तृणमूल ने 'पार्टी विरोधी' गतिविधियों को लेकर दो विधायकों को निष्कासित किया
सुरेश
- 01 Jun 2026, 07:42 PM
- Updated: 07:42 PM
कोलकाता, एक जून (भाषा) तृणमूल कांग्रेस ने कथित पार्टी विरोधी गतिविधियों को लेकर अपने दो विधायकों, संदीपन साहा और रीताब्रत बनर्जी, को सोमवार को निष्कासित कर दिया।
इस कार्रवाई से विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के एक महीने से भी कम समय के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस के विधायी इकाई के भीतर स्पष्ट दरारें सामने आ गई हैं।
इस निष्कासन आदेश से कुछ ही मिनट पहले मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा था कि दो विधायकों ने राज्य विधानसभा में 'फर्जी हस्ताक्षर' के संबंध में शिकायतें दर्ज कराई है। यह मामला तृणमूल कांग्रेस द्वारा शोभनदेब चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में समर्थन दिए जाने के पत्र से जुड़ा है।
दोनों विधायकों को भेजे गए पत्र में कहा गया है, ''अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के संज्ञान में सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से यह बात लाई गई है कि तृणमूल द्वारा नामित उम्मीदवार के रूप में निर्वाचित होने के बावजूद आप पार्टी के अधिकृत नेतृत्व द्वारा बुलाई गई बैठकों में शामिल होने में बार-बार विफल रहे हैं और आपने खुद को पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल किया है।''
पार्टी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है, ''यह भी पाया गया है कि आप ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और आपने ऐसे बयान दिए हैं, जो तृणमूल कांग्रेस के हितों के प्रतिकूल हैं।''
पत्र में कहा गया है कि मामले पर समुचित विचार-विमर्श के बाद ''तृणमूल कांग्रेस के सक्षम प्राधिकारी ने आपको पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तत्काल प्रभाव से निष्कासित करने का फैसला किया है।''
नोटिस में कहा गया है, "परिणामस्वरूप, इस नोटिस के जारी होने की तिथि से आप पार्टी से संबंधित किसी भी पद, जिम्मेदारी या विशेषाधिकार से मुक्त हो जाएंगे।"
निष्कासन नोटिस से कुछ मिनट पहले, शुभेंदु ने तृणमूल खेमे पर जमकर हमला बोला और आरोप लगाया कि "राज्य की जनता द्वारा नकारे जाने के बावजूद पार्टी ने अपने धोखाधड़ी वाले तौर-तरीके अब भी नहीं छोड़े हैं।''
शुभेंदु ने कहा कि तृणमूल के दो विधायकों -हावड़ा के उलुबेरिया पूर्व सीट जीतने वाले रीताब्रत बनर्जी और मध्य कोलकाता के एंटाली से विधायक संदीपन साहा- द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों के आधार पर ही विधानसभा सचिवालय ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष का नेता घोषित करने के लिए तृणमूल विधायक दल के जाली हस्ताक्षर का मामला हरे स्ट्रीट पुलिस थाने में दर्ज कराया था।
मुख्यमंत्री ने कहा, ''यह जांच भाजपा द्वारा शुरू नहीं की गई थी। यह तृणमूल कांग्रेस के दो विधायकों द्वारा 27 मई को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की कार्रवाई थी। विधायकों ने आरोप लगाया था कि छह मई को हुई उनकी पार्टी की बैठक में विपक्ष के नेता के चयन के संबंध में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था। उन्होंने शिकायत की थी कि 70 विधायकों द्वारा हस्ताक्षरित उनकी पार्टी का समर्थन पत्र फर्जी और मनगढंत है, जिसमें से 14 हस्ताक्षर बड़े अक्षरों में किए गए हैं।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी स्वयं की स्वीकृति और गृह सचिव के निर्देश पर जांच राज्य सीआईडी को सौंप दी गई थी, जिसके बाद एजेंसी ने लिखावट विशेषज्ञों और वीडियोग्राफर की उपस्थिति में 13 तृणमूल विधायकों से पूछताछ की।
शुभेंदु ने कहा, "कम से कम तीन तृणमून विधायकों –बहरुल इस्लाम, अरूप रॉय और सुभाषिस दास– ने जांचकर्ताओं को बताया है कि हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। यह भी पता चला है कि इस्लाम उक्त तृणमूल बैठक स्थल पर मौजूद ही नहीं थे।"
हालांकि, तृणमूल प्रवक्ता कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व को दरकिनार करके विधानसभा अध्यक्ष से संपर्क करना पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम पर मिले जनादेश के साथ "विश्वासघात" है।
पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में दो विधायकों को निष्कासित करने के पार्टी के फैसले का बचाव करते हुए, घोष ने अध्यक्ष से शिकायत करने वाले विधायकों के नाम सार्वजनिक करने के लिए शुभेंदु को "धन्यवाद" दिया और कहा कि इससे पार्टी के निष्कासन के फैसले का औचित्य सिद्ध हुआ है।
घोष ने कहा कि कथित "फर्जी हस्ताक्षर" विवाद को लेकर शिकायत करने वाले विधायकों को अध्यक्ष को पत्र लिखने के बजाय पहले पार्टी नेतृत्व के संज्ञान में मामला लाना चाहिए था। उन्होंने कहा, ''अगर किसी को भी कोई गलती महसूस हुई, तो उन्हें पहले नेता को सूचित करना चाहिए था। हस्ताक्षर लेने के दौरान नेता (ममता बनर्जी) मौजूद नहीं थीं।"
उन्होंने कहा, "हम स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में नहीं जीते। हम तृणमूल के चुनाव चिह्न पर विधानसभा में आए, ममता बनर्जी की तस्वीर का इस्तेमाल किया और उन्हीं लोगों के वोट प्राप्त किए जिन्होंने उनका (ममता का) समर्थन किया। अगर पार्टी इतनी खराब है, तो उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव क्यों लड़ा और ममता बनर्जी के नाम पर वोट क्यों मांगे?"
घोष ने कहा, "कुछ लोग हमेशा सत्ता के केंद्र के करीब रहना चाहते हैं। इसीलिए वे अपनी स्थिति और निष्ठा बदलते रहते हैं। मुझे उन लोगों के वोट मिले जो ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। मैं आज उन्हें कैसे धोखा दे सकता हूं?"
चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में समर्थन देने वाले अपने हस्ताक्षर पर उठे सवालों का स्पष्टीकरण देते हुए घोष ने कहा कि इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है, क्योंकि उन्होंने निर्धारित स्थान पर अपना नाम बड़े अक्षरों में लिखा था और जहां आवश्यक था वहां अलग से हस्ताक्षर किए थे।
उन्होंने कहा, "मैंने अपना नाम वहां लिखा जहां फॉर्म में नाम लिखने को कहा गया था और हस्ताक्षर वहां किया जहां हस्ताक्षर करने को कहा गया था। मैंने यही बात सीआईडी के सामने भी कही है।"
तृणमूल विधायकों से "लालचों" से प्रभावित नहीं होने की अपील करते हुए घोष ने पार्टी विधायकों से आग्रह किया कि वे संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में शामिल होने के बजाय नेतृत्व के सामने अपनी चिंताएं उठाएं।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश
0106 1942 कोलकाता