राजनाथ ने सियोल में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया
नरेश
- 21 May 2026, 08:46 PM
- Updated: 08:46 PM
(तस्वीरों के साथ)
नयी दिल्ली, 21 मई (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बृहस्पतिवार को कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता में भारत के योगदान की ''स्थायी विरासत'' का उल्लेख किया।
सियोल यात्रा पर पहुंचे रक्षा मंत्री ने दक्षिण कोरिया के देशभक्ति एवं पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्योव ओह-युल के साथ इमजिंगक पार्क में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन करने के बाद दोनों देशों के साझा इतिहास का जिक्र किया।
कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित स्मृति कार्यक्रमों के तहत निर्मित यह स्मारक भारतीय सेना की '60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस' और 'कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (सीएफआई)' द्वारा युद्ध के दौरान दिखाई गई बहादुरी, बलिदान और मानवीय सेवा को समर्पित है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, दोनों मंत्रियों ने स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित कर उन भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी, जिनकी सेवाओं को कोरिया गणराज्य के लोग आज भी गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं।
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता के लिए भारत के योगदान की स्थायी विरासत पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास और बलिदान भारत-कोरिया गणराज्य विशेष रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव बने हुए हैं।
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद करना लोगों के बीच आपसी समझ को मजबूत करता है और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को नयी पहचान देता है।
दक्षिण कोरिया के मंत्री ने कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की भूमिका के लिए गहरी सराहना व्यक्त की और भारतीय सैनिकों के बलिदान एवं मानवीय सेवाओं से बने स्थायी मित्रता संबंधों को स्वीकार किया।
दोनों मंत्रियों ने कोरियाई युद्ध के पूर्व सैनिकों को सम्मानित करने और आपसी सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सैनिकों के निस्वार्थ बलिदान की स्मृति में एक संस्मरण भी जारी किया गया।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए जी रंगराज के नेतृत्व वाली 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों का उपचार कर उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा और समर्पण का परिचय दिया।
इसमें कहा गया है कि घायल सैनिकों और दक्षिण कोरिया के नागरिकों ने उनकी अद्वितीय बहादुरी और मानवीय दृष्टिकोण के कारण उन्हें 'मैरून एंजल्स' की उपाधि दी थी।
भारत ने युद्धविराम के बाद भी 'कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया' के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे 'न्यूट्रल नेशंस रिपैट्रिएशन कमीशन (एनएनआरसी)' के तहत जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं।
मंत्रालय के अनुसार, लेफ्टिनेंट जनरल के.एस. थिमैया के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता में गठित एनएनआरसी की स्थापना 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद युद्धबंदियों के मानवीय प्रत्यावर्तन और हिरासत को सुविधाजनक बनाने के लिए की गई थी।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का उत्कृष्ट नेतृत्व और कूटनीतिक कौशल कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की रचनात्मक और शांति-उन्मुख भूमिका का स्थायी प्रतीक बना हुआ है।
यह युद्ध स्मारक उसी क्षेत्र में बनाया गया है, जहां सितंबर 1954 में सीएफआई ने 'हिंद नगर' स्थापित किया था। यहां लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनकी शांतिपूर्ण वापसी तक रखा गया था।
भाषा गोला नरेश
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