दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती : प्रधानमंत्री मोदी
दिलीप
- 11 May 2026, 04:41 PM
- Updated: 04:41 PM
( तस्वीरों सहित )
सोमनाथ, 11 मई (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को 1998 के पोखरण परमाणु परीक्षण का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया की कोई भी ताकत भारत को झुका नहीं सकती या दबाव में नहीं ला सकती है।
भगवान शिव के प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित सोमनाथ अमृत महोत्सव में एक सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आज भी प्रभावी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टीकरण जरूरी लगता है और अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के विरोध के दौरान भी इसी तरह की सोच दिखाई दी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''अगर 1947 में भारत आजाद हुआ था... तो, 1951 में सोमनाथ की प्राण प्रतिष्ठा ने भारत की स्वतंत्र चेतना का उद्घोष किया था।''
मोदी ने कहा कि सोमनाथ का 'अमृत महोत्सव' केवल अतीत का उत्सव नहीं है, यह अगले एक हजार वर्षों के लिए भारत की प्रेरणा का महोत्सव भी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई केवल सोमनाथ मंदिर के नए स्वरूप में प्राण प्रतिष्ठा के लिए ही नहीं, बल्कि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 1998 में आज के ही दिन तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने परमाणु परीक्षण किए थे।
उन्होंने कहा, ''11 मई 1998, यानी आज के ही दिन, देश ने पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था। हमारे वैज्ञानिकों ने भारत के सामर्थ्य को, भारत की क्षमता को दुनिया के सामने रखा, दुनिया में तूफान आ गया।''
मोदी ने कहा, ''कई देश इससे नाराज हो गए, वे पूछने लगे कि भारत कौन होता है, जो परमाणु परीक्षण करे। दुनिया की आंखें लाल हो गईं।''
प्रधानमंत्री ने कहा, ''दुनिया भर की शक्तियां भारत को दबोचने के लिए मैदान में उतरी। अनेक प्रकार के प्रतिबंध लगाए गए। संभावित आर्थिक संकट से बचने का हर रास्ता रोकने की कोशिश की गई।''
मोदी ने कहा कि ऐसे हालात में कई देश हिल जाते, लेकिन भारत दृढ़ता से खड़ा रहा।
उन्होंने कहा, ''कोई भी हिल जाता। जब दुनिया भर की बड़ी-बड़ी शक्तियां इतना बड़ा आक्रमण कर दें, तो आगे के रास्ते दिखते नहीं हैं। लेकिन हम किसी और मिट्टी के बने हुए हैं।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि 11 मई को वैज्ञानिकों ने अपना काम कर लिया था, लेकिन 13 मई को फिर दो और परमाणु परीक्षण किए गए, उससे दुनिया को पता चला था कि भारत की राजनीतिक इच्छाशक्ति कितनी अटल है।
उन्होंने वैश्विक दबाव के आगे नहीं झुकने के लिए तत्कालीन वाजपेयी सरकार की तारीफ की।
मोदी ने कहा, ''उस समय पूरी दुनिया का दबाव भारत पर था, लेकिन अटल जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने यह दिखाया था कि हमारे लिए राष्ट्र प्रथम है। दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती, दबाव में नहीं ला सकती।''
उन्होंने कहा कि सोमनाथ हमें याद दिलाता है कि कोई भी राष्ट्र तभी लंबे समय तक मजबूत रह सकता है, जब वह अपनी जड़ों से जुड़ा रहे।
मोदी ने इस अवसर पर एक विशेष डाक टिकट भी जारी किया।
उन्होंने कहा, ''लुटेरों ने सोमनाथ मंदिर का वैभव मिटाने का प्रयास किया, वे सोमनाथ को एक भौतिक ढांचा मानकर उससे टकराते रहे! बार-बार इस मंदिर को तोड़ा गया, ये बार-बार बनता रहा... हर बार उठ खड़ा होता रहा।''
मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से देश में ऐसी शक्तियां आज भी प्रभावी हैं, जिन्हें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टीकरण जरूरी लगता है।
उन्होंने कहा, ''राममंदिर निर्माण जैसे अवसरों पर भी हमने देखा है, किस तरह राम मंदिर निर्माण का भी विरोध किया गया। हमें ऐसी मानसिकता से सावधान रहना है। इस तरह की संकुचित राजनीति को हमें पीछे छोड़ना होगा। हमें विकास और विरासत को साथ लेकर के आगे बढ़ना होगा।''
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल और भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के अनेक प्रयास किए थे, लेकिन उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से विरोध का सामना करना पड़ा।
प्रधानमंत्री ने कहा, ''हमें विरासत और धरोहर दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ना होगा। हमारे सांस्कृतिक केंद्रों की अनदेखी ने दरअसल हमारी प्रगति को बाधित ही किया है।''
इससे पहले प्रधानमंत्री ने 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' के तहत सोमनाथ मंदिर में महापूजा और अन्य अनुष्ठानों में भाग लिया।
उन्होंने इससे पहले हेलीपैड से मंदिर के पास स्थित वीर हमीरजी चौराहे तक करीब डेढ़ किलोमीटर लंबे मार्ग पर रोडशो भी किया।
भाषा वैभव दिलीप
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1105 1641 सोमनाथ