'अपमानजनक' टिप्पणी के लिए रमेश ने प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया
नरेश
- 18 May 2026, 03:45 PM
- Updated: 03:45 PM
नयी दिल्ली, 18 मई (भाषा) राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने सोमवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया और आरोप लगाया कि प्रधान ने हाल ही में एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी टिप्पणियों से संसद की मर्यादा पर आघात किया है।
राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन को भेजे गए अपने नोटिस में रमेश ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी' रद्द होने के बाद 15 मई को एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान प्रधान ने शिक्षा संबंधी संसद की स्थायी समिति के खिलाफ कुछ ''अपमानजनक'' टिप्पणियां कीं, जो "संसद के प्रति उनकी अवमानना को प्रकट करती हैं।''
कांग्रेस नेता ने 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''मैंने संसद और संसदीय समितियों की गरिमा को कम करने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री के खिलाफ राज्यों की परिषद में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के नियम 187 के तहत विशेषाधिकार के प्रश्न का नोटिस दिया है।''
रमेश ने, "उन्होंने उस शिक्षा मंत्रालय के मुखिया के तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की है जो देश भर में लाखों युवाओं के भविष्य को नष्ट कर रहा है।''
उन्होंने राधाकृष्णन को भेजे गए विशेषाधिकार नोटिस की एक प्रति भी साझा की।
उन्होंने अपने नोटिस में कहा, ''15 मई, 2026 को, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में धर्मेंद्र प्रधान ने नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के मुद्दे पर नई दिल्ली में एक आधिकारिक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इसमें पत्रकारों ने प्रधान से पूछा कि उनके मंत्रालय ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) पर शिक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की सिफारिशों को क्यों लागू नहीं किया है?''
रमेश का कहना था, ''इस प्रश्न पर मंत्री ने इस प्रकार उत्तर दिया- ''मैं संसद की स्थायी समिति पर टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं विशेषज्ञों की उच्च-स्तरीय समिति (एचएलसीई)/राधाकृष्णन समिति के बारे में बोलूंगा। संसद की स्थायी समिति में विपक्ष के सदस्य हैं। वे चीजों को एक निश्चित तरीके से लिखते हैं, आप भी यह जानते हैं। इसलिए, मैं स्थायी समिति पर नहीं बोलूंगा।''
उन्होंने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री की ये टिप्पणियां ''अपमानजनक'' हैं।
रमेश ने कहा, ''वह सांसदों, संसदीय समितियों और भारत की संसद को बदनाम करना चाहते हैं। संसदीय समितियां भारत की संसद का विस्तारित हिस्सा हैं और उन्हें 'मिनी-संसद' कहा जाता है। इसलिए, विधायिका और उसकी संसदीय समितियों के प्रति कार्यपालिका की जवाबदेही भारत की लोकतांत्रिक राजनीति का एक मौलिक सिद्धांत है।''
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''मंत्री की विवादित टिप्पणियां स्पष्ट रूप से संसद, संसदीय समितियों, सभी राजनीतिक दलों से आए संसदीय समिति के सदस्यों और भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के प्रति उनकी अवमानना को दर्शाती हैं।''
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हक नरेश
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1805 1545 दिल्ली