आवारा कुत्तों से संबंधित न्यायालय के आदेश के विरोध में कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल की योजना
अविनाश
- 19 May 2026, 10:18 PM
- Updated: 10:18 PM
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) पशु अधिकार कार्यकर्ता आवारा कुत्तों के बारे में उच्चतम न्यायालय के आदेश के विरोध में दिल्ली के रामलीला मैदान में भूख हड़ताल करने की योजना बना रहे हैं तथा इस मुद्दे को लेकर वे विभिन्न उच्च न्यायालयों का दरवाजा खटखटाने पर भी विचार कर रहे हैं।
पशु अधिकार कार्यकर्ता शकरुद्दीन ने कहा कि कई समूह राष्ट्रीय राजधानी में भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति मांग रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''हम रामलीला मैदान में शांतिपूर्ण भूख हड़ताल करने के साथ ही विभिन्न उच्च न्यायालयों में कानूनी हस्तक्षेप की तैयारी कर रहे हैं। कार्यकर्ता आवारा कुत्तों को ले जाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले वाहनों पर भी नजर रखेंगे और पता लगाएंगे कि जानवरों को कहां ले जाया जा रहा है।''
प्रदर्शन की यह योजना उच्चतम न्यायालय के उस आदेश के बाद बनाई गई है, जिसमें मानव जीवन के खतरे को कम करने के लिए रेबीज संक्रमित, लाइलाज बीमारी से ग्रसित या स्पष्ट रूप से खतरनाक आवारा कुत्तों को ''जान से मारने'' की अनुमति दी गई है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने देश में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए।
एक अन्य कार्यकर्ता तान्या ने कहा, ''आवारा कुत्तों से संबंधित कोई भी कार्रवाई मानवीय और पारदर्शी होनी चाहिए। हम नसबंदी और टीकाकरण नियमों का उचित कार्यान्वयन चाहते हैं तथा हमें उम्मीद है कि अदालतें किसी भी अंतिम निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विचार करेंगी।''
छाया नाम की एक कार्यकर्ता ने कहा, ''हम अधिकारियों द्वारा पकड़े गए कुत्तों की गतिविधियों पर नजर रखेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि उचित प्रक्रियाओं का पालन किया जाए। कोई भी कठोर कदम उठाने से पहले रेबीज परीक्षण और चिकित्सा जांच अनिवार्य होनी चाहिए।''
पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने विरोध प्रदर्शन के संबंध में कालकाजी में एक बैठक का आयोजन भी किया था।
इस बीच, आवासीय कल्याण संघों (आरडब्ल्यूए) ने न्यायालय की टिप्पणियों का स्वागत करते हुए कहा कि कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं के बीच सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पूर्वी दिल्ली आरडब्ल्यूए संयुक्त मोर्चे के बी. एस. वोहरा ने कहा कि अदालत ने बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों और पैदल यात्रियों की चिंताओं को सही ढंग से उजागर किया है।
उन्होंने कहा, ''जन सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। साथ ही, समस्या के मूल कारणों को दूर करने के लिए उचित आश्रय, नसबंदी, टीकाकरण और अपशिष्ट प्रबंधन सहित कोई भी कार्रवाई मानवीय, वैज्ञानिक और टिकाऊ होनी चाहिए।''
न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए 'यूनाइटेड रेजिडेंट्स ऑफ दिल्ली' (यूआरडी) के महासचिव सौरव गांधी ने कहा कि इस आदेश से आवारा कुत्तों के हमलों से परेशान निवासियों को राहत मिली है।
भाषा यासिर अविनाश
अविनाश
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