राज्यों में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर गंतव्य प्रबंधन संगठन बनाए जाएंगे : शेखावत
सुरेश
- 31 May 2026, 05:12 PM
- Updated: 05:12 PM
नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) केंद्र सरकार ने विभिन्न शहरों में पर्यटन स्थलों के आसपास समग्र वातावरण सुनिश्चित करने के लिए देशभर में गंतव्य प्रबंधन प्राधिकरणों की स्थापना की परिकल्पना की है। केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यह जानकारी दी।
शेखावत ने बुधवार को 'पीटीआई वीडियो' के साथ साक्षात्कार में बताया कि शुरुआत में देशभर में 100 गंतव्य प्रबंधन प्राधिकरण स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इन प्राधिकरणों का कामकाज राज्यस्तरीय अधिकारी संभालेंगे।
शेखावत ने कहा कि इस कदम का मकसद न केवल किसी गंतव्य से जुड़े सभी हितधारकों के मन में विरासत और अन्य पर्यटन स्थलों के प्रति स्वामित्व की भावना पैदा करना है, बल्कि स्थानीय समुदाय के बीच 'जन आंदोलन' और 'जन भागीदारी' की सोच को भी बढ़ावा देना है।
उन्होंने कहा कि भारत में केंद्र की ओर से संरक्षित स्मारकों (वर्तमान में देशभर में 3,686) से इतर ऐतिहासिक सांस्कृतिक स्थल अपनी अपार पर्यटन क्षमता के बावजूद अतिक्रमण, भीड़भाड़ और/या आसपास के क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं की कमी के कारण अक्सर बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करने में नाकाम रहते हैं।
शेखावत ने कहा कि केंद्र की ओर से संरक्षित स्मारकों के रखरखाव का जिम्मा भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) संभालता है। उन्होंने बताया कि ऐसे स्मारकों के चारों ओर 100 मीटर का निषिद्ध क्षेत्र, जबकि निषिद्ध सीमा से आगे 200 मीटर का विनियमित क्षेत्र होता है।
शेखावत के मुताबिक, दक्षिण भारत में स्थित प्रतिष्ठित हम्पी के स्मारकों से लेकर उत्तर भारत में मुगल काल की संगमरमर की अद्भुत कृति ताजमहल तक, एएसआई स्थलों की पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हालांकि, राज्य की ओर से संरक्षित स्मारकों का रखरखाव मुख्य रूप से राज्यों की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि चूंकि ऐसे स्थलों के आसपास के क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कोई कानूनी विनियमन नहीं है, इसलिए मानव आवासों और शहरी बस्तियों जैसे अतिक्रमण के मामले सामने आते हैं।
शेखावत ने कहा कि पश्चिमी देशों में भी ऐसे मुद्दे सामने आते हैं, लेकिन वहां के नागरिकों में सामाजिक चेतना की भावना होती है, उनमें सामाजिक स्तर पर यह जागरूकता होती है कि "यह स्मारक हमारे शहर के लिए कमाई का एक जरिया, एक आर्थिक शक्ति है।"
उन्होंने कहा, "इसलिए यह सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है कि इसके (गंतव्य) आसपास का वातावरण बेहतर हो। पूरा पारिस्थितिकी तंत्र इसके लिए काम करता है।"
शेखावत ने कहा कि भारत को एक समाज के रूप में भी इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।
उन्होंने कहा, "इस तरह की जागरूकता पूरे देश में पैदा हो रही है, लेकिन अब पर्यटन स्थल का रखरखाव करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। पर्यटन स्थल का प्रबंधन करना उस स्थल की जिम्मेदारी है। इसीलिए प्रधानमंत्री ने हमें एक नया दृष्टिकोण, एक नया मार्ग दिखाया है, जिसमें पर्यटन स्थल प्रबंधन प्राधिकरणों की स्थापना का सुझाव दिया गया है, जो पर्यटन स्थल से जुड़े पूरे पारिस्थितिकी तंत्र के बीच तालमेल बैठाने और सहयोग सुनिश्चित करने में मददगार होंगे।"
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस तरह के गंतव्य प्रबंधन का सबसे अच्छा उदाहरण शायद एकता नगर से जुड़ा प्राधिकरण है। एकता नगर, गुजरात में केवडिया के पास स्थित वह जगह है, जहां 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का निर्माण किया गया है।
शेखावत ने कहा कि एकता नगर का वातावरण मानव आबादी वाले अन्य स्थानों से अलग है, लेकिन उस अनुभव से सीखते हुए ''हमने राज्यों से अपने प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए ऐसे डीएमओ (गंतव्य प्रबंधन संगठन) बनाने का आग्रह किया है''।
उन्होंने कहा, ''दो हफ्ते पहले, हमने राज्यों के सचिवों के साथ एक बैठक की थी, जिसमें विस्तृत प्रस्तुतियां दी गईं। इसकी आवश्यकता क्यों है, इसे कैसे स्थापित किया जा सकता है, इसकी रूपरेखा क्या होगी, कार्यान्वयन रणनीति क्या होगी, उन्हें किस तरह की शक्तियां प्राप्त होनी चाहिए, उन्हें किस प्रकार की अर्ध-न्यायिक शक्तियां हासिल होनी चाहिए, इन सभी बिंदुओं पर राज्यों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की गई। मुझे खुशी है कि राज्यों ने इस सुझाव को बहुत उत्सुकता से स्वीकार किया है।"
भाषा पारुल सुरेश
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