चीन ने पिछले साल हुए भारत-पाक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को मदद पहुंचाने की पुष्टि की
दिलीप
- 08 May 2026, 10:32 PM
- Updated: 10:32 PM
(केजेएम वर्मा)
बीजिंग, आठ मई (भाषा) चीन ने पहली बार इस बात की पुष्टि की है कि उसने पिछले साल भारत-पाक संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को रण क्षेत्र में प्रौद्योगिकी सहायता प्रदान की थी। चीन की आधिकारिक मीडिया ने यह जानकारी दी।
चीन के सरकारी प्रसारणकर्ता 'सीसीटीवी' ने बृहस्पतिवार को देश के विमानन उद्योग निगम (एवीआईसी) के चेंगदू वायुयान डिजाइन एवं अनुसंधान संस्थान के इंजीनियर झांग हेंग का साक्षात्कार प्रसारित किया।
एवीआईसी चीन के उन्नत लड़ाकू विमानों और मानवरहित वायुयान (यूएवी) का एक प्रमुख विकासकर्ता है।
हांगकांग से प्रकाशित होने वाले 'साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट' ने 'सीसीटीवी' के हवाले से बताया कि झांग ने पिछले साल मई में चार दिवसीय संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को प्रौद्योगिकी सहायता प्रदान की थी।
पाकिस्तान की वायुसेना के पास चीन निर्मित जे-10सीई लड़ाकू विमानों का बेड़ा है, जिनका उत्पादन एवीआईसी की एक सहायक कंपनी द्वारा किया जाता है।
झांग ने कहा, ''हम अक्सर लड़ाकू विमानों के उड़ान भरने की गर्जना और हवाई हमले के सायरन की लगातार आवाज सुना करते थे। मई में, सुबह होते-होते तापमान 50 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच जाता था। यह हमारे लिए मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से एक कठिन परीक्षा थी।''
झांग ने 'सीसीटीवी' को बताया कि उनकी टीम को ''रण क्षेत्र में सहायता प्रदान करने में और भी बेहतर काम करने की इच्छा'' और यह सुनिश्चित करने की लगन ने प्रेरित किया कि उनके उपकरण ''अपनी पूरी युद्ध क्षमता के साथ प्रदर्शन कर सकें।''
उन्होंने कहा, ''यह जे10सीई (चीन निर्मित लड़ाकू विमान) के उपयोग को महत्व देना भर नहीं है। यह हमारे बीच कंधे से कंधा मिलाकर, दिन-रात काम करने से बने गहरे जुड़ाव का भी प्रमाण है।''
चीन के विदेश मंत्रालय और सैन्य अधिकारियों ने संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को बीजिंग के समर्थन के आरोपों को या तो खारिज कर दिया है या उन्हें तवज्जो नहीं दी है।
भारत के उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह के इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है कि चीन ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को सैन्य सहायता प्रदान की और संघर्ष का इस्तेमाल एक ''लाइव लैब'' के रूप में किया।
पिछले साल जुलाई में भारतीय वाणिज्य और उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा आयोजित ''नये युग की सैन्य प्रौद्योगिकियों'' पर एक संगोष्ठी में अपने संबोधन में, लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने कहा था कि चीन ने भारत की सैन्य तैनाती की निगरानी के लिए अपने उपग्रहों का उपयोग किया, क्योंकि पाकिस्तानी सेना को फोन पर डीजीएमओ (सैन्य संचालन महानिदेशक) स्तर की वार्ता के दौरान इस पर तत्काल जानकारी मिल रही थी।
ताजा खबरों के अनुसार, पाकिस्तान को चीन अपना जे-35 बमवर्षक विमान बेचने की योजना बना रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि पिछले साल मई में भारत के साथ हुए संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को चीन द्वारा दी गई सहायता के बारे में चीनी अधिकारियों द्वारा किए गए खुलासे को एक नयी ''बिक्री रणनीति'' के रूप में देखा जा रहा है।
चेंगदू वायुयान डिजाइन और अनुसंधान संस्थान के एक अन्य कर्मचारी, जू दा, जिन्होंने युद्ध के दौरान पाकिस्तान को प्रत्यक्ष सहायता मुहैया कराई थी, ने जे-10सीई विमान की तुलना एक ''बच्चे'' से की।
जू ने कहा, ''हमने इसे विकसित किया, इसकी देखभाल की और अंत में इसे उपयोगकर्ता को सौंप दिया। और अब, यह एक बड़ी परीक्षा का सामना कर रहा।''
उन्होंने कहा, ''जे-10सीई द्वारा हासिल किए गए उत्कृष्ट परिणामों को देखकर हमें कोई आश्चर्य नहीं हुआ, और यह बिल्कुल भी अचानक नहीं लगा।'' उन्होंने कहा कि यह तो होना ही था, विमान को बस सही अवसर की आवश्यकता थी और ''जब वह क्षण आया, तो इसने ठीक वैसा ही प्रदर्शन किया जैसा हमें उम्मीद थी।''
जे-10सीई, जे-10सी 4.5 पीढ़ी के लड़ाकू विमान का निर्यात संस्करण है और इसे जे-10 श्रृंखला का सबसे उन्नत मॉडल माना जाता है।
भाषा सुभाष दिलीप
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