अमेरिका में अदाणी पर कानूनी दबाव घटने के संकेत, कई जांचों के समाधान के करीब
मनीषा
- 15 May 2026, 02:19 PM
- Updated: 02:19 PM
न्यूयॉर्क/नयी दिल्ली, 15 मई (भाषा) उद्योगपति गौतम अदाणी अमेरिका में जारी कई कानूनी जांचों के व्यापक समाधान के करीब हैं। इस क्रम में अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग ने अपने दीवानी मामले का निपटारा कर लिया है जबकि न्याय विभाग एवं कोषागार विभाग आने वाले दिनों में समानांतर जांचों को समाप्त कर सकते हैं। मामले से अवगत लोगों ने यह जानकारी दी।
अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (एसईसी) ने बृहस्पतिवार को गौतम अदाणी और उनके भतीजे सागर अदाणी के खिलाफ निवेशकों को किए गए खुलासों से जुड़े दीवानी आरोपों का निपटारा किया, जो भारत में सौर ऊर्जा परियोजनाओं से संबंधित थे।
अदालत के अभिलेखों के अनुसार, गौतम अदाणी ने छह लाख डॉलर और सागर अदाणी ने 1.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान करने पर सहमति जताई है लेकिन बिना किसी दोष को स्वीकार या अस्वीकार किए।
इसके बाद अमेरिकी न्याय विभाग (डीओजे) दोनों के खिलाफ आपराधिक आरोप हटाने की तैयारी कर रहा है। यह कदम अभियोजकों और सुलिवन एंड क्रॉमवेल के वरिष्ठ भागीदार तथा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकीलों में से एक रॉबर्ट जे जिउफ्रा जूनियर के नेतृत्व वाले व्यापक कानूनी दल के बीच कई महीनों की बातचीत के बाद उठाया जा रहा है।
नवंबर 2024 में अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग द्वारा दायर मामले और अमेरिकी न्याय विभाग की आपराधिक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि अदाणी समूह ने भारतीय अधिकारियों को 26.5 करोड़ डॉलर की रिश्वत देने की योजना बनाई, ताकि सौर ऊर्जा अनुबंध हासिल किए जा सकें। साथ ही धन जुटाते समय इस योजना को अमेरिकी निवेशकों और बैंकों से छिपाया गया।
अभियोजकों ने अदाणी पर प्रतिभूति धोखाधड़ी और 'वायर' धोखाधड़ी के तहत आरोप लगाए थे। हालांकि उन्हें अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए विदेशी भ्रष्ट आचरण अधिनियम (एफसीपीए) के तहत रिश्वतखोरी के अधिक गंभीर आरोपों में नामित नहीं किया गया था।
गौतम अदाणी अदाणी समूह के चेयरमैन और सागर अदाणी, अदाणी ग्रीन एनर्जी में कार्यकारी निदेशक हैं।
अदाणी समूह ने लगातार किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया और कहा कि वह मजबूत शासन और अनुपालन मानकों का पालन करता है।
प्रस्तावित समझौता कई महीनों की बातचीत के बाद हुआ है जिसमें अदाणी की ओर से सुलिवन एंड क्रॉमवेल, निक्सन पीबॉडी, हेकर फिंक, नॉर्टन रोज फुलब्राइट और ब्रेसवेल जैसी विधि कंपनियों के वकील शामिल थे। उन्होंने तर्क दिया कि अभियोजकों के पास मामले को आगे बढ़ाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य और अधिकार क्षेत्र नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, मामले को ''पूर्वाग्रह सहित'' खारिज किए जाने की संभावना है जिससे इसे दोबारा खोला नहीं जा सकेगा।
इस मामले ने कानूनी विशेषज्ञों के बीच यह बहस भी छेड़ी कि क्या अमेरिकी अभियोजकों ने मुख्य रूप से भारत में केंद्रित गतिविधियों पर कार्रवाई करने के लिए प्रतिभूति कानूनों का अत्यधिक विस्तार किया।
पूर्व अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग आयुक्त लौरा उंगर ने सरकार के दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए कहा कि अभियोजकों ने पर्याप्त अधिकार क्षेत्र के बिना '' रिश्वतखोरी के आरोपों को प्रतिभूति धोखाधड़ी के मामले में जबरन शामिल करने'' की कोशिश की।
कोषागार विभाग की अलग से एक जांच भी समाधान के करीब है जो ईरान से जुड़े संभावित प्रतिबंध उल्लंघन से संबंधित है। यह मामला समूह से जुड़े एक जहाज द्वारा ईरानी एलपीजी के आयात से संबंधित है और विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) के साथ स्वैच्छिक खुलासे और सहयोग के बाद समझौते के जरिए सुलझने की संभावना है। इसमें भी बिना दोष स्वीकार किए वित्तीय दंड शामिल होने की उम्मीद है।
यदि ये समाधान अंतिम रूप लेते हैं, तो समूह पर कानूनी दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। जांच के बावजूद समूह ने अवसंरचना, बंदरगाह, परिवहन और ऊर्जा क्षेत्रों में विस्तार जारी रखा है।
अदाणी के वकीलों ने कहा कि कथित रिश्वतखोरी योजना के समर्थन में कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है।
उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग के पास दोनों के खिलाफ आवश्यक अधिकार क्षेत्र नहीं था और मामले के आधार में बताए गए कथित गलत बयानों पर कार्रवाई नहीं की जा सकती थी।
अदाणी समूह का कारोबार हरित ऊर्जा, बंदरगाह, रियल एस्टेट, खनन और समाचार मीडिया तक फैला है। यह आरोप लगाए जाने के बाद भी समूह ब्लैकरॉक सहित वैश्विक निवेशकों से धन जुटाता रहा है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा
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