भारत के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में इस क्षेत्र की स्थिति को मजबूत करेगा।''
बैठक से इतर पत्रकारों के साथ बातचीत में सिंधिया ने कहा कि शाह ने अगले 12 महीनों में पूर्वोत्तर के विकास के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।
उन्होंने कहा, ''अब हम उनके मार्गदर्शन के अनुसार कार्यक्रमों और विभिन्न पहल को लागू करना शुरू करेंगे।''
आधिकारिक बयान के अनुसार, पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के हितधारकों ने 'उत्तर-पूर्वी विजन प्लान 2047' और प्रमुख क्षेत्रीय विकास प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय ने 'एक्स' पर कहा, ''पूर्ण बैठक में क्षेत्रीय विकास के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए गठित मुख्यमंत्री उच्चस्तरीय कार्यबलों द्वारा की गई प्रगति पर चर्चा और विचार-विमर्श किया गया।''
बयान में कहा गया कि बैठक में उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की महत्वपूर्ण पहलों की भी समीक्षा की गई, जिसमें प्रमुख योजनाओं और कार्यक्रमों पर अद्यतन जानकारी, पूर्वोत्तर निवेश शिखर सम्मेलन और 'बैंकर्स कॉन्क्लेव' के परिणाम शामिल हैं।
मंत्रालय ने कहा कि नेताओं ने युवा-केंद्रित पहलों, पर्यटन और 'लॉजिस्टिक्स' संबंधी प्रयासों और क्षेत्र की विशिष्ट विक्रय प्रस्ताव (यूएसपी) परियोजनाओं का विश्लेषण किया।
इस दौरान पर्यटन, कृषि और बागवानी, निवेश प्रोत्साहन, दूध, अंडे, मछली और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भरता, खेल प्रोत्साहन, आर्थिक गलियारे का विकास, बुनियादी ढांचा एवं कनेक्टिविटी, तथा हथकरघा और हस्तशिल्प पर प्रस्तुतियाँ दी गईं।
इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, ''इस विचार-विमर्श से राज्यों और हितधारकों के बीच साझा विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए समन्वित कार्रवाई को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।''
'उत्तर पूर्वी विजन प्लान 2047' का उद्देश्य भारत की स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक इस क्षेत्र को आर्थिक विकास, संपर्क, नवाचार, स्थिरता और सांस्कृतिक समृद्धि के एक जीवंत केंद्र में बदलने के लिए एक दीर्घकालिक रोडमैप प्रदान करना है।
इससे पहले दिन में, मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने बैठक के लिए शाह का शिलांग में स्वागत किया।
उन्होंने कहा, ''उत्तर पूर्वी परिषद की 73वीं पूर्ण बैठक के लिए माननीय केंद्रीय गृह मंत्री और उत्तर पूर्वी परिषद के अध्यक्ष श्री अमित शाह जी का शिलांग में स्वागत करते हुए मुझे खुशी हो रही है।''
मुख्य बैठक से पहले, बुधवार को पूर्ण बैठक से पहले एक बैठक आयोजित की गई, जिसमें भारत सरकार और पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी एक साथ जुटे।
इस बैठक में मुख्य सचिवों, राज्य योजना सचिवों, उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, एनईसी के अधिकारियों और अन्य प्रमुख हितधारकों ने भाग लिया।
उत्तर पूर्वी परिषद अधिनियम, 1971 के तहत स्थापित उत्तर पूर्वी परिषद, पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए सर्वोच्च क्षेत्रीय नियोजन निकाय के रूप में कार्य करती है और इस क्षेत्र में समन्वित विकास को बढ़ावा देने एवं सहकारी संघवाद को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यह अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा से मिलकर बने क्षेत्र के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए नोडल एजेंसी है।
भाषा नेत्रपाल सुभाष
सुभाष
0406 2119 शिलांग