महापंजीयक न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ स्वत: अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं कर सकते : शीर्ष अदालत
दिलीप
- 18 May 2026, 09:51 PM
- Updated: 09:51 PM
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि किसी उच्च न्यायालय के महा पंजीयक न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू नहीं कर सकते, जब तक कि उन्हें मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की किसी समिति द्वारा अधिकृत नहीं किया जाए।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि जब तक अनुशासनात्मक कार्यवाही को उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीशों की समिति द्वारा अनुमोदित नहीं किया जाता, तब तक ऐसी कार्रवाई अवैध होगी।
पीठ ने ये टिप्पणियां उत्तराखंड उच्च न्यायालय के प्रशासनिक पक्ष द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कीं, जिसमें उच्च न्यायालय की खंडपीठ के जनवरी 2026 के एक फैसले को चुनौती दी गई थी।
उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने एक महिला न्यायिक अधिकारी को सेवा से बर्खास्त करने की सजा को रद्द कर दिया था।
महिला न्यायिक अधिकारी पर एक नाबालिग लड़की के साथ शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक दुर्व्यवहार करने और उसे घरेलू सहायिका बनाने के आरोपों की जांच चल रही थी।
उच्चतम न्यायालय ने कहा, "हमें यह जानकर बेहद हैरानी हुई कि जांच की कार्यवाही उच्च न्यायालय के महापंजीयक द्वारा शुरू की गई थी, जिन्होंने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों वाली अनुशासनात्मक समिति से कोई आदेश प्राप्त नहीं किया था।"
पीठ ने गौर किया कि महिला न्यायिक अधिकारी को उच्च न्यायालय की खंडपीठ के आदेशानुसार पहले ही बहाल कर दिया गया था।
पीठ ने उच्च न्यायालय की ओर से पेश वकील से पूछा, "क्या सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का कोई आदेश था?"
जब वकील ने कहा कि इस संबंध में मुख्य न्यायाधीश से कोई लिखित निर्देश नहीं था, तो उच्चतम न्यायालय ने कहा, "तब तो यह बहुत ही गंभीर मामला है। यह महापंजीयक द्वारा अधिकार का दुरुपयोग है।"
उच्चतम न्यायालय ने कहा कि सजा देने का प्रश्न तभी उठता है, जब जांच सक्षम प्राधिकारी द्वारा शुरू की गई हो।
उसने कहा, "उच्च न्यायालय के महापंजीयक को किसी न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध स्वतः अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने का कोई अधिकार नहीं है...। वह केवल मुख्य न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की ओर से ही कार्रवाई कर सकते हैं।"
भाषा अविनाश दिलीप
दिलीप
1805 2151 दिल्ली