भारत और सिंगापुर ने आतंकी वित्तपोषण, कट्टरपंथ से मिलकर लड़ने का संकल्प लिया
माधव
- 08 May 2026, 09:23 PM
- Updated: 09:23 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) भारत और सिंगापुर ने आतंकवादियों की सीमा पार आवाजाही, कट्टरपंथ और आतंकी वित्तपोषण सहित आतंकवाद संबंधी विभिन्न चुनौतियों से निपटने के लिए संयुक्त रूप से काम करने का संकल्प लिया है।
एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने के लिए गठित संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) की पांचवीं बैठक बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली में आयोजित की गई, जिसमें दोनों पक्षों ने आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।
विज्ञप्ति के अनुसार, जेडब्ल्यूजी ने सीमा पार आतंकवाद सहित आतंकवाद के सभी स्वरूपों एवं अभिव्यक्तियों की स्पष्ट निंदा की तथा आतंकवाद को "कतई बर्दाश्त न करने" के सिद्धांत की पुष्टि की।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि बैठक में दोनों पक्षों ने अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले और नवंबर में लाल किले के पास हुई आतंकवादी घटना की कड़ी निंदा की।
इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
विज्ञप्ति में कहा गया है, "जेडब्ल्यूजी ने आतंकवादियों की भर्ती, सीमा पार आवाजाही, कट्टरपंथ, आतंकवादी उद्देश्यों के लिए प्रौद्योगिकी का दुरुपयोग और आतंकवादी वित्तपोषण सहित पारंपरिक और उभरते खतरों एवं चुनौतियों की एक विस्तृत शृंखला पर चर्चा की।"
इसमें कहा गया है कि दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक आतंकवाद के खतरे के आकलन, साइबर अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध एवं आतंकवाद के बीच संबंधों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और इन चुनौतियों से निपटने में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई।
विज्ञप्ति के मुताबिक, "जेडब्ल्यूजी ने विशेष रूप से सूचनाओं एवं सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने, कानून प्रवर्तन और आतंकवाद एवं अंतरराष्ट्रीय अपराधों का मुकाबला करने के लिए क्षमता निर्माण के क्षेत्र में सहयोग तथा समन्वय बढ़ाने पर भी सहमति जताई।"
इसमें कहा गया है कि जेडब्ल्यूजी ने इस बात पर भी सहमति जताई कि आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए लगातार और व्यापक तरीके से समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है।
विज्ञप्ति के अनुसार, दोनों देशों ने आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए संयुक्त राष्ट्र, आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संघ), वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) और अन्य मंचों पर बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इसमें कहा गया है, "जेडब्ल्यूजी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएसी) की 1267 प्रतिबंध समिति द्वारा सूचीबद्ध आतंकवादियों और आतंकी समूहों से निपटने में सहयोग के मुद्दे पर भी चर्चा की।"
विज्ञप्ति में कहा गया है कि जेडब्ल्यूजी ने सीमा पार खतरों के खिलाफ अधिक प्रभावी और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए सूचना साझा करने के तंत्र एवं प्रक्रिया को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
सिंगापुर के प्रतिनिधिमंडल ने भारत के घोटाला-विरोधी केंद्र का भी दौरा किया।
विज्ञप्ति के मुताबिक, "अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले घोटालों से निपटने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व पर जोर देते हुए दोनों पक्षों ने सूचनाओं एवं सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और क्षमता निर्माण के माध्यम से सहयोग बढ़ाने की उम्मीद जताई।"
भाषा पारुल माधव
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