कांग्रेस-टीवीके गठजोड़ पर अय्यर ने कहा : निम्न स्तर के राजनीतिक अवसरवाद की बू आती है
मनीषा
- 08 May 2026, 12:39 PM
- Updated: 12:39 PM
नयी दिल्ली, आठ मई (भाषा) पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने तमिलनाडु में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के साथ गठबंधन करने के कांग्रेस के फैसले को शुक्रवार को "बहुत खराब" करार दिया और कहा कि इससे "निम्न स्तर के राजनीतिक अवसरवाद" की बू आती है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने इस बात पर जोर भी दिया कि अगर यह कदम द्रविड़ राजनीति के वर्चस्व वाले राज्य में "सांप्रदायिक भाजपा" के पिछले दरवाजे से प्रवेश की सुविधा प्रदान करता है तो यह सबसे खतरनाक और "राजनीतिक फुटबॉल" के इतिहास में सबसे खराब आत्मघाती गोल साबित होगा।
अय्यर ने कहा कि वह इस बात की कल्पना नहीं कर सकते कि कांग्रेस के पूर्वज ऐसी "अवसरवाद की राजनीति" को अपना आशीर्वाद देते।
उन्होंने "पीटीआई-भाषा" से कहा कि द्रमुक के साथ चुनाव लड़ने के तुरंत बाद उस टीवीके के साथ गठजोड़ करने का फैसला बहुत खराब है, जिसने "23 विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस को हराया।''
अय्यर ने कहा, "यह महात्मा गांधी के 1925 के उस कथन का अक्षम्य उल्लंघन है कि ''स्वराज को नैतिकता पर आधारित सरकार होनी चाहिए।"
'द हिंदू' के तमिल संस्करण में प्रकाशित एक लेख में वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने पूछा कि तमिलनाडु में कांग्रेस के साझेदार बदलने में चाणक्य की जीत हुई है या महात्मा गांधी की?
उनका कहना है, "कांग्रेस ने पांच सीटें जीतीं, उसने यह सीटें अपने दम पर नहीं बल्कि पूरी तरह से द्रमुक के साथ अपनी दशकों पुरानी कनिष्ठ साझेदारी के बल पर जीती। वास्तव में, पूर्व संसदीय क्षेत्र मयिलादुतुरई द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन का इतना मजबूत गढ़ साबित हुआ, कि इसके छह विधानसभा क्षेत्रों में से पांच ने विजय की टीवीके के खिलाफ गठबंधन के सदस्यों के पक्ष में मतदान किया, जिसमें दो सीटें द्रमुक को और एक-एक सीट गठबंधन सहयोगियों डीएमडीके, आईयूएमएल और कांग्रेस को मिलीं।"
उन्होंने कहा कि इस प्रकार, जनादेश स्पष्ट रूप से द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन के पक्ष में और राजनीति में नए उतरे पक्ष के खिलाफ गया।
अय्यर ने कहा, "पिछले 35 वर्षों से इस विलक्षण संसदीय क्षेत्र के साथ मेरे जुड़ाव के संदर्भ में मैं बेहद खेद और दुख के साथ यह लेख लिख रहा हूं।"
उन्होंने कहा, "यह देखते हुए कि राज्यव्यापी जनादेश पुरानी द्रविड़ पार्टियों के खिलाफ और सी जोसेफ विजय की टीवीके के पक्ष में आया और विजय पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष हैं, एक पुराने और आज़माए हुए साथी को छोड़ने में "निम्न स्तर की राजनीतिक अवसरवादिता की बू आती है"।
उन्होंने कहा, "हालांकि अवसरवादिता चाणक्यवादी राजनीति का सार है। यह गांधी की कांग्रेस की सच्चाई की राजनीति नहीं थी। "
भाषा हक सिम्मी मनीषा
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