'जिहादी ड्रग' कैप्टागन बनाने की आरोपी देहरादून की फैक्टरी पंजीकृत नहीं है: उत्तराखंड एफडीए
जोहेब
- 18 May 2026, 10:56 PM
- Updated: 10:56 PM
देहरादून, 18 मई (भाषा) उत्तराखंड के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने सोमवार को कहा कि प्रतिबंधित सिंथेटिक ड्रग कैप्टागन बनाने में कथित रूप से शामिल देहरादून में स्थित फैक्टरी उसके आधिकारिक रिकॉर्ड में पंजीकृत नहीं है।
इससे पहले खबरें थीं कि सहसपुर क्षेत्र में स्थित 'ग्रीन हर्बल' फैक्टरी में 'जिहादी ड्रग' के नाम से चर्चित कैप्टागन का अवैध उत्पादन किया जा रहा था।
स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) ने 'ऑपरेशन रेजपिल' के तहत दिल्ली के नेब सराय इलाके से करीब 182 करोड़ रुपये मूल्य का कैप्टागन बरामद किया था, जिसके बाद इस अवैध इकाई का खुलासा हुआ।
एनसीबी ने सीरियाई नागरिक अलाब्रास अहमद को गिरफ्तार किया, जिसने पूछताछ के दौरान कथित तौर पर बताया कि नयी दिल्ली से बरामद ड्रग का एक हिस्सा नवंबर 2025 में देहरादून में स्थित फैक्टरी में तैयार किया गया था।
अधिकारियों ने रविवार को बताया था कि एनसीबी की टीम ने शनिवार रात फैक्टरी पर छापा मारा, जहां पर अत्याधुनिक मशीनें लगी मिलीं और रसायन, कैप्सूल तथा पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई।
उन्होंने यह भी बताया कि फैक्टरी मालिक पहले दो मादक पदार्थ मामलों में भी शामिल पाया गया है, जिनकी जांच एनसीबी और उत्तराखंड पुलिस कर रही है।
एफडीए के अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने सोमवार को जारी बयान में कहा, "संस्थान को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत कोई विनिर्माण लाइसेंस जारी नहीं किया गया था और न ही भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के तहत किसी प्रकार की अनुमति दी गई थी।"
उन्होंने कहा कि यह मामला स्वापक ओषधि और मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत प्रतिबंधित और नियंत्रित पदार्थों से जुड़ा है और ऐसे पदार्थों का नियमन राज्य एफडीए के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं और राज्य सरकार इससे जुड़ी सूचनाओं को गंभीरता से ले रही है।
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर एफडीए स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय करके आवश्यक कार्रवाई करेगा।
अधिकारियों के अनुसार, कैप्टागन एक कृत्रिम मनोप्रभावी मादक पदार्थ है। आतंकवादी संगठन और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी नेटवर्क इसका इस्तेमाल संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में करते हैं।
उन्होंने बताया कि यह ड्रग लंबे समय तक जागे रहने, भय कम करने और अत्यधिक शारीरिक सक्रियता बनाए रखने के लिए इस्तेमाल की जाती है।
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