ममता बनर्जी का इस्तीफा देने से इनकार करना 'संवैधानिक अपमान': भाजपा
नरेश
- 05 May 2026, 08:15 PM
- Updated: 08:15 PM
नयी दिल्ली/कोलकाता, पांच मई (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इस्तीफा देने से इनकार करने को 'संवैधानिक अपमान' करार दिया और उन पर शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता हस्तांतरण की अवधारणा को कमजोर करने का आरोप लगाया। विधानसभा चुनाव में ममता की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को भारी हार का सामना करना पड़ा है।
राज्य में भाजपा की शानदार चुनावी जीत के एक दिन बाद कोलकाता में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने मतगणना प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का आरोप लगाया। ममता ने दावा किया कि लगभग 100 सीटों पर जनादेश 'लूटा गया' और उनकी पार्टी का मनोबल गिराने के लिए जानबूझकर मतगणना धीमी की गई।
उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं उठता, क्योंकि हम जनता के जनादेश से नहीं, बल्कि एक साजिश से हारे हैं। मैं हारी नहीं हूं, मैं लोक भवन नहीं जाऊंगी। वे संवैधानिक मानदंडों के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं।''
पलटवार करते हुए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने फेसबुक पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि बनर्जी हिंसा के माध्यम से संवैधानिक व्यवस्था को 'क्षतिग्रस्त' करने का सुझाव दे रही हैं और उन्होंने इसकी तुलना छह जनवरी, 2021 को अमेरिका के 'कैपिटल' पर हुए हमले से की।
उन्होंने कहा, ''ममता बनर्जी जो सुझाव दे रही हैं वह संविधान विरोधी, बी.आर. आंबेडकर विरोधी और संवैधानिक अपमान के समान है, इसके अलावा चुनाव बाद उनका उग्र रवैया भी है। वह सत्ता के शांतिपूर्ण हस्तांतरण की अवधारणा को पलटना चाहती हैं, जो हमारी संवैधानिक व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता है।''
'एक्स' पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में पूनावाला ने बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह चुनावी हार के बाद खुद को 'पीड़ित' के रूप में पेश कर रही हैं और जनता के जनादेश को स्वीकार करने के बजाय निर्वाचन आयोग को दोषी ठहरा रही हैं।
उन्होंने कहा, ''ममता बनर्जी अब जनता के फैसले का अनादर करते हुए और इस्तीफा न देने की बात कहकर सबसे घिनौना 'अपने को पीड़ित पेश करने' का खेल, खेल रही हैं।''
उन्होंने कहा, ''भले ही वह इस्तीफा न दें, विधानसभा आठ मई को भंग हो जाएगी और उनकी सदस्यता वैसे भी समाप्त हो जाएगी। इससे साफ पता चलता है कि वह संविधान के खिलाफ काम कर रही हैं, क्योंकि सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण हमारे लोकतंत्र की पहचान है।''
उन्होंने अतीत के उदाहरणों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि बनर्जी ने वक्फ अधिनियम और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) जैसे केंद्रीय कानूनों के कार्यान्वयन का विरोध करके और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर पहले भी संवैधानिक सिद्धांतों को कमजोर किया है।
उन्होंने 2021 में चुनाव के बाद हुई कथित हिंसा और हाल के महीनों में न्यायिक अधिकारियों को धमकाने की घटनाओं का भी जिक्र किया और दावा किया कि कानून-व्यवस्था बिगड़ी है और ऐसे कृत्य संवैधानिक मूल्यों को बनाए रखने के उनके दावों के विपरीत हैं।
कोलकाता में भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के प्रवक्ता देबजीत सरकार ने आरोप लगाया कि बनर्जी का यह रवैया कुछ और दिनों तक सुर्खियों में बने रहने के लिए है।
ममता के इस्तीफा देने से इनकार करने के बारे में सरकार ने कहा, ''वह सिर्फ खुद को हंसी का पात्र बना रही हैं। वह चुनाव परिणामों को लेकर उच्चतम न्यायालय में जाने के लिए स्वतंत्र हैं। वैसे भी कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह मुख्यमंत्री नहीं रहेंगी।''
भाषा संतोष नरेश
नरेश
0505 2015 दिल्ली