बीकेएस ने दलहन और तिलहन की 100 प्रतिशत खरीद की मांग की
नेत्रपाल
- 17 May 2026, 08:42 PM
- Updated: 08:42 PM
नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) भारतीय किसान संघ (बीकेएस) ने दलहन और तिलहन की खरीद 100 प्रतिशत करने, फसल विविधीकरण के लिए प्रत्यक्ष प्रोत्साहन और खेती तथा फसल विकास में आधुनिक 'जीन-एडिटिंग' उपकरणों के उपयोग पर पूरी तरह प्रतिबंधन लगाने की मांग की।
राजस्थान के माउंट आबू में 16-17 मई को आयोजित बीकेएस की दो दिवसीय कार्यकारी समिति की बैठक के बाद ये मांगें उठाईं गईं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से संबद्ध संगठन ने एक बयान में कहा कि आजादी के 78 साल बाद भी दालों और खाद्य तेलों के आयात पर भारत की निर्भरता देश की खाद्य सुरक्षा तथा संप्रभुता से जुड़ा एक गंभीर चिंता का विषय है।
किसान संगठन ने केंद्र से दलहन, तिलहन और खाद्य तेल उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए एक ''व्यापक और व्यावहारिक'' नीतिगत ढांचा अपनाने का आग्रह किया।
बीकेएस के महासचिव मोहिनी मोहन मिश्रा ने कहा कि प्रचलित एकल फसल प्रणाली जैव विविधता, खाद्य विविधता और जलवायु स्थिरता के लिए हानिकारक है।
उन्होंने मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित करने और किसानों के लिए लागत को कम करने के लिए 'गौ कृषि वाणिज्य' को बढ़ावा देने के साथ-साथ अंतरफसल, मिश्रित खेती और फसल चक्र के माध्यम से फसल विविधीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बीकेएस ने दलहन और तिलहन की सभी फसलों की 100 प्रतिशत खरीद की गारंटी की मांग की। उन्होंने दावा किया कि 2016 में दालों की सीमित खरीद से भी उत्पादन में तीव्र वृद्धि हुई थी।
इसमें मृदा संरक्षण पद्धतियों, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों और फसल विविधीकरण को अपनाने वाले किसानों के लिए प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन की भी मांग की गई।
बीकेएस ने किसानों को बार-बार महंगे बीज खरीदने से बचाने के लिए स्वदेशी बीजों और पारंपरिक प्रजनन विधियों के माध्यम से विकसित उन्नत किस्मों के संरक्षण तथा संवर्धन का भी आह्वान किया।
संगठन ने कहा, ''किसानों को हर साल महंगे बीज खरीदने के चक्र से बचाने के लिए, सरकार को स्वदेशी बीजों के संरक्षण और विकास तथा पारंपरिक प्रजनन विधियों के माध्यम से विकसित उन्नत किस्मों को बढ़ावा देना चाहिए।''
बीकेएस ने फसल सुधार उपायों के हिस्से के रूप में संसदीय स्थायी समिति द्वारा प्रस्तावित जीन-एडिटिंग (सीआरआईएसपीआर) आधारित प्रणाली का कड़ा विरोध किया और मांग की कि इसे रिपोर्ट से हटा दिया जाए।
भाषा यासिर नेत्रपाल
नेत्रपाल
1705 2042 दिल्ली