बच्चों के नये तंबाकू उत्पादों के प्रति आकर्षित होने की आशंका नौ गुना अधिक: विशेषज्ञ
नरेश
- 31 May 2026, 05:04 PM
- Updated: 05:04 PM
नयी दिल्ली, 31 मई (भाषा) वयस्कों की तुलना में बच्चों के नये तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की ओर आकर्षित होने की आशंका नौ गुना अधिक होती है, जिससे वे इस उद्योग की विपणन रणनीतियों का प्रमुख शिकारबन रहे हैं। यह बात प्रमुख जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रविवार को विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर चेतावनी देते हुए कही।
विशेषज्ञों ने कहा कि तंबाकू और निकोटीन उद्योग अपने उत्पादों को युवाओं के लिए आकर्षक बनाने के वास्ते स्वादयुक्त विकल्पों, आकर्षक डिजाइन, डिजिटल प्रचार और अन्य तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है जिससे नई पीढ़ी के निकोटीन की लत से ग्रस्त होने को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब दुनिया इस वर्ष का विश्व तंबाकू निषेध दिवस ''अनमास्किंग द अपील: काउंटरिंग निकोटीन एंड टोबैको एडिक्शन'' विषय के साथ मना रही है। इसका उद्देश्य तंबाकू और निकोटीन उत्पादों को विशेष रूप से बच्चों के लिए आकर्षक दिखाने हेतु अपनाई जाने वाली रणनीतियों और तौर-तरीकों को उजागर करना है।
भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर) निदेशक शालिनी सिंह ने कहा कि तंबाकू और निकोटीन उद्योग अक्सर बच्चों और युवाओं को अपने विपणन प्रयास में केंद्रित करता है, क्योंकि अधिकांश उपभोक्ता किशोरावस्था या युवावस्था के शुरुआती वर्षों में इन उत्पादों का सेवन शुरू करते हैं।
रविवार को 'तंबाकू मुक्त भारत' नामक नागरिक पहल द्वारा आयोजित एक वेबिनार में उन्होंने कहा, ''इसी कारण विपणन रणनीतियां जिज्ञासा पैदा करने, प्रयोग के लिए प्रेरित करने और अंततः लत लगाने के उद्देश्य से तैयार की जाती हैं।''
उन्होंने कहा कि आज की चुनौती केवल पारंपरिक तंबाकू उत्पादों तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें नये निकोटीन उत्पाद भी शामिल हैं, जिन्हें अक्सर वास्तविकता की तुलना में कम हानिकारक और कम जोखिम वाला समझा जाता है।
दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान के पूर्व प्रमुख डॉ. आलोक ठाकर ने कहा कि तंबाकू भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था पर अब भी भारी बोझ डाल रहा है।
उन्होंने कहा, ''एक कैंसर विशेषज्ञ के रूप में हम प्रतिदिन तंबाकू सेवन के दुष्परिणाम देखते हैं। तंबाकू से संबंधित कई प्रकार के कैंसर रोके जा सकते हैं लेकिन लत अक्सर कम उम्र में शुरू होने के कारण हजारों परिवार आज भी इसकी पीड़ा झेल रहे हैं।''
एक अलग घटनाक्रम में विश्व स्वस्थ्य संगठन ने तंबाकू नियंत्रण और कैंसर रोकथाम में योगदान के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर) को वर्ष 2026 का 'विश्व तंबाकू निषेध दिवस पुरस्कार' देने की घोषणा की। यह तंबाकू नियंत्रण के क्षेत्र में डब्ल्यूएचओ द्वारा दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में से एक है।
इस सम्मान को व्यापक तंबाकू नियंत्रण समुदाय के लिए प्रोत्साहन बताते हुए डॉ. सिंह ने कहा, ''यह अनुसंधान, जनजागरूकता, नीतिगत समर्थन और जनभागीदारी में निरंतर प्रयासों के महत्व को रेखांकित करता है। भारत ने महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन तंबाकू और निकोटीन का परिदृश्य लगातार बदल रहा है जिसके लिए निरंतर सतर्कता आवश्यक है।''
डॉ. ठाकर ने आगाह किया कि अनेक लोग अब भी धूम्ररहित तंबाकू उत्पादों से जुड़े जोखिमों को कम करके आंकते हैं।
उन्होंने कहा, ''भारत में मुंह के कैंसर के बड़ी संख्या में मामले गुटखा, खैनी और धूम्ररहित तंबाकू के अन्य समान उत्पादों से जुड़े हैं। पैकेजिंग बदल सकती है और विपणन के तौर-तरीके विकसित हो सकते हैं, लेकिन इनके स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणाम गंभीर ही रहते हैं।''
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पूर्व निदेशक प्रोफेसर जे बी एस राजपूत ने कहा कि इस मुद्दे को केवल स्वास्थ्य चुनौती के रूप में नहीं, बल्कि शैक्षिक और सामाजिक चिंता के रूप में भी देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ''डब्ल्यूएचओ का यह निष्कर्ष कि बच्चों के नए तंबाकू और निकोटीन उत्पादों की ओर आकर्षित होने की नौ गुना अधिक आशंका होती है, समाज के लिए चेतावनी है। हम इस लड़ाई को केवल स्वास्थ्य अधिकारियों पर नहीं छोड़ सकते। बच्चों को प्रलोभन और दबाव की रणनीतियों को समझने तथा सोच-समझकर निर्णय लेने में मदद करने के लिए विद्यालयों, अभिभावकों और समुदायों की महत्वपूर्ण भूमिका है।''
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, दुनिया भर में 13 से 15 वर्ष आयु वर्ग के कम से कम चार करोड़ बच्चे वर्तमान में कम से कम एक तंबाकू उत्पाद का उपयोग करते हैं। इसके विपरीत, इसी आयु वर्ग के डेढ़ करोड़ से अधिक किशोर पहले ही ई-सिगरेट का इस्तेमाल कर रहे हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि भारत ने 2019 में ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाकर एक बड़ा कदम उठाया था लेकिन अवैध पहुंच, ऑनलाइन बिक्री माध्यमों और सोशल मीडिया सामग्री के जरिये युवाओं के निकोटीन उत्पादों तथा उनसे जुड़े प्रचार संदेशों के संपर्क में आने को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
डॉ. सिंह ने कहा, ''युवा इन उत्पादों का अक्सर केवल आकर्षक पक्ष देखते हैं, न कि इनके कारण होने वाली लत और स्वास्थ्य संबंधी दुष्परिणामों को।''
राजपूत ने कहा कि रोकथाम के प्रयासों में अभिभावकों और शिक्षकों को सक्रिय भागीदार बनना होगा।
इस वेबिनार का संचालन स्वास्थ्य संचालन मुकेश केजरीवाल ने किया। इसमें जनस्वास्थ्य, कैंसर रोकथाम और शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लेकर बच्चों और युवाओं में तंबाकू तथा निकोटीन की लत से उत्पन्न चुनौतियों पर चर्चा की।
भाषा अमित नरेश
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