एशियाई क्लब प्रतियोगिताओं में भारतीय फुटबॉल का निचला स्तर: तीसरे स्तर में सिर्फ प्ले-ऑफ में जगह मिली
नमिता
- 22 May 2026, 05:53 PM
- Updated: 05:53 PM
नयी दिल्ली, 22 मई (भाषा) भारतीय फुटबॉल में प्रशासनिक गड़बड़ी के कारण महाद्वीपीय स्तर पर देश की स्थिति और भी कमजोर हो गई है क्योंकि भारत को एशिया के क्लब फुटबॉल ढांचे के तीसरे और अंतिम स्तर, एएफसी चैलेंज लीग में 2027-28 सत्र के लिए केवल एक प्ले-ऑफ स्थान मिला है।
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय क्लब एएफसी चैंपियंस लीग (एसीएल) के शीर्ष स्तर के ग्रुप चरण में भी खेलते थे, लेकिन हाल के समय में उन्हें एसीएल 2 (दूसरे स्तर) में ही संतोष करना पड़ा है। भारत को 2026-27 एसीएल 2 के लिए पहले ही दो प्ले-ऑफ स्थान आवंटित किए जा चुके हैं। बृहस्पतिवार को इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) का खिताब जीतने वाली ईस्ट बंगाल और सुपर कप चैंपियन एफसी गोवा जुलाई-अगस्त में एसीएल 2 प्ले-ऑफ चरण में खेलेंगी।
एशियाई फुटबॉल महासंघ (एएफसी) ने शुक्रवार को 2027-28 सत्र के लिए भारत को तीसरे स्तर की एएफसी चैलेंज लीग में केवल एक प्ले-ऑफ स्थान आवंटित किया। एएफसी चैलेंज लीग आम तौर पर पाकिस्तान, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और बांग्लादेश जैसे देशों के क्लबों के लिए होती है।
एएफसी ने सदस्य संघ देशों के लिए स्थान का आवंटन 2025-26 सत्र के समापन के बाद किया।
भारतीय फुटबॉल से जुड़े एक पूर्व अधिकारी ने पीटीआई को बताया, "यह चौंकाने वाला है। हम पहले एसीएल के शीर्ष डिवीजन और फिर एसीएल 2 में खेल रहे थे। अब हम तीसरे स्तर पर पाकिस्तान, नेपाल, भूटान जैसे देशों के क्लबों के साथ प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह मूल रूप से दक्षिण एशियाई फुटबॉल संघ (एसएएफ) के देशों के क्लबों के साथ खेलना है।"
उन्होंने आगे कहा, "यह तीसरे स्तर की एएफसी चैलेंज लीग के लिए सीधे ग्रुप चरण का स्थान भी नहीं है, बल्कि प्ले-ऑफ का स्थान है। इस पर विश्वास करना मुश्किल है, लेकिन हमारी फुटबॉल प्रणाली कुछ समय से बिगड़ती जा रही है और पतन की ओर अग्रसर है।"
पूर्व अधिकारी ने चेतावनी दी कि आगामी सत्र में आईएसएल क्लबों के लिए विदेशी खिलाड़ियों का आकर्षण कम हो सकता है, क्योंकि भारत को ज्यादातर दक्षिण एशियाई देशों के कम प्रसिद्ध क्लबों के साथ खेलना होगा।
एशियाई क्लब प्रतियोगिताओं के लिए स्थान का आवंटन सदस्य संघों की रैंकिंग पर आधारित होता है। यह रैंकिंग फीफा रैंकिंग से अलग होती है, क्योंकि फीफा रैंकिंग राष्ट्रीय टीम के प्रदर्शन पर आधारित होती है। एएफसी की रैंकिंग में घरेलू लीग के तकनीकी मानक, क्लब लाइसेंसिंग प्रणाली, स्टेडियमों की संख्या, खेल निष्ठा, शासन और नियम, प्रतियोगिता प्रारूप आदि मानदंड शामिल हैं।
एएफसी के 2026 नियमों के अनुसार अगर कोई सदस्य संघ एसीएल एलीट और एसीएल 2 में खेलना चाहता है, तो घरेलू शीर्ष डिवीजन में प्रत्येक क्लब को प्रति सत्र कम से कम 24 मैच खेलने होंगे, जिसमें घरेलू लीग और घरेलू कप शामिल हैं।
इसके साथ ही घरेलू शीर्ष डिवीजन की न्यूनतम अवधि आठ महीने होनी चाहिए और टीमों को घरेलू और प्रतिद्वंद्वी टीम के मैदान पर मैच खेलने का प्रावधान होना चाहिए।
हाल ही में समाप्त हुए संक्षिप्त आईएसएल में प्रत्येक क्लब ने केवल 13 मैच खेले थे और प्रारूप भी घरेलू और प्रतिद्वंद्वी टीम के घरेलू मैदान का नहीं था।
भाषा आनन्द नमिता
नमिता
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