एडीएजी से जुड़े 'बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी' मामले की गहन जांच जरूरी : न्यायालय
माधव
- 08 May 2026, 06:31 PM
- Updated: 06:31 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि अनिल धीरूभाई अंबानी समूह और उसकी कंपनियों से जुड़े कथित बड़े पैमाने पर बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में "गहन जांच" की आवश्यकता है।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने कहा है कि सात मामलों में कुल अनुमानित नुकसान लगभग 27,337 करोड़ रुपये है।
सीबीआई ने उच्चतम न्यायालय को बताया कि नौ प्राथमिकियां दर्ज की गई हैं, जिनमें वे दो मामले भी शामिल हैं जिनमें आरोपपत्र दायर किये जा चुके हैं, और सात मामलों में जांच जारी है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ पूर्व नौकरशाह ई.ए.एस. सरमा द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उद्योगपति अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (एडीएजी) की कंपनियों द्वारा कथित तौर पर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण धोखाधड़ी की अदालत की निगरानी में जांच का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह "भ्रमित करने वाला" है कि सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) दोनों ने इसे 27,000 करोड़ रुपये का घोटाला बताया है और अनिल अंबानी को इसका "सरगना" बताया है, लेकिन उन्होंने अभी तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया है।
भूषण ने कहा, "हर जगह सीबीआई और ईडी यही कह रहे हैं कि इस 27,000 करोड़ रुपये के घोटाले में अनिल अंबानी मुख्य सूत्रधार हैं। फिर भी मुझे यह बात बेहद हैरान करती है कि न तो सीबीआई और न ही ईडी उन्हें गिरफ्तार करने को तैयार हैं, मानो वह कोई बेदाग शख्सियत हों।"
पीठ ने टिप्पणी की कि उच्चतम न्यायालय ने बार-बार कहा है कि वह जांच एजेंसी की इच्छा के बिना गिरफ्तारी का निर्देश देने में अत्यंत संकोच करेगा।
पीठ ने कहा कि जांच को सनसनीखेज बनाने के बजाय, ध्यान जांच और प्रासंगिक सामग्री के संग्रह पर केंद्रित होना चाहिए।
न्यायालय ने टिप्पणी की कि किसी मामले में हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता जांच एजेंसी के विवेक पर छोड़ दी जानी चाहिए।
न्यायालय ने कहा कि वह फिलहाल जांच पर नजर रखने की योजना बना रहा है।
अनिल अंबानी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने सवाल उठाया कि याचिकाकर्ता के पास इस मामले में दायर किये गए आरोपपत्रों में से एक कैसे हो सकता है, जबकि संबंधित अदालत ने अभी तक इस पर संज्ञान नहीं लिया है।
सिब्बल ने कहा, "उनका एकमात्र मकसद अनिल अंबानी को गिरफ्तार करना है। जब संज्ञान ही नहीं लिया गया है तो उनके पास आरोप पत्र की प्रति कैसे हो सकती है?" उन्होंने कहा कि अनिल अंबानी जांच में हर तरीके से सहयोग कर रहे हैं।
सिब्बल ने कहा, "हो सकता है कि मेरे (अंबानी) साथ धोखा हुआ हो।"
भूषण ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता नहीं चाहता कि किसी को भी नुकसान पहुंचे।
पीठ ने टिप्पणी की कि वह किसी भी पक्ष को कोई नुकसान नहीं पहुंचाना चाहती।
पीठ ने इस मामले को जुलाई में आगे विचार के लिए सूचीबद्ध किया।
भाषा
प्रशांत माधव
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