केंद्र ने वीबी-जी राम जी लागू करने के लिए मसौदा नियम अधिसूचित किये
धीरज
- 23 May 2026, 07:22 PM
- Updated: 07:22 PM
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) केंद्र सरकार ने विकसित भारत रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (वीबी-जी राम-जी) के तहत मसौदा नियमों को शनिवार को अधिसूचित किया।
केंद्र ने नये ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए संस्थागत और प्रशासनिक ढांचा निर्धारित किया, जो एक जुलाई से मनरेगा का स्थान लेगा, साथ ही इसे अंतिम रूप देने से पहले जनता से प्रतिक्रिया आमंत्रित की है।
अधिकारियों ने बताया कि अधिनियम की धारा 33 और अन्य प्रासंगिक प्रावधानों के तहत तैयार किए गए नियमों के मसौदे को अंतिम रूप देने से पहले व्यापक हितधारकों के परामर्श के लिए सार्वजनिक किया गया है।
प्रस्तावित नियमों में बदलाव वाले प्रावधान, राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति, केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद, प्रशासनिक खर्च, शिकायत निवारण, मजदूरी और बेरोजगारी भत्ते के भुगतान तथा मानक आवंटन से अधिक हुए व्यय से जुड़े हैं, जिसमें बिना विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों पर होने वाले खर्च का प्रावधान भी शामिल है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य पूरे देश में अधिनियम के क्रियान्वयन के लिए संस्थागत, प्रशासनिक, वित्तीय और शासन ढांचा स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि साथ ही नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सहभागी परामर्श सुनिश्चित करना है।
नियमों में बदलाव की अवधि के दौरान चल रहे कार्यों को जारी रखने, देनदारियों के निस्तारण, अभिलेखों के हस्तांतरण और श्रमिकों के अधिकारों की निरंतरता का प्रावधान है। मौजूदा ई-केवाईसी सत्यापित मनरेगा जॉब कार्ड नये ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड जारी होने तक अस्थायी रूप से वैध रहेंगे, साथ ही यदि चल रही परियोजनाएं श्रम मांग को पूरा करने के लिए अपर्याप्त हैं तो नये कार्य भी शुरू किए जा सकते हैं।
वीबी-जी राम जी अधिनियम महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी (मनरेगा) अधिनियम को प्रतिस्थापित करने के लिए लाया गया है, जिसे सरकार द्वारा ''अगली पीढ़ी के ग्रामीण विकास ढांचे'' के तौर पर वर्णित किया गया है, जो विकसित भारत 2047 की परिकल्पना के अनुरूप है।
नये कानून के तहत वार्षिक रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है और ग्रामीण रोजगार को विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के माध्यम से बुनियादी ढांचे के निर्माण, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने और उबरने की क्षमता और ग्राम स्तरीय योजना से अधिक निकटता से जोड़ा गया है।
प्रस्तावित ढांचे में नए निगरानी तंत्रों की भी परिकल्पना की गई है। एक राष्ट्रीय स्तरीय संचालन समिति क्रियान्वयन पर रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान करेगी, जिसमें मानक आवंटन, अभिसरण, निगरानी प्रणाली और प्रौद्योगिकी-आधारित शासन शामिल हैं।
मसौदे के अनुसार, समिति में ग्रामीण विकास विभाग, नीति आयोग, केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
इस अधिनियम के तहत क्रियान्वयन, मूल्यांकन, निगरानी और रिपोर्टिंग में सहयोग के लिए केंद्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का भी प्रस्ताव किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि इन दोनों निकायों का उद्देश्य नीति समन्वय, संस्थागत निगरानी और सहभागी शासन को मजबूत करना है।
शिकायत निवारण नियमों के मसौदे में डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे द्वारा समर्थित एक प्रौद्योगिकी-आधारित, बहुस्तरीय और समयबद्ध प्रणाली स्थापित करने का प्रयास है, जिसमें पंजीकरण, निगरानी, शिकायत निवारण और अपील के प्रावधान शामिल हैं।
प्रशासनिक व्यय नियमों में केंद्र द्वारा वहन किए जाने वाले, राज्यों के साथ साझा किए जाने वाले या राज्यों द्वारा वहन किए जाने वाले व्यय निर्दिष्ट किए गए हैं, जिनमें कर्मचारी की नियुक्ति, प्रशिक्षण, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी प्रणाली, निगरानी, शिकायत निवारण और सामाजिक लेखापरीक्षा पर होने वाला व्यय शामिल है।
मसौदा नियमों में मजदूरी और बेरोजगारी भत्ता के भुगतान के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीएल) को ही बरकरार रखा गया है, जबकि रोजगार की मांग के 15 दिनों के भीतर रोजगार उपलब्ध कराया जाना अनिवार्य है; ऐसा न होने पर श्रमिक बेरोजगारी भत्ता के पात्र होंगे।
मंत्रालय ने कहा कि मसौदा नियमों पर आपत्तियां और सुझाव 21 जून, 2026 तक प्रस्तुत किए जा सकते हैं और परामर्श प्रक्रिया के दौरान प्राप्त सभी प्रासंगिक प्रतिक्रियाओं पर अंतिम रूप देने से पहले विचार किया जाएगा। मसौदा नियम ई-राजपत्र पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
भाषा अमित धीरज
धीरज
2305 1922 दिल्ली