विदेशों में 'डेस्टिनेशन वेडिंग' से बचें, ऑनलाइन स्कूल कक्षाओं का विकल्प चुनें: प्रधानमंत्री मोदी
संतोष
- 12 May 2026, 12:08 AM
- Updated: 12:08 AM
(फोटो के साथ)
वडोदरा, 11 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक व्यवधानों के मद्देनजर बचत के अपने प्रयासों को और तेज करते हुए सोमवार को लोगों से विदेशों में जाकर विवाह करने के चलन 'डेस्टिनेशन वेडिंग' से बचने और खाद्य तेलों की खपत कम करने की अपील की। साथ ही, उन्होंने स्कूली छात्रों के लिए अस्थायी ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों का अधिक उपयोग करने की अपनी अपील को दोहराया और लोगों से इस संकट को देखते हुए सोने की खरीद कुछ समय के लिए टालने की अपील की, जिसने बड़े पैमाने पर वैश्विक व्यवधान पैदा किए हैं।
पश्चिम एशिया में नाजुक युद्धविराम कायम रहने के बीच मोदी ने लोगों से अपील की कि वे विदेश यात्रा सीमित करें और जहां तक संभव हो घर से काम करने का विकल्प चुनें, जिस व्यवस्था को महामारी के दौरान अपनाया गया था। पश्चिम एशिया ऐसा क्षेत्र है जिस पर भारत कच्चे तेल और गैस के आयात के लिए काफी हद तक निर्भर है।
पाटीदार समुदाय द्वारा निर्मित सरदार धाम छात्रावास का उद्घाटन करने के बाद वडोदरा में जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने संयम बरतने संबंधी अपनी पिछली टिप्पणियों पर विपक्ष की आलोचना का सीधा जवाब देने से परहेज किया और इसके बजाय ऐसे उपायों का पालन करने की अपनी अपील पर जोर दिया।
उन्होंने 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों के साथ शुरू हुए पश्चिम एशिया संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को स्वीकार किया। इस संघर्ष के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं और वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आया।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''पहले कोविड-19 महामारी का संकट आया, उसके बाद वैश्विक आर्थिक चुनौतियां आईं और अब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ रहा है। इन सभी परिस्थितियों का प्रभाव पूरी दुनिया में लगातार महसूस किया जा रहा है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।''
उन्होंने पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न स्थिति को इस दशक के प्रमुख संकटों में से एक बताया।
मोदी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ''जिस तरह हम कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में एकजुट थे, उसी तरह हम इस संकट से भी निश्चित रूप से पार पा लेंगे।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने कई चीजों को आसान बना दिया है। उन्होंने सरकारी और निजी दोनों कार्यालयों में डिजिटल बैठकों और घर से काम करने की व्यवस्था को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''मैं कुछ स्कूलों से भी आग्रह करूंगा कि वे फिलहाल ऑनलाइन कक्षाओं की व्यवस्था को प्राथमिकता दें।''
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार आम नागरिकों पर संकट के न्यूनतम प्रभाव को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश को जन भागीदारी की शक्ति की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ''भारत का नागरिक होने के नाते हमें अपने कर्तव्यों को प्राथमिकता देनी चाहिए।'' उन्होंने बताया कि पिछले दशकों में जब भी देश ने युद्ध या किसी बड़े संकट का सामना किया, तो नागरिकों ने सरकार की अपील पर अपनी जिम्मेदारियों को निभाया।
उन्होंने कहा, ''आज भी हम सभी को एकजुट होकर अपने कर्तव्यों का पालन करने की आवश्यकता है, जिससे देश के संसाधनों पर पड़ने वाले बोझ को कम किया जा सके।''
उन्होंने बताया कि भारत आयात पर विदेशी मुद्रा के रूप में ''लाखों करोड़ रुपये'' खर्च करता है और कहा कि विदेशों से मंगाई जाने वाली वस्तुओं की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जबकि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हो गई हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''छोटे-बड़े हर प्रयास से हमें आयातित उत्पादों की खपत कम करनी चाहिए और विदेशी मुद्रा खर्च को बढ़ाने वाली निजी गतिविधियों से बचना चाहिए।''
प्रधानमंत्री ने लोगों से विदेश में छुट्टियां मनाने और 'डेस्टिनेशन वेडिंग' करने से बचने की अपील की क्योंकि ऐसी गतिविधियों में विदेशी मुद्रा का काफी खर्च होता है।
उन्होंने कहा, ''यह जरूरी है कि हम अपनी छुट्टियां भारत में ही मनाएं।''
उन्होंने कहा कि गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी जगहें पर्यटन और 'डेस्टिनेशन वेडिंग' के लिए एक प्रमुख केंद्र बन सकती हैं।
कच्चे तेल के आयात का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि दुनिया का एक बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र (पश्चिम एशिया) से तेल प्राप्त करता है जो वर्तमान में संघर्ष में उलझा हुआ है।
उन्होंने कहा, ''इसलिए जब तक स्थिति सामान्य नहीं हो जाती हम सभी को मिलकर छोटे-छोटे सामूहिक संकल्प लेने होंगे।''
मोदी ने बताया कि उन्होंने रविवार को कर्नाटक और तेलंगाना की अपनी यात्राओं के दौरान इस मुद्दे को उठाया था।
प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे जहां तक संभव हो पेट्रोल और डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो सेवाओं, इलेक्ट्रिक बसों और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें।
उन्होंने कहा, ''यात्रा के लिए 'कारपूलिंग' को बढ़ावा दें; जिनके पास कार है उन्हें एक ही वाहन में कई यात्रियों को ले जाना चाहिए और जिनके पास इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन हैं उन्हें दूसरों की मदद के लिए आगे आना चाहिए।''
प्रधानमंत्री ने खाद्य तेलों की खपत कम करने का आह्वान करते हुए कहा कि देश इनके आयात पर काफी विदेशी मुद्रा खर्च करता है।
उन्होंने कहा, ''सोने के आयात के कारण देश की काफी संपत्ति विदेशों में चली जाती है। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि हालात सामान्य होने तक सोने की खरीद को टाल दें; अभी इसकी (सोने की खरीद की) कोई तत्काल आवश्यकता नहीं है।''
मोदी ने लोगों से स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आग्रह किया और किसानों को उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी।
उन्होंने कहा, ''समय की मांग है कि 'वोकल फॉर लोकल' को एक जन आंदोलन में बदला जाए और विदेशी वस्तुओं के बजाय स्थानीय उत्पादों को अपनाया जाए।''
मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक प्रयास देश की सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संकट को देश के विकास पथ में बाधा नहीं बनने देना चाहिए।
हालिया विधानसभा चुनावों के परिणामों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) या उसके सहयोगियों की जीत ने पूरे देश में उत्साह का संचार किया है।
उन्होंने अपने गृह राज्य गुजरात में हाल में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में भाजपा के शानदार प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए कहा कि इन परिणामों पर पूरे देश में चर्चा हो रही है।
मोदी ने कहा, ''गुजरात की जनता ने हमेशा राजनीतिक स्थिरता को प्राथमिकता दी है।'' उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी राजनीतिक स्थिरता होती है, आर्थिक विकास की गति तेज होती है।
इस कार्यक्रम में सरदार धाम और उमिया धाम सहित नौ प्रमुख पाटीदार संगठनों ने राष्ट्र के प्रति योगदान के लिए मोदी को 'सरदार गौरव रत्न' पुरस्कार से सम्मानित किया।
कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने वडोदरा में 1.5 किलोमीटर लंबा रोड शो किया।
भाषा सुरभि संतोष
संतोष
1205 0008 वडोदरा