जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने का निर्देश, 600 कर्मचारियों पर मंडराए संकट के बादल
संतोष
- 23 May 2026, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
(फोटो के साथ)
(मानसी जगानी)
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली जिमखाना क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिए जाने के बाद शनिवार को क्लब के लगभग 600 कर्मचारियों के भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे। नौकरी की सुरक्षा और आगे की व्यवस्था को लेकर स्पष्टता के अभाव में कर्मचारी चिंतित हैं।
केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अंतर्गत भूमि एवं विकास कार्यालय (एलएंडडीओ) ने एक आदेश में कहा कि "तत्काल संस्थागत जरूरतों, प्रशासनिक बुनियादी ढांचे और जनहित परियोजनाओं" के लिए दिल्ली के लुटियंस इलाके में स्थित 27.3 एकड़ भूमि की आवश्यकता है।
आदेश में कहा गया है कि "पांच जून तक भूमि एवं विकास कार्यालय जमीन को अपने कब्जे में ले लेगा।"
एलएंडडीओ ने 22 मई के अपने नोटिस में कहा कि 2, सफदरजंग रोड पर स्थित परिसर मूल रूप से इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड (अब दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड) को सामाजिक व खेल क्लब के संचालन के लिए पट्टे पर दिया गया था, और अब आसपास की सरकारी भूमि से जुड़ी व्यापक जनहित परियोजनाओं के लिए इसकी आवश्यकता है।
लोक कल्याण मार्ग के निकट स्थित इस विशाल परिसर में शनिवार शाम बेचैनी का माहौल दिखा। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें भविष्य की कार्यवाही के बारे में प्रबंधन की ओर से कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है।
एक कर्मचारी ने कहा कि कर्मचारियों को इस घटनाक्रम की जानकारी हाल ही में मिली और अचानक जारी हुए इस आदेश ने उन्हें चिंतित कर दिया।
कर्मचारी ने कहा, "अब तक कर्मचारियों के साथ कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई है। हममें से अधिकांश अभी भी इस बात पर स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं कि पांच जून के बाद हमारी नौकरियों का क्या होगा।"
प्रभावित लोगों में लंबे समय से कार्यरत वे कर्मचारी भी शामिल हैं जिन्होंने दशकों तक क्लब की सुविधाओं का रखरखाव किया है।
टेनिस लॉन में काम करने वाले एक माली पिछले 17 वर्षों से क्लब से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि वह दोपहर में घास काटने और कोर्ट की देखभाल करने के अपने नियमित काम में लगे थे, तभी उन्हें इस घटनाक्रम की जानकारी मिली।
उन्होंने कहा, "मैं लॉन में घास काट रहा था और नियमित ड्यूटी के तहत कोर्ट क्षेत्र की देखभाल कर रहा था, तभी लगभग शाम चार बजे किसी ने बताया कि जून की शुरुआत तक क्लब बंद हो सकता है।"
उन्होंने कहा कि दिनभर प्रशासन की ओर से ऐसा कोई संकेत नहीं मिला था और कर्मचारियों को यह जानकारी अनौपचारिक रूप से आपस में चर्चा के जरिए मिलनी शुरू हुई।
उन्होंने कहा, "इतने वर्षों में यहां काम करते हुए ऐसा कभी नहीं हुआ। हमें काम करते-करते अचानक इस बारे में पता चला। इससे पहले कोई नोटिस या चेतावनी नहीं दी गई थी।"
क्लब के एक अधिकारी ने कहा कि कानूनी और प्रशासनिक विकल्पों पर आंतरिक चर्चा जारी है और इतना बड़ा संस्थान अचानक बंद करना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है।
अधिकारी ने कहा, "यह एक बहुत बड़ा संस्थान है, जिसका लंबा इतिहास है और प्रतिष्ठित लोग इसके सदस्य हैं। बिना किसी दूसरी व्यवस्था के इसे तुरंत बंद करना व्यवहारिक नहीं है।"
अन्य कर्मचारियों ने कहा कि प्रशासन की ओर से संवाद न होने से चिंता और बढ़ गई है। कई लोगों को यह नहीं पता कि वेतन, रोजगार अनुबंध या पुनर्नियोजन के विकल्प सुरक्षित रहेंगे या नहीं।
क्लब परिसर में पट्टे के आधार पर संचालित एक निजी कैफे में काम करने वाली दो महिलाओं ने कहा कि उनकी स्थिति अपेक्षाकृत स्पष्ट है क्योंकि वे एक बाहरी कंपनी की कर्मचारी हैं।
एक महिला कर्मचारी ने कहा, "अगर यहां कैफे बंद होता है तो संभवतः हमें किसी अन्य प्रतिष्ठान में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष रूप से क्लब में कार्यरत कर्मचारियों की स्थिति अधिक गंभीर है।
उन्होंने कहा, "जो लोग प्रत्यक्ष रूप से क्लब में कार्यरत हैं, उनको लेकर बिल्कुल भी स्पष्टता नहीं है। काफी भ्रम की स्थिति है।"
एक कर्मचारी ने कहा कि आदेश जारी होने से पहले प्रबंधन को कोई पूर्व संकेत नहीं दिया गया था और अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं बताई गई है।
अधिकारी ने कहा, "हमें इस बारे में हाल ही में पता चला। पहले कोई चर्चा नहीं हुई थी। बैठकें जारी हैं और अगले कदमों पर विचार किया जा रहा है, जिनमें कानूनी विकल्प भी शामिल हैं।"
ब्रिटिश काल में स्थापित इस क्लब ने 1913 में इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब के नाम से इस स्थल से संचालन शुरू किया था। भारत की आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया और मौजूदा संरचनाओं का निर्माण 1930 के दशक में किया गया था।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष
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