असम के मुख्यमंत्री ने संकटग्रस्त हूलॉक गिब्बन का कैनोपी पुल पार करने का वीडियो साझा किया
दिलीप
- 15 May 2026, 08:19 PM
- Updated: 08:19 PM
गुवाहाटी/नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में पाया गया संकटग्रस्त प्राइमेट (वानर) हूलॉक गिब्बन रेलवे पटरी को सुरक्षित तरीके से पार करने के लिए उसके ऊपर बनाए गए विशेष कैनोपी पुल का अब उपयोग कर रहा है।
शर्मा ने कहा कि यह इस बात को अच्छी तरह प्रदर्शित करता है कि संरक्षण में विज्ञान किस तरह मदद कर सकता है, वहीं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि विज्ञान-आधारित छोटे स्तर के प्रयास भी जैव विविधता संरक्षण में बहुत सहायक हो सकते हैं।
शर्मा ने जोरहाट जिले के होलोंगापार गिब्बन वन्यजीव अभयारण्य में हूलॉक गिब्बन वानर द्वारा एक रेलवे पटरी को जालीदार कैनोपी पुल के माध्यम से पार किए जाने का वीडियो 'एक्स' पर साझा किया है।
कैनोपी पुल पेड़ों के शीर्ष भागों को जोड़ने वाले कृत्रिम या प्राकृतिक मार्ग होते हैं। वन्यजीव संरक्षण के उद्देश्य से बनाए गए ये ढांचे वृक्षों पर रहने वाले जीवों को सड़कों या रेलवे पटरियों को सुरक्षित रूप से पार करने में मदद करते हैं, जिससे आधारभूत संरचना का विकास भी हो सके और पर्यावरण तथा वन्यजीवों पर उसका प्रभाव न्यूनतम रहे।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसे तकनीक से संरक्षण की संज्ञा देते हुए 'एक्स' पर लिखा, ''यह देखकर अच्छा लगा कि असम से गुजरने वाले रेलवे मार्ग पर बनाए गए इन कैनोपी पुल का इस्तेमाल अब हूलॉक गिब्बन करने लगे हैं। इससे यह सिद्ध होता है कि विज्ञान-आधारित छोटे स्तर के प्रयास भी जैव विविधता संरक्षण में बहुत सहायक हो सकते हैं।''
शर्मा ने पोस्ट में लिखा, ''होलोंगापार से एक सुखद क्षण। पेड़ों के बीच कैनोपी का पुल बनाने के एक साल बाद एक हूलॉक गिब्बन अब इसका इस्तेमाल रेलवे पटरी को सुरक्षित तरीके से पार करने के लिए कर रहा है।''
उन्होंने कहा, ''एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण उदाहरण, जो दिखाता है कि विज्ञान किस तरह संरक्षण में वास्तविक तरीके से बदलाव लाने के लिए हस्तक्षेप कर सकता है।''
भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) के एक बयान के अनुसार, यह असम के अभयारण्य में किसी हूलॉक गिब्बन द्वारा कैनोपी के पुल को पार करने का पहला पुष्ट मामला है और यह दुनिया में कहीं भी किसी रेल मार्ग के ऊपर कैनोपी पुल के इस्तेमाल का भी अब तक दर्ज पहला मामला है।
हूलॉक गिब्बन भारत की एकमात्र वानर (एप) प्रजाति है, जिसका मुख्य पर्यावास क्षेत्र असम में, विशेष रूप से जोरहाट स्थित वन्यजीव अभयारण्य में है।
विश्व वन्यजीव कोष की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में, ये ब्रह्मपुत्र के दक्षिण और दिबांग नदी के पूर्व के बीच सभी उत्तर-पूर्वी राज्यों में पाए जाते हैं।
भारत के बाहर, वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन पूर्वी बांग्लादेश और उत्तर-पश्चिम म्यांमा में पाए जाते हैं।
असम सरकार ने पिछले वर्ष कहा था कि सड़कों और रेलवे पटरियों के ऊपर प्रमुख पारगमन स्थलों पर हूलॉक गिब्बन, गोल्डन लंगूर और अन्य प्राइमेट के सुरक्षित आवागमन के लिए सुरक्षा जालों से युक्त वैज्ञानिक रूप से डिजाइन किए गए मजबूत कैनोपी पुल लगाए जाएंगे, जिससे वन्यजीवों के लिए जोखिम कम होगा।''
वेस्टर्न हूलॉक गिब्बन भारत की अकेली वानर प्रजाति है, और इसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) की 'रेड लिस्ट' में संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।
भाषा वैभव दिलीप
दिलीप
1505 2019 गुवाहाटी