गुजरात: ऑपरेशन मिलाप के तहत पुलिस ने 15 दिनों में 700 से अधिक गुमशुदा लोगों का पता लगाया
नरेश
- 21 May 2026, 09:01 PM
- Updated: 09:01 PM
गांधीनगर, 21 मई (भाषा) गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन मिलाप' के तहत सात से 21 मई के बीच लापता हुए 701 लोगों का पता लगाया और उन्हें उनके परिवारों से मिलाया। राज्य के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
एक आधिकारिक विज्ञप्ति में संघवी के हवाले से बताया गया कि मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में लापता व्यक्तियों का पता लगाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया है और इस उद्देश्य के लिए पुलिस को सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए।
विज्ञप्ति के मुताबिक, ''राज्य के पुलिस थानों ने 7 मई से 21 मई के बीच कुल 701 लोगों का पता लगाया और उन्हें उनके परिवारों से मिलाया। ऑपरेशन मिलाप के तहत, पुलिस टीम गुमशुदा होने के मामलों की फिर से जांच कर रही हैं, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर उनका पता लगा रही हैं, पुराने सबूतों का विश्लेषण कर रही हैं और उन परिवारों से एक बार फिर संपर्क कर रही हैं, जो वर्षों से बिछड़े परिजनों की तलाश कर रहे हैं।''
इसमें कहा गया कि मई के पहले सप्ताह में शुरू किए गए विशेष अभियान में राज्य के प्रत्येक पुलिस आयुक्त और जिला पुलिस अधीक्षक को लंबे समय से लंबित गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों को फिर से खोलने, उनकी समीक्षा करने और आक्रामक रूप से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया गया था।
अपर पुलिस महानिदेशक (सीआईडी अपराध और रेलवे) अजय चौधरी ने बताया, ''वर्ष 2007 से अब तक राज्य में कुल 24,767 लोगों के लापता होने की प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। यह एक लक्षित अभियान है जो आंकड़ों, तकनीकी जानकारी और मानवीय जानकारी के आधार पर स्पष्ट दिशा-निर्देशों के साथ चलाया जा रहा है। हमें उन लोगों का पता लगाने में भी सफलता मिल रही है जो कई साल पहले लापता हो गए थे।''
पुलिस के अनुसार, यह अभियान केवल लापता व्यक्तियों का पता लगाने तक ही सीमित नहीं है, क्योंकि जांचकर्ता मानव तस्करी गिरोहों, भगोड़ों के नेटवर्क और आपराधिक गिरोहों का पर्दाफाश करने की भी कोशिश कर रहे हैं, जो कथित तौर पर बाल तस्करी और नवजात बच्चों की खरीद-बिक्री में संलिप्त हैं।
विज्ञप्ति के मुताबिक इस अभियान के दौरान सुलझाए गए सबसे अहम मामलों में एक महिला का पता लगाना था जो करीब 10 वर्षों से लापता थी।
इसमें कहा गया, ''वडोदरा जिले के पादरा तालुका की 23 वर्षीय विवाहित महिला 2016 में अपने पांच वर्षीय बेटे के साथ लापता हो गई थी। उसके पति ने पुलिस को सूचना दी थी कि वह अपने मायके गई थी लेकिन कभी वापस नहीं लौटी। ऑपरेशन मिलाप के तहत पुलिस ने फिर से परिवार के सदस्यों से संपर्क किया। उसके पति ने बताया कि उसने हाल ही में अपनी पत्नी को सोशल मीडिया पर देखा है।''
विज्ञप्ति के मुताबिक सोशल मीडिया मंचों की छानबीन से जानकारी मिली कि वह अब राजकोट में एक अन्य व्यक्ति के साथ रह रही है और गरबा की कक्षाएं संचालित करती है तथा उसका बेटा अब 15 साल का हो चुका था। जांचकर्ताओं ने बाद में पाया कि उसने घरेलू झगड़ों के बाद अपने पति को छोड़ दिया था और 2016 में दोबारा शादी कर ली थी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''ऐसे मामले गुमशुदा होने के पीछे छिपी जटिल मानवीय कहानियों को उजागर करते हैं। गुमशुदा होने के कई कारण होते हैं, जिनमें पारिवारिक विवाद, वैवाहिक कलह, परीक्षा का तनाव, असफल रिश्ते, आर्थिक तंगी और आपराधिक शोषण शामिल हैं।''
विज्ञप्ति के मुताबिक जांच को मजबूत करने के लिए सभी पुलिस थानों को 15 सूत्रीय विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की गई है।
मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) में मामले की फाइलों को फिर से खोलना, शिकायतकर्ताओं से संपर्क करना, डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण करना, सोशल मीडिया गतिविधि पर नज़र रखना, परिवहन केंद्रों और आश्रय गृहों की जांच करना, जमीनी दौरे करना और संदिग्ध तस्करों और बार-बार अपराध करने वालों से पूछताछ करना शामिल है।
विज्ञप्ति के मुताबिक पुलिस कर्मियों को लापता व्यक्तियों के मोबाइल फोन को इलेक्ट्रॉनिक निगरानी में रखने, उनके अंतिम सक्रिय स्थानों का पता लगाने और फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप जैसे मंचों पर सोशल मीडिया गतिविधि की जांच करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
विज्ञप्ति में कहा गया, ''पुलिस सरकारी अस्पतालों के पोस्टमार्टम कक्षों की भी जांच कर रही है, अज्ञात शवों की तस्वीरों का मिलान लापता व्यक्तियों के रिकॉर्ड से कर रही है और अपहरण और मानव तस्करी के मामलों में पहले गिरफ्तार किए गए संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। आंध्र प्रदेश से जुड़े मानव तस्करी नेटवर्क के हालिया भंडाफोड़ के बाद इस अभियान का महत्व और भी बढ़ गया है।''
इसमें कहा गया कि गुजरात से लापता लोगों में बड़ी संख्या महिलाओं, बच्चों और किशोरों की है और ये ऐसे समूह हैं जिन्हें तस्करी, दुर्व्यवहार और शोषण के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील माना जाता है।
भाषा धीरज नरेश
नरेश
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