टीवीके प्रमुख को तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर मिलना चाहिए: उमर
वैभव
- 08 May 2026, 03:00 PM
- Updated: 03:00 PM
श्रीनगर, आठ मई (भाषा) जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल द्वारा तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के नेता विजय को सरकार बनाने से रोके जाने का कोई औचित्य नहीं है और विजय को विधानसभा में बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने बृहस्पतिवार को टीवीके प्रमुख विजय का सरकार बनाने का दावा यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि उनकी पार्टी के पास विधायकों की जरूरी संख्या नहीं है।
टीवीके तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए साधारण बहुमत से पीछे रह गई है। हालांकि पांच निर्वाचित विधायकों वाली कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देने की पेशकश की है लेकिन इसके बावजूद विजय की पार्टी 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 118 के साधारण बहुमत के आंकड़े से पीछे है।
अब्दुल्ला ने कहा कि तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लागू करने का कोई औचित्य नहीं है क्योंकि उच्चतम न्यायालय के कई फैसलों में इस बात पर जोर दिया गया है कि सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए और फिर सदन में अपना बहुमत साबित करने के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए।
तमिलनाडु की राजनीतिक स्थिति के बारे में पूछे जाने पर अब्दुल्ला ने यहां संवाददाताओं से कहा, ''यदि हम उच्चतम न्यायालय का फैसला देखें तो राष्ट्रपति शासन नहीं लगना चाहिए। ऐसे कई मामले हैं जिनमें उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि चुनावों के बाद सबसे बड़े दल को सरकार गठन के लिए आमंत्रित किया जाना चाहिए और उसे विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।''
उन्होंने कहा, ''ऐसा तब भी हुआ था, जब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 13 दिन के लिए सरकार बनाई थी। राष्ट्रपति ने उनके संख्याबल दर्शाने का इंतजार नहीं किया था। राष्ट्रपति ने उन्हें आमंत्रित किया, सरकार 13 दिन चली लेकिन जब वाजपेयी के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी तो उन्होंने इस्तीफा दे दिया।''
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा कि इसलिए यदि उच्चतम न्यायालय के फैसले को आधार माना जाए तो तमिलनाडु लोक भवन के पास ''इस प्रक्रिया को रोकने का कोई औचित्य नहीं है।''
अब्दुल्ला ने कहा, ''विजय को सरकार बनाने की अनुमति दी जानी चाहिए और फिर उन्हें बहुमत साबित करने का अवसर दिया जाना चाहिए। यदि वह बहुमत साबित कर देते हैं तो वह पद पर बने रहेंगे और यदि ऐसा नहीं कर पाते तो उन्हें इस्तीफा देना होगा।''
भाषा सिम्मी वैभव
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