थोक मुद्रास्फीति में जबर्दस्त उछाल, अप्रैल में 42 माह के उच्चस्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंची
अजय
- 14 May 2026, 03:32 PM
- Updated: 03:32 PM
नयी दिल्ली, 14 मई (भाषा) पश्चिम एशिया संकट से ईंधन, बिजली एवं कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में तेज वृद्धि के कारण अप्रैल में थोक मुद्रास्फीति सालाना आधार पर पांच प्रतिशत बढ़कर 42 महीने के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई।
थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति मार्च में 3.88 प्रतिशत थी।
वैश्विक ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज के अनुसार, थोक मुद्रास्फीति में क्रमिक वृद्धि इस श्रृंखला में अब तक की सबसे अधिक रही है।
वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र वृद्धि ने मुख्य मुद्रास्फीति दर में उछाल आया। धातुओं, रसायनों और वस्त्रों की विनिर्माण लागत में वृद्धि के कारण मुख्य थोक मुद्रास्फीति सालाना आधार पर पांच प्रतिशत तक बढ़ गई।
पश्चिम एशिया युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में अवरोध ने भारत में कच्चे पेट्रोलियम के आयात को बाधित कर दिया है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि ने ईंधन आयात को महंगा बना दिया है।
मंत्रालय ने बयान में कहा, '' अप्रैल, 2026 में मुद्रास्फीति खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, मूल धातु, अन्य विनिर्माण और गैर-खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण अधिक रही।''
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, खाद्य पदार्थों में मुद्रास्फीति दर अप्रैल में 1.98 प्रतिशत रही जबकि मार्च में यह 1.90 प्रतिशत थी। गैर-खाद्य पदार्थों में मुद्रास्फीति अप्रैल में बढ़कर 12.18 प्रतिशत हो गई जो पिछले महीने 11.5 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों में मुद्रास्फीति अप्रैल में 4.62 प्रतिशत रही जबकि पिछले महीने यह 3.39 प्रतिशत थी।
ईंधन और बिजली श्रेणी में, एलपीजी में मुद्रास्फीति दर अप्रैल में 10.92 प्रतिशत रही। पेट्रोल में महंगाई दर 32.40 प्रतिशत रही, जो पिछले महीने 2.50 प्रतिशत थी। डीजल में महंगाई दर अप्रैल में 25.19 प्रतिशत रही जबकि मार्च में यह 3.26 प्रतिशत थी।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि के बावजूद सरकार ने अब तक पेट्रोल और घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखा है ताकि उपभोक्ताओं को कीमतों में बढ़ोतरी के असर से बचाया जा सके।
वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हालांकि वृद्धि की गई है। इसका असर अप्रैल में खुदरा मुद्रास्फीति की 3.48 प्रतिशत की दर में स्पष्ट नजर आया।
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि मुख्य मुद्रास्फीति के मई, 2026 में बढ़कर नौ प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह उच्च ऊर्जा कीमतों का धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था पर असर डालना और उसका इस्तेमाल करने वाले क्षेत्रों यानी विनिर्माण क्षेत्र पर इसका प्रभाव पड़ना है।
उन्होंने कहा कि थोक मुद्रास्फीति के अधिक रहने के आसार हैं क्योंकि इसमें ईंधन का हिस्सा ज्यादा होता है। साथ ही उपभोक्ताओं तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर धीरे-धीरे पहुंच रहा है, क्योंकि अब तक सरकार एवं पेट्रोलियम विपणन कंपनियों ने उसका बड़ा हिस्सा खुद वहन किया है।
बजाज ब्रोकिंग के बुनियादी विश्लेषक शाश्वत सिंह ने कहा कि बढ़ती लॉजिस्टिक लागत, माल ढुलाई और जिंस कीमतों का असर अब धीरे-धीरे थोक महंगाई में दिखाई देने लगा है। इसका असर आगे उपभोक्ता मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है।
बार्कलेज के अनुसार, मई में पेट्रोल और डीजल दोनों की कीमतों में जल्द पांच रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की जा सकती है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें अब भी ऊंची बनी हुई हैं। साथ ही ऐसा लगता है कि मौद्रिक नीति समिति आपूर्ति झटके से बढ़ी महंगाई को नजरअंदाज करेगी और 2026 के बाकी समय में नीतिगत दर रेपो में कोई बदलाव नहीं करेगी।
भाषा निहारिका अजय
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