गांवों में नल से जल की अपूर्ति का दायरा बढ़ाने के लिए बंगाल ने केंद्र के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए
संतोष
- 18 May 2026, 08:29 PM
- Updated: 08:29 PM
कोलकाता, 18 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए, ताकि 'जल जीवन मिशन' के तहत ग्रामीण घरों में नल से जल की आपूर्ति करने के दायरे को बढ़ाने में तेजी लाई जा सके।
केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने कहा कि पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान इस योजना में देरी, धनराशि के कम उपयोग और क्रियान्वयन में खामियां रही हैं। वहीं मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि "डबल इंजन सरकार" राज्य में स्पष्ट बदलाव लाने के लिए काम कर रही है।
यह एमओयू एक कार्यक्रम के दौरान हुआ, जिसमें पाटिल, जल शक्ति राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और वरिष्ठ अधिकारी डिजिटल तरीके से शामिल हुए।
मुख्यमंत्री ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि बंगाल के लोग लंबे समय से इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का इंतजार कर रहे थे और पूर्ववर्ती वर्षों में जमीनी स्तर पर इसकी सीमित प्रगति हुई।
मुख्यमंत्री अधिकारी ने कहा कि पिछली विधानसभा में विपक्ष के नेता रहते हुए उन्होंने कई गांवों का दौरा किया था और पाया कि योजना का अधिकतर काम सिर्फ कागजों पर ही था।
उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन के दूसरे चरण के तहत 39,000 करोड़ रुपये के समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसका लक्ष्य घर-घर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है।
मुख्यमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए केंद्र से अधिक सहायता की भी मांग की और कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति के कारण बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा कार्य बिना केंद्र की मदद के संभव नहीं है।
इससे पहले केंद्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि यह एमओयू जल जीवन मिशन के तहत पारदर्शिता और समय पर सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने पश्चिम बंगाल में इसके क्रियान्वयन की गति पर चिंता जताते हुए कहा कि ग्रामीण घरों में नल जल कवरेज 2019 में एक प्रतिशत से बढ़कर अब 56 प्रतिशत हो गया है, लेकिन स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों में जल आपूर्ति के मामले में राज्य राष्ट्रीय औसत से पीछे है।
उन्होंने दावा किया कि पश्चिम बंगाल को इस योजना के तहत 33,363 करोड़ रुपये मिले हैं, जिनमें से 13,000 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं, जबकि 11,670 करोड़ रुपये अब भी उपयोग नहीं हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने राज्य सरकार से गंगा किनारे मलजल शोधन संयंत्र के लिए भूमि आवंटन तेज करने और मानसून से पहले वर्षा जल संचयन को बढ़ाने की भी अपील की।
पाटिल ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस एमओयू को मंजूरी दी है, जिससे इसका क्रियान्वयन अनिवार्य हो गया है।
केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन-2 की शुरुआत 2026 में की थी, जिसका कुल परिव्यय 1.69 लाख करोड़ रुपये है और यह दिसंबर 2028 तक चलेगा।
भाषा अमित संतोष
संतोष
1805 2029 कोलकाता