देश के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर अप्रैल में पांच महीने के उच्च स्तर पर
निहारिका
- 06 May 2026, 12:54 PM
- Updated: 12:54 PM
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) देश के सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर अप्रैल में बढ़कर पांच महीने के उच्च स्तर 58.8 पर पहुंच गई। नए ऑर्डर और उत्पादन में तेज वृद्धि इसकी मुख्य वजह रही।
मौसमी रूप से समायोजित एचएसबीसी इंडिया सेवा पीएमआई कारोबारी गतिविधि सूचकांक मार्च के 57.5 से बढ़कर अप्रैल में 58.8 हो गया जो पिछले नवंबर के बाद विस्तार की सबसे मजबूत दर को दर्शाता है।
क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की भाषा में 50 से ऊपर अंक का मतलब गतिविधियों में विस्तार से और 50 से कम का आशय संकुचन से होता है।
यह सूचकांक एक प्रश्न पर आधारित होता है, जिसमें पूछा जाता है कि व्यापारिक गतिविधि का स्तर पिछले महीने की तुलना में कैसा है।
सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों के अनुसार, प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण, ई-कॉमर्स और विशेष रूप से स्थानांतरण (रिलोकेशन) तथा लॉजिस्टिक्स सेवाओं की मजबूत मांग ने बिक्री वृद्धि को बढ़ावा दिया।
एचएसबीसी की मुख्य अर्थशास्त्री (भारत) प्रांजुल भंडारी ने कहा, '' अप्रैल में भारत का सेवा पीएमआई पांच माह के उच्च स्तर 58.8 पर पहुंच गया। नए ऑर्डर मजबूत हुए। हालांकि नए निर्यात ऑर्डर में नरमी आई जिससे संकेत मिलता है कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच मांग विदेशों से घरेलू उपभोक्ताओं की ओर स्थानांतरित हो रही है।''
भारतीय सेवाओं की अंतरराष्ट्रीय मांग कमजोर पड़ी। कंपनियों ने संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में युद्ध और कमजोर पर्यटन ने विस्तार की गति को प्रभावित किया।
सेवा कंपनियों ने अपने परिचालन खर्चों में एक बार फिर उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है। अप्रैल में मुद्रास्फीति की दर में कमी आने के बावजूद, यह नवंबर 2024 के बाद से उच्चतम स्तरों में से एक बनी रही। कंपनियों ने खाद्य पदार्थ (खाना पकाने का तेल, अंडे, मांस और सब्जियां), गैस तथा श्रम लागत और गैस की कमी का इसकी वजह बताया।
इन अतिरिक्त लागतों का हालांकि केवल एक हिस्सा ही ग्राहकों पर डाला गया, जैसा कि बिक्री कीमतों में वृद्धि से संकेत मिलता है। कुल शुल्क मुद्रास्फीति दर तीन माह के निचले स्तर पर आ गई।
भारतीय सेवा कंपनियां अगले 12 महीनों में उत्पादन बढ़ने को लेकर आश्वस्त हैं। हालांकि सकारात्मक भावना का स्तर मार्च की तुलना में घटा जो पश्चिम एशिया संकट और लागत दबावों की चिंताओं का असर दर्शाता है।
रोजगार के मोर्चे पर, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही की शुरुआत में कंपनियों ने अधिक कर्मचारियों की भर्ती की। उनके अनुसार, नए कारोबार की बढ़ती मात्रा के कारण अल्पकालिक कर्मचारियों और कनिष्ठ स्तर के प्रशिक्षुओं की भर्ती बढ़ी।
इस बीच, एचएसबीसी इंडिया समग्र पीएमआई उत्पादन सूचकांक 57.0 से बढ़कर 58.2 हो गया जो ऐतिहासिक रूप से मजबूत विस्तार दर का संकेत देता है। हालांकि यह वृद्धि लगभग ढाई वर्ष में सबसे धीमी में से एक रही।
समग्र पीएमआई सूचकांक, तुलनीय विनिर्माण एवं सेवा पीएमआई सूचकांकों का भारित औसत है। भार, आधिकारिक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) आंकड़ों के अनुसार विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के सापेक्ष आकार को दर्शाता है।
एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई को एसएंडपी ग्लोबल द्वारा सेवा क्षेत्र की करीब 400 कंपनियों से प्राप्त प्रश्नावली के जवाबों के आधार पर तैयार किया जाता है। इसमें उपभोक्ता (खुदरा को छोड़कर), परिवहन, सूचना, संचार, वित्त, बीमा, रियल एस्टेट और व्यावसायिक सेवाएं शामिल हैं।
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