तमिलनाडु ट्रांसफॉर्मर खरीद घोटाला : उच्चतम न्यायालय का सीबीआई जांच के आदेश में दखल से इनकार
मनीषा
- 11 May 2026, 05:13 PM
- Updated: 05:13 PM
नयी दिल्ली, 11 मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु में ट्रांसफॉर्मर खरीद में 397 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की सीबीआई जांच के निर्देश देने वाले मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है।
शीर्ष अदालत ने इस संबंध में तमिलनाडु के पूर्व मंत्री वी. सेंथिल बालाजी की याचिका को सोमवार को खारिज कर दिया।
मद्रास उच्च न्यायालय ने 2021 से 2023 के बीच राज्य के बिजली मंत्री के रूप में बालाजी के कार्यकाल के दौरान ट्रांसफॉर्मर खरीद में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच के निर्देश दिए थे।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली बालाजी की याचिका पर सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया।
तमिलनाडु जनरेशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन कॉरपोरेशन (टीएएनजीईडीसीओ) के एक अधिकारी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उच्च न्यायालय के समक्ष सीबीआई जांच की कोई विशेष प्रार्थना नहीं की गई थी और यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
दवे ने कहा, ''उच्च न्यायालय के समक्ष सीबीआई जांच की कोई मांग नहीं की गई थी। यह राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला है।''
इस पर न्यायमूर्ति नाथ ने कहा कि यदि परिस्थितियां इसकी मांग करती हैं तो अदालत ऐसी जांच का निर्देश देने के लिए सक्षम है।
पीठ ने कहा, ''हमें किसी प्रार्थना की आवश्यकता नहीं है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि अदालत क्या महसूस करती है।''
उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि वह अपील पर सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है और मामले की जांच उच्च न्यायालय की टिप्पणियों से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से आगे बढ़नी चाहिए।
मद्रास उच्च न्यायालय ने 29 अप्रैल को तमिलनाडु सरकार द्वारा 45,000 ट्रांसफॉर्मर की खरीद में कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। उच्च न्यायालय के आदेश के बाद बालाजी ने कहा था कि निविदा प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया और ट्रांसफॉर्मर खरीद में कोई अनियमितता नहीं हुई। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) नेता ने यह भी कहा था कि खरीद की प्रक्रिया 1987 से लागू है और ''अब तक वही प्रक्रिया अपनाई जा रही है।''
उच्च न्यायालय का यह आदेश उन आरोपों के बाद आया था कि 2021 से 2023 के बीच राज्य के खजाने को 397 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
यह आदेश गैर सरकारी संगठन अरप्पोर अय्यक्कम की याचिका पर पारित किया गया, जिसमें विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग की गई थी, जबकि अन्नाद्रमुक के विधिक प्रकोष्ठ के पदाधिकारी ई. सरवनन और राजकुमार ने कथित अनियमितताओं की सीबीआई जांच की मांग की थी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि तत्कालीन द्रमुक सरकार में बिजली मंत्री रहे बालाजी के कार्यकाल के दौरान 45,000 ट्रांसफॉर्मर की खरीद में 397 करोड़ रुपये की अनियमितताएं हुईं।
उच्च न्यायालय ने मामले से संबंधित सभी शिकायतों को विस्तृत जांच के लिए सीबीआई को स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था।
अदालत ने मामले में नये सिरे से जांच करने का निर्देश देते हुए सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) को दो सप्ताह के भीतर मामले से जुड़े सभी दस्तावेज सीबीआई को सौंपने को कहा था।
उच्च न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया था कि दस्तावेज मिलने के बाद सीबीआई जांच शीघ्र पूरी करे और कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करे।
अदालत ने टीएएनजीईडीसीओ, डीवीएसी और तमिलनाडु सरकार को जांच के दौरान सीबीआई को पूरा सहयोग देने का भी निर्देश दिया था।
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