कोई समाज पढ़ना बंद कर देता है, तो वह गहन चिंतन की क्षमता खो देता है: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

कोई समाज पढ़ना बंद कर देता है, तो वह गहन चिंतन की क्षमता खो देता है: उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन