दिल्ली पुलिस ने 'लकड़ी की पॉलिश' की आड़ में बिहार में शराब तस्करी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया
पवनेश
- 19 May 2026, 09:15 PM
- Updated: 09:15 PM
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) दिल्ली पुलिस ने लकड़ी की पॉलिश की आड़ में शराबबंदी वाले राज्य बिहार में शराब की तस्करी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
पुलिस अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि गिरोह कथित तौर पर "लकड़ी की पॉलिश" के लेबल वाले कार्टन का इस्तेमाल करता था और शराब की बोतलों को लकड़ी के बुरादे से ढकी प्लास्टिक की बाल्टियों में भरकर पूर्वी राज्य बिहार भेजता था।
इस मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने कहा है कि संगठित अपराध की धाराओं के तहत इस गिरोह की जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, वजीरपुर औद्योगिक क्षेत्र (डब्ल्यूपीआईए) में एक लॉजिस्टिक कंपनी के फ्रेंचाइजी मालिक को बिहार के मुजफ्फरपुर ले जाने के लिए 33 कार्टन 17 मई को मिले और संदेह होने पर उन्होंने एक कार्टन की जांच की, जिसमें लकड़ी के बुरादे से ढकी प्लास्टिक की बाल्टियों के अंदर शराब की बोतलें छिपी हुई मिलीं। उत्तर पश्चिम दिल्ली की पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) आकांक्षा यादव ने बताया कि लकड़ी की पॉलिश के नाम पर अमित नामक व्यक्ति द्वारा कार्टन बुक किए गए थे और बाद में आरोपी ने अपना मोबाइल फोन कथित तौर पर बंद कर दिया, जिसके बाद लॉजिस्टिक कंपनी के संचालक ने पुलिस को सूचित किया।
उन्होंने बताया कि सभी 33 कार्टनों की जांच करने पर पुलिस ने कुल 2968 क्वार्टर बोतल अवैध शराब बरामद की, जिन पर "केवल यूटी चंडीगढ़ में बिक्री के लिए" अंकित था। शराब प्लास्टिक की 198 बाल्टियों में छिपाकर कार्टनों के अंदर पैक की गई थी।
डीसीपी ने बताया कि शराब को बिहार जैसे शराबबंदी वाले राज्य में भेजने के लिए अत्यंत चालाकी से छिपाया गया था ताकि जांच एजेंसियों को धोखा दिया जा सके।
इस संबंध में थाना अशोक विहार में दिल्ली आबकारी अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया और जांच के दौरान संगठित अपराध से संबंधित भारतीय न्याय संहिता की धारा 112 भी जोड़ी गई।
यादव के मुताबिक, इसके बाद पुलिस टीम ने छापेमारी करते हुए आरोपी को स्वरूप नगर स्थित उसके लकड़ी के गोदाम से गिरफ्तार किया, जिसका उपयोग अवैध शराब की खेपों की गुप्त पैकिंग के केंद्र के रूप में किया जा रहा था।
पुलिस ने बताया कि बादली औद्योगिक क्षेत्र का निवासी और मूल रूप से बिहार के रहने वाले अमित का आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
पुलिस को संदेह है कि माल को वैध वाणिज्यिक सामान के रूप में दिखाने के लिए फर्जी जीएसटी दस्तावेज तैयार किए गए थे, और जाली चालान और ई-वे बिल तैयार करने में शामिल अकाउंटेंट और अन्य सहयोगियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस ने बताया कि पूरी आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाने और अंतरराज्यीय शराब गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान करने के लिए जांच की जा रही है।
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