ईंधन मूल्य वृद्धि: माल ढुलाई लागत में लगभग तीन प्रतिशत वृद्धि का अनुमान
गोला
- 15 May 2026, 11:25 AM
- Updated: 11:25 AM
कोलकाता, 15 मई (भाषा) पश्चिम बंगाल के परिवहन संचालकों ने शुक्रवार को कहा कि ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि से माल ढुलाई की कुल लागत में लगभग तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि व्यापारी उत्पादों के मूल्यों में बेतहाशा वृद्धि न कर सकें।
देश के चार प्रमुख महानगरों में कोलकाता में ईंधन की कीमतों में सर्वाधिक वृद्धि देखी गई, जहां पेट्रोल के दाम 3.29 रुपये बढ़कर 108.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल 3.11 रुपये बढ़कर 95.13 रुपये प्रति लीटर हो गया।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत तीन रुपये बढ़कर 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। मुंबई में अब पेट्रोल की कीमत 106.68 रुपये और डीजल 93.14 रुपये प्रति लीटर है, जबकि चेन्नई में पेट्रोल के दाम बढ़कर 103.67 रुपये और डीजल 95.25 रुपये प्रति लीटर हो गए।
विभिन्न राज्यों में मूल्य वर्धित कर (वैट) की दरों में भिन्नता के कारण ये कीमतें अलग-अलग होती हैं।
'ऑल इंडिया ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन' के संयुक्त सचिव सुनील अग्रवाल ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए यह वृद्धि "पूरी तरह अपेक्षित" थी।
उन्होंने अनुमान जताया कि "इस वृद्धि का माल ढुलाई की लागत पर लगभग तीन प्रतिशत प्रभाव पड़ेगा।"
अग्रवाल ने कहा, "कुल परिवहन लागत पर इसका प्रभाव आंशिक होगा। हालांकि, सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि की आड़ में व्यापारी उत्पादों के दाम असंगत रूप से न बढ़ाएं।"
अग्रवाल ने यह भी कहा कि ट्रक संचालक पहले से ही वित्तीय दबाव में हैं, अतः राज्य सरकारें स्थानीय करों में कटौती कर इस बोझ को कम कर सकती हैं।
'वेस्ट बंगाल ऑनलाइन ऐप कैब गिल्ड' के महासचिव इंद्रनील बनर्जी ने कहा कि इस वृद्धि से संचालकों पर प्रतिदिन लगभग 50-60 रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि ईंधन की कीमतों में वृद्धि के प्रभाव को निष्प्रभावी करने के लिए राज्य करों को कम करने की संभावनाओं पर विचार किया जाए।
पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रारंभ से वैश्विक ऊर्जा दरों में हुई भारी वृद्धि की तुलना में यह बढ़ोतरी आवश्यक वृद्धि का मात्र दसवां हिस्सा है।
सूत्रों ने बताया कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों ने लागत बढ़ने के बावजूद 11 सप्ताह तक कीमतों में कोई परिवर्तन नहीं किया था, लेकिन जब परिचालन आर्थिक रूप से वहनीय नहीं रह गया, तो इस वृद्धि का कुछ हिस्सा उपभोक्ताओं पर डालना पड़ा। भाषा
सुमित गोला
गोला
1505 1125 कोलकाता