न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता ने 'अपमानजनक' पोस्ट को लेकर 'आप' नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की
प्रशांत
- 14 May 2026, 11:35 PM
- Updated: 11:35 PM
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायाधीश न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने बृहस्पतिवार को आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, दुर्गेश पाठक, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और अन्य के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की।
यह कार्यवाही आबकारी नीति मामले से जुड़ी सुनवाई को लेकर सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित अपमानजनक पोस्ट किए जाने के संबंध में शुरू की गई है।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कानूनी उपायों का सहारा लेने के बजाय उन्हें बदनाम करने के इरादे से सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित अभियान चलाया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी आरोपियों को आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ सीबीआई की याचिका पर अब दूसरी पीठ सुनवाई करेगी।
आज शाम अदालत में एक घंटे से अधिक समय तक चली सुनवाई में, उन्होंने आम आदमी पार्टी के दुर्गेश पाठक और विनय मिश्रा तथा एक 'एक्स' उपयोगकर्ता के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही भी शुरू की।
न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा, "यह न्यायालय संतुष्ट है कि प्रस्तावित अवमाननाकर्ताओं के कृत्य प्रथम दृष्टया न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 के अर्थ में आपराधिक अवमानना के अंतर्गत आते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य न्यायालय को बदनाम करना, न्याय संस्था के अधिकार को कम करना, न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप करना और न्यायिक कार्यों के स्वतंत्र अभ्यास को भयभीत करना था।"
न्यायाधीश ने अवमानना के आरोपियों द्वारा सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्ट पर आपत्ति जताई, जिनमें उन पर ''राजनीतिक निष्ठा'' का आरोप लगाया गया था और वाराणसी के एक शैक्षणिक संस्थान में दिए गए उनके भाषण के ''संपादित'' वीडियो को पोस्ट करके कथित तौर पर उन्हें निशाना बनाया गया था।
उन्होंने कहा कि 'आप' के नेताओं ने जानबूझकर उन्हें "डराने" का विकल्प चुना और 'सोच समझकर' चलाए गए अपने इस अभियान में उनके बच्चों को भी शामिल किया, जिनका इस मामले से कोई संबंध नहीं था।
इसी संबंध में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा है। पार्टी के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ऐसे अभियानों, संपादित वीडियो और अपमानजनक सामग्री के माध्यम से एक मौजूदा न्यायाधीश को निशाना बनाना न्यायिक स्वतंत्रता की नींव पर ही प्रहार है।
उन्होंने कहा, " केजरीवाल और 'आप' ने एक खतरनाक सीमा पार कर दी है। अगर मुवक्किल अपने पक्ष में फैसला न आने पर न्यायाधीशों पर दबाव डालने, उन्हें डराने-धमकाने या सार्वजनिक रूप से उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की कोशिश करते हैं, तो संस्थाएं काम नहीं कर सकतीं।"
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि एक वीडियो पोस्ट में कहा, "यह आम आदमी पार्टी नहीं, 'अराजकतावादी आदमी पार्टी' है। केजरीवाल ने न्यायपालिका और एक महिला न्यायाधीश के खिलाफ अपमानजनक और मानहानिकारक टिप्पणी करके सारी हदें पार कर दीं।"
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