देश की अर्थव्यवस्था में 2030 तक 500 अरब डॉलर का योगदान देगा एआई : रिपोर्ट
अजय
- 13 May 2026, 05:26 PM
- Updated: 05:26 PM
नयी दिल्ली, 13 मई (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) में 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 500 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक योगदान देने की क्षमता है। यह जानकारी आईबीएम और इंडियाएआई की संयुक्त रिपोर्ट में दी गई।
'फ्रॉम प्रॉमिस टू पावर: हाउ एआई इज रीडिफाइनिंग इंडियाज इकॉनमिक फ्यूचर' शीर्षक वाली यह रिपोर्ट विभिन्न उद्योगों एवं संगठनों के 1,500 भारतीय अधिकारियों के सर्वेक्षण और 405 भारतीय अधिकारियों के साथ किए गए एक त्वरित सर्वेक्षण पर आधारित है।
रिपोर्ट में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल 80 प्रतिशत भारतीय कारोबारी प्रमुखों का मानना है कि एआई में निवेश देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि को सीधे प्रभावित करेगा।
रिपोर्ट में कहा गया, '' एआई 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था में 500 अरब डॉलर से अधिक (करीब 47.81 लाख करोड़ रुपये) का योगदान कर सकता है, जिससे देश दुनिया की सबसे गतिशील एआई-चालित अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो सकता है। बहुत कम देश भारत जैसे पैमाने, डिजिटल क्षमता एवं महत्वाकांक्षा के साथ एआई युग में प्रवेश कर रहे हैं।''
रिपोर्ट के अनुसार, करीब 73 प्रतिशत भारतीय अधिकारियों का मानना है कि 2030 तक भारत एआई क्षेत्र में अग्रणी देश होगा। यह भरोसा बड़े बाजार, अग्रणी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना एवं दुनिया के सबसे बड़े आईटी सेवा कार्यबल पर आधारित है। वर्तमान में केवल 15 प्रतिशत संगठन विभिन्न विभागों में निवेश के जरिये एआई को बड़े पैमाने पर लागू कर रहे हैं जबकि 85 प्रतिशत अभी शुरुआती चरण में ही हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि भारत अब केवल वैश्विक एआई चर्चा में भाग नहीं ले रहा, बल्कि उसे आकार भी दे रहा है।
उन्होंने कहा, '' हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है। एआई को लोगों की आकांक्षाओं का विस्तार करने वाला माध्यम बनना चाहिए जो समावेशी विकास एवं राष्ट्रीय प्रगति को आगे बढ़ाए। विकसित भारत के हमारे दृष्टिकोण के तहत हम विश्वास, नैतिकता और राष्ट्रीय संप्रभुता पर आधारित मानव-केंद्रित एआई दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहे हैं।''
आईबीएम इंडिया एवं दक्षिण एशिया के प्रबंध निदेशक संदीप पटेल ने कहा कि एआई भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सबसे शक्तिशाली विकास इंजन में से एक बन सकता है।
उन्होंने कहा, '' भारत को अलग बनाने वाली बात केवल अपनाने का पैमाना नहीं होगी, बल्कि यह भी होगा कि संगठन मजबूत डेटा आधार, 'हाइब्रिड आर्किटेक्चर' और एआई के साथ काम करने में सक्षम कार्यबल के साथ विश्वसनीय एआई प्रणालियां कैसे विकसित करते हैं। कौशल, शासन एवं अवसंरचना में सही निवेश के साथ भारत एआई महत्वाकांक्षा को स्थायी आर्थिक प्रभाव में बदल सकता है।''
भाषा निहारिका अजय
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