विनेश फोगाट एशियाई खेलों के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेंगी: दिल्ली उच्च न्यायालय
आनन्द
- 23 May 2026, 08:15 PM
- Updated: 08:15 PM
नयी दिल्ली, 23 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने मशहूर पहलवान विनेश फोगाट को एशियाई खेल के लिए होने वाले आगामी ट्रायल्स में हिस्सा लेने की मंजूरी दे दी है।
अदालत ने कहा कि भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) की चयन नीति भेदभावपूर्ण है क्योंकि इसमें मातृत्व अवकाश के बाद वापसी करने वाली विनेश जैसी प्रतिष्ठित खिलाड़ी के नाम पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं है।
मुख्य न्यायाधीश डी के उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने आदेश दिया कि 30-31 मई को होने वाले चयन ट्रायल्स की डब्ल्यूएफआई द्वारा वीडियोग्राफी की जाएगी और इसमें भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) और भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) से एक-एक स्वतंत्र पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेगा।
अदालत ने 22 मई को पारित और शनिवार को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए आदेश में कहा, ''अपीलकर्ता को एशियाई खेल 2026 के चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाती है जो 30.05.2026 और 31.05.2026 को होने वाले हैं। ''
अदालत ने कहा, ''यह नीति और सर्कुलर साफ तौर पर भेदभावपूर्ण हैं क्योंकि यह प्रतिवादी नंबर एक (डब्ल्यूएफआई) को अपीलकर्ता जैसी दिग्गज खिलाड़ियों के नाम पर विचार करने का कोई अधिकार नहीं देती है विशेषकर तब जब उसने मातृत्व अवकाश के कारण खेल से कुछ समय के लिए दूरी बनाई हो। ''
अदालत ने कहा कि कारण बताओ नोटिस में दिए गए आधार 'पहले से सोचे-समझे और बंद हो चुके मुद्दों को फिर से उठाने वाले लगते हैं' इसलिए 'खेल और न्याय के हित में यह जरूरी है कि अपीलकर्ता को चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की अनुमति दी जाए।'
अदालत ने कहा कि चयन ट्रायल्स के लिए तय मानक, पिछली प्रथा से काफी अलग हैं। पिछली प्रथा में एशियाई खेलों के लिए मशहूर खिलाड़ियों के चयन में कुछ छूट देने का प्रावधान था। अदालत ने यह भी कहा कि कानून को यह पक्का करना चाहिए कि मां बनना, फोगाट जैसी महिला खिलाड़ियों को बाहर करने का बहाना नहीं बने।
अदालत ने जोर देकर कहा कि मां बनने को पेशेवर रुकावट या ऐसा हालात नहीं माना जा सकता जिसके आधार पर किसी के साथ बुरा बर्ताव किया जाए।
अदालत ने कहा कि डब्ल्यूएफआई ने नौ मई को फोगाट को जो 'कारण बताओ नोटिस' भेजा था, उसमें बताए गए कारण 'पहले से सोचे-समझे लगते हैं' और 'खेल और न्याय के हित में यह जरूरी है कि अपील करने वाली खिलाड़ी को चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत दी जाए।'
अदालत ने डब्ल्यूएफआई के इस रवैये पर भी नाराजगी जताई कि उसने 'कारण बताओ नोटिस' में फोगाट के 2024 पेरिस ओलंपिक खेलों से बाहर होने को 'राष्ट्रीय शर्मिंदगी' बताया था। अदालत ने कहा कि ऐसा बयान 'बेहद अफसोसजनक' और 'पूरी तरह गलत सोच पर आधारित' है जिससे बचना चाहिए था।
अदालत ने कहा, ''इस तरह की टिप्पणियां पिछड़ी सोच दिखाती हैं और डब्ल्यूएफआई (प्रतिवादी नंबर एक) की दुर्भावना भरी भावना को जाहिर करती हैं जो अपील करने वाली खिलाड़ी के प्रति बदले की भावना से काम कर रहा है। ''
अदालत ने कहा कि फोगाट को चयन ट्रायल्स से बाहर करने की वजह सीधे तौर पर उनका 'कुछ समय के लिए खेल से दूर रहना' और 'कुछ समय के लिए संन्यास लेना' है। अदालत ने यह भी कहा कि कोई भी ऐसा नियम जिससे किसी महिला को गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद ठीक होने के समय के कारण नुकसान उठाना पड़े, वह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 में दिए गए 'भेदभाव नहीं करने के सिद्धांतों' का उल्लंघन करता है।
अदालत ने कहा, ''इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि एक महिला एथलीट के लिए गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद का समय, शारीरिक तौर पर बहुत बड़ी चुनौतियों से भरा होता है। खेल से जुड़ी संस्थाओं में अक्सर इन चुनौतियों की गंभीरता को ठीक से समझा या माना नहीं जाता। ''
उसने कहा, ''मां बनने को जिंदगी का एक स्वाभाविक और बेहद अहम हिस्सा माना जाना चाहिए जिसके लिए संस्थाओं को सहयोग और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। इसलिए, कानून को यह पक्का करना चाहिए कि मां बनना, अपील करने वाली खिलाड़ी जैसी महिला एथलीटों को बाहर करने या उन्हें हाशिए पर धकेलने का बहाना नहीं बने। ''
अदालत ने यह आदेश फोगाट की उस अपील पर दिया जिसमें उन्होंने 18 मई को एकल न्यायाधीश की पीठ के आदेश को चुनौती दी थी जिसमें डब्ल्यूएफआई द्वारा 'अयोग्य' घोषित किए जाने के बावजूद इस वर्ष के एशियाई खेलों के लिए 30-31 मई को होने वाले चयन ट्रायल्स में उनकी भागीदारी के मुद्दे पर उन्हें तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
अपने आदेश में अदालत ने कहा कि चूंकि चयन नीति और कारण बताओ नोटिस की जांच एकल न्यायाधीश की पीठ कर रही है इसलिए इस चरण पर फोगाट को एशियाई खेलों के ट्रायल्स में हिस्सा लेने से रोककर याचिका को बेकार होने देना सही नहीं होगा।
अदालत ने कहा, ''यह साफ है कि अपीलकर्ता के मातृत्व और प्रतिवादी नंबर एक द्वारा जारी कारण बताओ नोटिस को छोड़कर, वह चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की हकदार होती। इसलिए हालात उसके काबू से बाहर थे और जब तक एकल पीठ नीति, सर्कुलर और कारण बताओ नोटिस के नतीजों की कानूनी वैधता की जांच कर रहे हैं, तब तक अपीलकर्ता के हितों की रक्षा करना और उसे चयन ट्रायल्स में हिस्सा लेने की इजाजत देना ही सही माना गया है। द्धद्ध
अदालत ने साइ और आईओए के दो स्वतंत्र पर्यवेक्षकों से कहा कि वे एकल न्यायाधीश की पीठ के सामने एक रिपोर्ट पेश करें। इन पर्यवेक्षकों को केंद्र सरकार नामांकित करेगी।
अपनी याचिका में फोगाट ने डब्ल्यूएफआई की चयन नीति और सर्कुलर को चुनौती दी है, जिसमें एशियाई खेलों के ट्रायल्स में हिस्सा लेने की पात्रता को कुछ खास टूर्नामेंटों के पदक जीतने वालों तक ही सीमित कर दिया गया है।
फोगाट ने दावा किया है कि डब्ल्यूएफआई द्वारा चुनी गई 'क्वालीफिकेशन विंडो' काफी हद तक उसकी गर्भावस्था और बच्चे के जन्म के बाद ठीक होने के लिए ली गई छुट्टी के समय से मेल खाती थी।
इसी महीने की शुरुआत में डब्ल्यूएफआई ने फोगाट को 26 जून 2026 तक किसी भी घरेलू प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। डब्ल्यूएफआई ने इसके पीछे यह तर्क दिया था कि डोपिंग-रोधी नियमों के तहत, संन्यास से वापसी करने वाले खिलाड़ियों के लिए छह महीने का अनिवार्य 'नोटिस पीरियड' पूरा करना जरूरी होता है।
फोगाट ने डब्ल्यूएफआई के इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया और गोंडा में आयोजित 'नेशनल ओपन रैंकिंग टूर्नामेंट' में हिस्सा लेने के लिए पहुंच गईं।
साल 2023 में डब्ल्यूएफआई के तत्कालीन अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर लगे कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के ख़िलाफ महिला पहलवानों द्वारा किए गए विरोध-प्रदर्शन में फोगाट ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था।
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पहलवान फोगाट को अगस्त 2024 में सुबह वजन करने के दौरान 100 ग्राम ज्यादा वजन होने के कारण 50 किलोग्राम वर्ग के पेरिस ओलंपिक फाइनल से अयोग्य घोषित कर दिया गया था।
भाषा नमिता आनन्द
आनन्द
2305 2015 दिल्ली