डीआईआई की निफ्टी 500 में हिस्सेदारी रिकॉर्ड 20.9 प्रतिशत पर, एफआईआई हिस्सेदारी 17 प्रतिशत पर आई
प्रेम
- 05 May 2026, 08:11 PM
- Updated: 08:11 PM
नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने भारतीय शेयर बाजार में अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है। निफ्टी 500 कंपनियों में उनकी हिस्सेदारी जनवरी-मार्च तिमाही में बढ़कर रिकॉर्ड 20.9 प्रतिशत पर पहुंच गई जबकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की हिस्सेदारी घटकर 17.1 प्रतिशत रह गई। मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में वैश्विक अनिश्चितताओं, खासकर ईरान-इजराइल तनाव के कारण घरेलू शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रहा। हालांकि, इस दौरान घरेलू निवेश ने बाजार को मजबूती प्रदान की।
घरेलू संस्थागत निवेशकों ने जनवरी-मार्च 2026 के दौरान कुल 27.2 अरब डॉलर का निवेश किया, जिसे व्यवस्थित निवेश योजना (एसआईपी) के जरिये आने वाले स्थिर प्रवाह से समर्थन मिला।
इसके उलट, एफआईआई ने बीती तिमाही में 15.8 अरब डॉलर की शुद्ध निकासी की, जिसमें वैश्विक तनाव बढ़ने के बाद मार्च में हुई 14.2 अरब डॉलर की भारी बिकवाली शामिल है।
रिपोर्ट कहती है, "पश्चिम एशिया का संकट टलने के बाद एफआईआई प्रवाह में सुधार आने की पूरी संभावना है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी को भी बाजार सकारात्मक रूप में लेगा जबकि प्रवाह बढ़ने पर बाजारों में बड़ी तेजी आ सकती है।"
रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी 500 में एफआईआई-डीआईआई स्वामित्व अनुपात मार्च 2026 में घटकर 0.8 गुना रह गया, जो संस्थागत हिस्सेदारी के ढांचे में बदलाव का संकेत है। इस दौरान मुक्त प्रवाह आधार पर एफआईआई की हिस्सेदारी घटकर 33.8 प्रतिशत रह गई, जबकि डीआईआई की हिस्सेदारी बढ़कर 41.2 प्रतिशत हो गई।
सालाना आधार पर मार्च 2026 में निफ्टी 500 कंपनियों में डीआईआई की हिस्सेदारी 1.70 प्रतिशत अंक बढ़कर रिकॉर्ड 20.9 प्रतिशत हो गई, जबकि एफआईआई की हिस्सेदारी एक साल पहले के 18.9 प्रतिशत से घटकर 17.1 प्रतिशत रह गई।
इस दौरान प्रवर्तकों की हिस्सेदारी लगभग स्थिर 49.4 प्रतिशत रही, जबकि खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़कर 12.7 प्रतिशत हो गई।
क्षेत्रवार आधार पर डीआईआई ने 24 में से 21 क्षेत्रों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई। निजी बैंक, प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, रियल एस्टेट, स्वास्थ्य सेवा और एनबीएफसी क्षेत्रों में सबसे अधिक निवेश बढ़ा। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण सेवाएं (ईएमएस), गैर-ऋण एनबीएफसी और धातु क्षेत्रों में डीआईआई की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई।
एफआईआई के निवेश रुझानों से पता चला कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं एवं बीमा (बीएफएसआई) क्षेत्र में उनकी हिस्सेदारी घटकर 32.1 प्रतिशत रह गई जबकि धातु, स्वास्थ्य सेवा, उपयोगिता और तेल एवं गैस क्षेत्रों में निवेश बढ़ा।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एफआईआई की हिस्सेदारी मार्च 2026 में घटकर रिकॉर्ड निचले स्तर 7.3 प्रतिशत पर आ गई।
रिपोर्ट के अनुसार, निफ्टी 500 के कुल बाजार पूंजीकरण में बड़ी पूंजी वाली कंपनियों, मध्यम पूंजी वाली कंपनियों और छोटी पूंजी वाली कंपनियों की हिस्सेदारी क्रमशः 67 प्रतिशत, 22 प्रतिशत और 11 प्रतिशत रही।
साथ ही, डीआईआई ने निजी क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू) की कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर क्रमशः 21.5 प्रतिशत और 17.5 प्रतिशत कर दी।
भाषा योगेश प्रेम
प्रेम
0505 2011 दिल्ली