विपक्षी दलों का ममता को समर्थन : इस्तीफा नहीं देने को केंद्र और निर्वाचन आयोग के प्रति विरोध बताया
अविनाश
- 06 May 2026, 08:38 PM
- Updated: 08:38 PM
मुंबई, छह मई (भाषा) विपक्षी दलों ने बुधवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विधानसभा चुनावों में हार के बाद इस्तीफा नहीं देने के फैसले का समर्थन किया। शिवसेना(उबाठा) नेता संजय राउत ने इसे केंद्र और निर्वाचन आयोग के खिलाफ उनका विरोध करार दिया।
महाराष्ट्र के मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता मंगल प्रभात लोढ़ा ने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद भी बनर्जी द्वारा इस्तीफा न देना संवैधानिक मानदंडों की अवहेलना के बराबर होगा। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की ''राष्ट्रवादी'' जनता ने उन्हें कड़ा सबक सिखाया है।
इससे पहले राउत ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केंद्र की 'तानाशाही' और निर्वाचन आयोग के 'पक्षपातपूर्ण' व्यवहार के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव निकाय केंद्र का ''गुलाम'' बन गया है।
शिवसेना (उबाठा) नेता ने कहा कि विपक्ष को यह तय करना होगा कि उसे चुनाव लड़ना है या नहीं।
उन्होंने कहा, ''ममता बनर्जी का इस्तीफा न देना केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और लोकतंत्र के खिलाफ कई कृत्यों को लेकर उनके आंदोलन का हिस्सा है।''
राउत ने कहा कि यह देखना बाकी है कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों को ''जनता का जनादेश नहीं बल्कि एक साजिश'' करार देते हुए ममता बनर्जी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया।
पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीट पर जीत दर्ज कर 15 साल के तृणमूल कांग्रेस का शासन का अंत कर दिया।
ममता बनर्जी ने इस परिणाम को ''धांधली का नतीजा'' करार देते हुए कहा कि उनकी पार्टी निर्वाचन आयोग से लड़ रही थी, भाजपा से नहीं। तृणमूल को केवल 80 सीटें ही मिल सकीं।
राउत ने एक फेसबुक पोस्ट में कहा कि ममता बनर्जी का इस्तीफा न देने का फैसला पूरी तरह से उचित है। उन्होंने 2022 के महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से भी इसकी तुलना करने की कोशिश की।
राउत ने कहा कि अविभाजित शिवसेना के बागी विधायकों को अयोग्य करार देने के लिए दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश ने टिप्पणी की थी कि उद्धव ठाकरे, जो उस समय पार्टी के प्रमुख थे, ने इस्तीफा नहीं दिया होता तो उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में बहाल किया जा सकता था।
राज्यसभा सदस्य ने कहा कि शिवसेना (उबाठा) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने चुनाव के बाद बनर्जी को फोन किया और उन्हें समर्थन दिया। 'इंडिया' (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस) गठबंधन के लगभग सभी नेताओं ने बनर्जी को फोन करके अपना समर्थन दिया है।
राउत ने कहा, ''अगर हमें केंद्र की तानाशाही और निर्वाचन आयोग के पक्षपातपूर्ण व्यवहार या जिस तरह से चुनाव निकाय सरकार का गुलाम बन गया है, उसके खिलाफ एकजुट होना है, तो हमें एक साथ आना होगा।''
उन्होंने दावा किया कि सरकार में भी कई लोग ''लोकतंत्र के पतन'' से सहमत नहीं हैं।
राकांपा (शप) प्रवक्ता महेश तापसे ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर किया गया और चुनाव परिणामों को प्रभावित करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और प्रशासनिक तंत्र का इस्तेमाल किया गया।
उन्होंने संवाददाताओं से बातचीत के दौरान विस्तृत विश्लेषण की आवश्यकता पर जोर दिया।
शरद पवार नीत पार्टी के नेता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग जैसे संस्थानों और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई), आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल इस तरह से किया गया जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हो।
तापसे ने दावा किया कि केंद्रीय बलों और एजेंसियों की उपस्थिति तथा कार्रवाइयों के कारण मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करने से रोका गया, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर चिंताएं बढ़ गईं।
लोढ़ा ने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने को लेकर विपक्षी दलों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणामों से संकेत मिलता है कि ''जो लोग हिंदू हितों की बात करेंगे, वही देश पर शासन करेंगे''।
लोढ़ा ने कहा कि ''बंगाल की राष्ट्रवादी जनता ने ममता दीदी को कड़ा सबक सिखाया है'' और आरोप लगाया कि हार के बाद इस्तीफा देने से इनकार करना संवैधानिक मानदंडों की अवहेलना करने के बराबर होगा।
उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के शासनकाल में बंगाल ने ''बहुत अधिक कष्ट' सहा है।
भाजपा नेता ने तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष बनर्जी पर हिंदुओं के खिलाफ कथित अत्याचारों पर चुप्पी साधने और घुसपैठ को 'वोट बैंक का मुद्दा' मानने का आरोप लगाया।
लोढ़ा ने कहा, ''संवैधानिक पद पर रहते हुए भी, उन्होंने इन घटनाओं को बिना किसी कार्रवाई के देखा।'' उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं के बीच आक्रोश के कारण शासन को 'मतदान के माध्यम से उखाड़ फेंका गया'।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर चुनाव लड़े गए और जनादेश भाजपा में मजबूत विश्वास को दर्शाता है।
लोढ़ा ने कहा कि ''देश में हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।'' उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद और हिंदू हितों की रक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
भाजपा नेता ने कहा, ''इन परिणामों के माध्यम से पश्चिम बंगाल के राष्ट्रवादी नागरिकों ने यह संदेश पूरे देश में पहुंचा दिया है।''
भाषा धीरज अविनाश
अविनाश
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